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एबीवीपी की वामपंथियों को ललकार

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
केरल में वामपंथी संगठनों और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े संगठनों के बीच जारी तनातनी के बीच अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने वामपंथियों को ललकारा है। वामपंथी संगठनों के खूनी खेल और आरएसएस कार्यकर्ताओं को लगातार निशाना बनाए जाने की घटनाओं पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने केरल में वामपंथी सगठनों को चुनौती दी है कि वे लोकतंत्र को दफन नहीं होने देंगे।
चलो देर आए दुरुस्त आए। यदि यही प्रदर्शन आज से 30 वर्ष पूर्व इसी तरह कम्युनिस्टों द्वारा संघ एवं भाजपा कार्यकर्ताओं की हो रही  जघन्य हत्याओं के विरुद्ध हुआ होता, शायद परिस्थिति कुछ और ही होती। ऐसा नहीं है, कि प्रदर्शन नहीं हुआ, हुए लेकिन केवल केरल तक ही सीमित रहे और मीडिया में संघ समर्पित पत्र-पत्रिकाओं के अलावा कोई चर्चा नहीं होती थी। वैसे तो हाल आज भी वही है, किसी शांतिप्रिय के हत्या पर समस्त मीडिया चीखता-चिल्लाता है, परन्तु संघ और भाजपा कार्यकर्ताओं की होती हत्याओं पर सबको साँप सूंघ जाता है। 
सत्ता के गलियारों में अब यह भी चर्चा होने लगी है कि संघ अथवा भाजपा की हत्या होने पर केरल सरकार के विरुद्ध तो प्रदर्शन होंगे ही, साथ ही अब उन लोगों के घरों और कार्यालयों पर भी प्रदर्शन किए जिन्होंने पुरस्कार वापस कर धर्म-निरपेक्षता के नाम पर छद्दम धर्म-निरपेक्षता का नंगा नाच किया था। यदि इस तरह की माँग पर सबकी सहमति बन जाती है, उस स्थिति में इन छद्दमों की क्या हालत होगी, वह समय ही बताएगा। हकीकत तो यही है कि इतने दशकों से इन छद्दमों के कारण देश ने बहुत प्रताड़नाएं झेली है, लोग एक दूसरे को अपना दुश्मन समझ एक-दूसरे से घृणा करते रहे। आज देश में केवल केन्द्र में सत्ता परिवर्तन नहीं हुआ, बल्कि देश में एक नहीं सुबह हुई है, अँधेरा छंटने का शंखनाद हो चूका है। मोदी विरोधी इस भ्रम में भी न रहे कि 2019 में मोदी सरकार नहीं बनेगी, जो ऐसा कहता या सोंचता है, नोस्ट्राडेमस का अध्ययन कर ले। 
इस सन्दर्भ में अवलोकन करें:--
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अपमानम अपमानम वामपंथ से शुरू हुआ संबोधन
एबीवीपी के राष्ट्रीय महामंत्री विनय बिदरे ने सबसे पहले रैली में सभी प्रतिनिधियों का स्वागत किया और ‘अभिमानम, अभिमानम, अभिमानम केरलम’ “अपमानम अपमानम अपमानम वामपंथ” के नारे से अपना संबोधन शुरू किया. विनय बिदरे ने कहा कि केरल सांस्कृतिक विरासत तथा आदिशंकराचार्य का पवित्र स्थान है, यह अपनी प्राकृतिक सुंदरता और साक्षरता दर के लिए प्रसिद्ध राज्य है, लेकिन कम्युनिस्ट हर चीज को नष्ट करने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करते हैं. उन्होने कहा कि 1957  में सीपीआईएम के सत्ता में आते ही निर्दोष लोगों के लिए सबसे खराब दौर शुरू हो गया. अभाविप के राष्ट्रीय महामंत्री ने कहा कि चरमपंथवाद कम्युनिस्टों की शक्ति है और केरल में सीपीएम सरकार उसी का अनुसरण कर रही है. महारैली को संबोधित करते हुए उन्होने कहा कि वामपंथी संगठनों के विचारों में दोहरापन है और यह इस बात से स्पष्ट है कि जेएनयू में वे अपनी शक्ति के रूप में एक कलम का दावा करते हैं, लेकिन केरल में तलवार उनकी ताकत बन जाती है.
आमलोगों में आतंक पैदा कर रही केरल सरकार
Related imageएबीवीपी के राष्ट्रीय संगठन मंत्री सुनील अाम्बेकर ने कहा कि 17 सितंबर, 1996 को 21 साल पहले सीपीआईएम ने युवा छात्रों सुजीत, अनू और किम को मार डाला लेकिन उनके बलिदानों से प्रेरित होने के बाद केरल में हजारों छात्रों ने कम्युनिज्म को केरल से बाहर निकालने का प्रतिज्ञा ली. दिल्ली में कम्युनिस्टों का दावा है कि वे गरीब लोगों के अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं लेकिन वास्तविकता में केरल, छत्तीसगढ़, झारखंड और पश्चिम बंगाल में बहुत से लोग मारे गए हैं. उन्होने कहा कि वामपंथी सत्ता में बने रहने के लिए आम व्यक्ति के मन में आतंक पैदा करना चाहते हैं. सुनील आंबेकर ने साम्यवाद, माओवाद और आतंकवाद को एक समान बताया.
दूसरों के विचारों को दबाना लोकतंत्र नहीं
थिंक इंडिया एबीवीपी के राष्ट्रीय संयोजक आशीष चौहान ने कहा कि दूसरों के विचारों को दबाना किसी भी तरह का लोकतंत्र नहीं है और एबीवीपी हमेशा सभी पहलुओं पर बहस और चर्चा करने के लिए तैयार रहता है. डीयू छात्रसंघ की महासचिव महामेधा नागर ने कहा कि जेएनयू में बलात्कार, बस्तर और पश्चिम बंगाल में महिलाओं की हालत तथा केरल में महिलाओं पर कम्युनिस्टों द्वारा किए गए हमलों ने उनकी विचारधारा को दर्शाया है जो कैम्पसों में नारीवाद की बात करता है. जेएनयू के छात्रसंघ के अध्यक्ष पद की उम्मीदवार निधि त्रिपाठी ने कहा कि इन वामपंथी गुंडों का दोहरा चरित्र अब सभी के बीच सामने आया है और उनके भाषण और अभिव्यक्ति की तथाकथित स्वतंत्रता से काफी परिचित हैं.
वामपंथ और हिंसा मुक्त केरल की शपथ
अभाविप के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ नागेश ठाकुर ने कहा कि केरल को हिंसामुक्त राज्य बनाने की आवश्यकता है और सभी प्रतिनिधियों को “वामपंथ और हिंसा मुक्त केरल” की शपथ दिलाई गई. एबीवीपी केंद्रीय कार्यसमिति सदस्य और जेएनयू के चर्चित छात्र नेता सौरभ शर्मा ने बताया कि महारैली पूरे भारत के लगभग 50000 कार्यकर्ताओं के साथ केरल में संपन्न हुआ. सौरभ शर्मा ने कहा कि चलो केरला अंततः तिरुवनंतपुरम की पवित्र भूमि में उत्साह के साथ संपन्न हुआ और वर्तमान सरकार से अलग विचारधारा एवं एक लोकतांत्रिक दृष्टिकोण रखने वाले शहीदों के बलिदान को याद करते हुए पूरा शहर भगवामय हो गया.
बिहार से एक हजार कार्यकर्ता पहुंचे
केरल में अभाविप की महारैली में एक हजार से अधिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया. बिहार के कार्यकर्ताओं में भी खासा उत्साह देखा गया. अभाविप नेता उमेश कुमार ने बताया कि केरल में वामपंथी संगठनों की स्थिति चरमपंथियों जैसी हो गई है और वामपंथी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष की बड़ी शुरुआत अभाविप द्वारा की गई है.

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To write on general topics and specially on films;THE BLOGS ARE DEDICATED TO MY PARENTS:SHRI M.B.L.NIGAM(January 7,1917-March 17,2005) and SMT.SHANNO DEVI NIGAM(November 23,1922-January24,1983)

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