आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार भारत में आरक्षण को जारी रखने वाले राष्ट्र को बताएँ कि जातियों के नाम पर अपनी दुकान यानि पार्टी खोलकर कर अपनी ही जाति को भ्रमित कर अब तक इन नेताओं ने कितनी पूँजी अर्जित कर ली है? आरक्षण का दुरूपयोग होते देख, जब डॉ बी.आर. अम्बेडकर ने ही तत्कालीन सरकार से आरक्षण को समाप्त करने का आग्रह किया था, फिर किस कारणवश इसे जारी रखा गया? इतना ही नहीं, डॉ अम्बेडकर ने तो केवल 10 वर्ष माँगे थे, फिर किस कारणवश आज तक इसे लागू किया हुआ है? क्या आरक्षण के पक्षकारों को नहीं मालूम कि आरक्षण के नाम पर जनता को गुमराह किया जा रहा है? जाति और पेशे के नाम पर आरक्षण दिया जाता है, लेकिन इनको उस पेशे के नाम से पुकारा नहीं जा सकता, क्यों? अब इसे राजनीति का दोगलापन न कहा जाए तो क्या कहा जाए? किसी प्रतियोगिता में कम अंक लेने वाले अनुसूचित जाति वालों को प्राथमिकता दी जाती है, लेकिन सवर्ण जाति द्वारा अधिक अंक अर्जित करने वाले देखते रह जाते हैं, क्या यह प्रतियोगिता के नाम पर छलावा नहीं?आखिर कब तक जनता को गुमराह किया जाता रहेगा? इस सन्दर्भ में अवलोकन करें:-- आरक्षण ख...