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केरल : भगवान अयप्पा पर बनी फिल्म ‘मलिकप्पुरम’ ने कमाए 100 करोड़ रुपये, बॉलीवुड भर रहा हिंदू विरोधी जहर

समझदार व्यापारी वही होता है, जो अपने ग्राहक की नब्ज पकड़ व्यापार करे और बदलते वातावरण को देख  दक्षिण फिल्म जगत ने हिन्दुत्व पर फिल्में निर्मित कर तिजोरियां भर रहा है, विपरीत इसके हिन्दुत्व के खिलाफ फिल्में बनाने वाला बॉलीवुड #boycott bollywood का शिकार हो रही है।   मलयालम फिल्म मलिकप्पुरम ब्लॉकबस्टर साबित हुई है। मात्र 3.5 करोड़ रुपए में बनी फिल्म ने करीब 100 करोड़ रुपए की कमाई कर ली है। इस फिल्म में भगवान अय्यपा के प्रति एक 8 साल की बच्ची की श्रद्धा को दिखाया गया है। मलिकप्पुरम मलयालम भाषा में 30 दिसंबर, 2022 को बड़े पर्दे पर रिलीज हुई थी। एक तरफ दक्षिण भारत में जहां सनातन धर्म का झंडा बुलंद किया जा रहा है वहीं बॉलीवुड दिमाग में हिंदू विरोधी जहर घोल रहा है। बॉलीवुड फिल्मों में हिन्दुओं की भावनाओं को आहत करने की घटनाएं कोई नई नहीं है, यह वर्षों से चली आ रही है। बॉलीवुड में जैसे एक ये कल्चर बन चुका है। कंट्रोवर्सी के लिए और एक एजेंडे के तहत जानबूझकर फिल्मों के कंटेट को हिन्दू विरोधी बनाया जाता है। Malikappuram a movie based on the girl who is devotee of Ayyappa swami &...

60 हिंदू नामों वाला ‘लव जिहादी’ कार मैकेनिक गिरफ्तार

देशभर में लव जिहाद की घटनाओं  के बीच यूपी के अमरोहा में एक ऐसा शख्स पकड़ा गया है जिसने 60 से ज्यादा हिंदू लड़कियों को अपना शिकार बना रखा था। इसका नाम अरमान मलिक है और ये फेसबुक पर अलग-अलग हिंदू नामों से लड़कियों से चैट किया करता था और उन्हें अपनी बातों में फंसाकर उनका यौन शोषण किया करता था। पिछले दिनों इसने चंडीगढ़ में तैनात एक महिला मजिस्ट्रेट से भी हिंदू नाम वाले फेसबुक प्रोफाइल पर उसने चैटिंग करनी शुरू की थी। लेकिन जल्दी ही उन्हें शक हो गया कि ये कोई जालसाज है। महिला मजिस्ट्रेट ने इसकी शिकायत पुलिस में कर दी। जांच के बाद यूपी के अमरोहा से अरमान मलिक नाम के लड़के को पकड़ा गया। अमरोहा के एसपी सुधीर कुमार सिंह ने इस गिरफ्तारी की जानकारी दी है। गिरफ्तारी के बाद खुली पोल अरमान मलिक नाम का यह लड़का अमरोहा के मोहल्ला नई बस्ती तकिया मोती शाह का रहने वाला है। इलाके में उसे दिलशाद और नौशाद नामों से भी जाना जाता है। पेशे से कार मैकेनिक का काम करने वाला अरमान मलिक बाकी समय में फेसबुक पर हिंदू लड़कियों को फंसाने में जुटा रहता था। उसने अलग-अलग हिंदू नामों से ढेरों फेसबुक प्रोफाइल बना र...

भगवान राम की शरण में पहुंची केरल की मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी

बदले राजनीतिक माहौल में केरल की मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) भी भगवान राम की शरण में पहुंच गई है। मलयालम कैलेंडर के अंतिम महीने करकीडक्कम को रामायण मास के रूप में मनाया जाता है।  मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस दौरान राज्य सरकार के साथ ही सीपीएम पार्टी स्तर पर कई कार्यक्रम आयोजित करने जा रही है।रामायण माह 17 जुलाई से 16 अगस्त तक मनाया जाएगा।  स्मरणीय हो, कोर्ट को रामजन्मभूमि विवाद पर खुदाई में अवशेषों को छुपाकर गुमराह करने वाले वामपंथी इतिहासकार ही थे।यदि उस समय ही कोर्ट के समक्ष समस्त अवशेष प्रस्तुत कर दिए होते, अयोध्या में अब तक भव्य राममन्दिर बन चूका होता। परन्तु बदलते परिवेश में आज वही वामपंथी राम की शरण में जा रहे है। अब इसे छद्दमवाद न कहा जाये तो क्या कहा जाए? फिर यदि राम में वास्तव में वामपंथियों की आस्था जाग्रत हो रही है, तो राष्ट्र को खुदाई में मिले समस्त अवशेषों को प्रदर्शित कर, अयोध्या में रामजन्मभूमि होने की सच्चाई से भी जनता और कोर्ट को अवगत करायें।  इस सन्दर्भ में  अवलोकन करिए :-- http://nigamrajendra28.blo...

‘मोदी-राज खत्म करने के लिए राजीव गांधी की हत्या जैसा कुछ करेंगे’

महाराष्ट्र में भीमा-कोरेगांव हिंसा के आरोपियों से पुलिस को संदिग्ध ईमेल और चिट्ठी मिली हैं। इसमें पूर्व प्रधानमंत्री  राजीव गांधी  की तरह  नरेंद्र मोदी  की हत्या की साजिश  का जिक्र है। पुणे पुलिस के मुताबिक, माओवादियों ने प्रधानमंत्री के रोड शो को निशाना बनाने की बात लिखी है। पुलिस ने ये सभी दस्तावेज कोर्ट में पेश किए। उधर, कांग्रेस ने इसे मोदी का पुराना हथकंडा करार दिया है। बता दें कि 1 जनवरी को हुई हिंसा के मामले में पुलिस ने नक्सलियों के हाथ होने का दावा किया है। केरल निवासी एक्टिविस्ट रोना विल्सन समेत 5 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। मोदी राज खत्म करने के लिए कदम उठाएं न्यूज एजेंसी के मुताबिक, पुलिस ने माओवादियों के इंटरनल कम्युनिकेशन को इंटरसेप्ट किया। ईमेल में कहा गया- ''नरेंद्र मोदी 15 राज्यों में भाजपा की सरकार बनाने में कामयाब हुए हैं। अगर ऐसे ही चलता रहा तो सभी मोर्चों पर पार्टी के लिए परेशानी खड़ी हो जाएगी। कॉमरेड किसन और कुछ अन्य सीनियर कॉमरेड ने मोदी राज खत्म करने के लिए कारगर सुझाव दिए हैं। हम इसके लिए राजीव गांधी जैसे हत्याकांड पर विचार कर...

राज्यसभा चुनाव : भाजपा ने संख्या बढ़ाई, लेकिन बहुमत से चूकी

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार  16 राज्यों में  राज्यसभा की 58 सीटों  पर 23 मार्च,शुक्रवार को वोट डाले गए। इन सीटों में से अधिकांश नेता निर्विरोध चुने गए, जबकि  उत्तर प्रदेश , झारखंड और तेलंगाना में वोट डाले गए। यूपी में तो क्रास वोटिंग के कारण मतदान के समय खूब हंगामा भी हुआ। यूपी और तेलंगाना में विरोध के चलते कुछ समय के लिए मतगणना रोकनी भी पड़ी।  इतनी भागदौड़ करने उपरान्त भी  भाजपा राज्य सभा में सबसे बड़ी पार्टी जरूर बन गयी है, लेकिन लोकसभा की तरह बहुमत नहीं प्राप्त कर पायी, बहुमत से अभी भी 20 सीटें कम हैं। जिस कारण लोकसभा की तरह हर बिल को पारित करवाने में कठिनाई होगी। क्योकि कोई सरकार अपने इच्छित बिल तभी पारित करवा सकती है, जब उसकी दोनों सदनों में तूती बोल रही हो। अन्यथा विपक्ष बिलों में अड़चनें डाल सत्तारूढ़ दल के मार्ग में काँटें बिछाती रहेगी।  33 सीटों पर निर्विरोध चुने गए अगर प्रदेश के मुताबिक सीटों की बात की जाए तो उत्तर प्रदेश में 10, बिहार और महाराष्ट्र में 6-6, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल में 5-5, गुजरात और कर्नाटक की 4-4, आंध्र प्र...

त्रिपुरा: भाजपा-माकपा में पहली बार सीधी टक्कर

देश की राजनीति में कभी काफी महत्वपूर्ण स्थान रखने वाली सीपीएम की आज महज तीन राज्यों में उपस्थिति है. पश्चिम बंगाल, केरल और त्रिपुरा. दूसरी तरफ देश के डेढ़ दर्जन राज्यों में भाजपा की न केवल उपस्थिति है बल्कि सरकारें हैं. देश के अठारह राज्यों में भाजपा की सरकार होने के बावजूद त्रिपुरा ही वह पहला राज्य है जहां पहली बार भाजपा और माकपा में सीधी टक्कर हो रही है. त्रिपुरा में भाजपा-माकपा में पहली बार सीधी टक्कर में मुक़ाबला दिलचस्प है. केरल के बाद त्रिपुरा पर माकपा की नजर इससे पहले केरल की चुनावी टक्कर में मुक़ाबला कांग्रेस और यूडीएफ के बीच था तो पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस भी थी. त्रिपुरा में आज तक भाजपा के चुनाव चिन्ह कमल के निशान पर एक भी विधायक निर्वाचित नहीं हुआ है. बावजूद इसके यह सवाल पूछा जा रहा है कि भाजपा और माकपा में पहली बार हो रही सीधी टक्कर में आखिर जीतेगा कौन? त्रिपुरा में सत्ता सिंहासन पाने का जादुई आंकड़ा 31 है. दरअसल, त्रिपुरा में माकपा के नेतृत्व वाले वाम मोर्चा एवं भाजपा के बीच चुनावी जंग पर सबकी निगाहें टिकी हैं. त्रिपुरा की 60 सदस्यीय विधानसभ...

एबीवीपी की वामपंथियों को ललकार

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार  केरल में वामपंथी संगठनों और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े संगठनों के बीच जारी तनातनी के बीच अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने वामपंथियों को ललकारा है। वामपंथी संगठनों के खूनी खेल और आरएसएस कार्यकर्ताओं को लगातार निशाना बनाए जाने की घटनाओं पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने केरल में वामपंथी सगठनों को चुनौती दी है कि वे लोकतंत्र को दफन नहीं होने देंगे। चलो देर आए दुरुस्त आए। यदि यही प्रदर्शन आज से 30 वर्ष पूर्व इसी तरह कम्युनिस्टों द्वारा संघ एवं भाजपा कार्यकर्ताओं की हो रही  जघन्य हत्याओं के विरुद्ध हुआ होता, शायद परिस्थिति कुछ और ही होती। ऐसा नहीं है, कि प्रदर्शन नहीं हुआ, हुए लेकिन केवल केरल तक ही सीमित रहे और मीडिया में संघ समर्पित पत्र-पत्रिकाओं के अलावा कोई चर्चा नहीं होती थी। वैसे तो हाल आज भी वही है, किसी शांतिप्रिय के हत्या पर समस्त मीडिया चीखता-चिल्लाता है, परन्तु संघ और भाजपा कार्यकर्ताओं की होती हत्याओं पर सबको साँप सूंघ जाता है।  सत्ता के गलियारों में अब यह भी चर्चा होने लगी है कि संघ अथवा भाजपा की हत्या होने पर केरल सरक...

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To write on general topics and specially on films;THE BLOGS ARE DEDICATED TO MY PARENTS:SHRI M.B.L.NIGAM(January 7,1917-March 17,2005) and SMT.SHANNO DEVI NIGAM(November 23,1922-January24,1983)