शत्-शत् नमन आज ३ मार्च पुण्यतिथी: कुशल वक्ता, उच्चकोटि के लेखक, क्रांतिकारी – लाला हरदयाल प्रतिदिनसूर्य उदय होता है, अस्त होता है, रात्रि अपना अंधकार फैलाती है। मानवजीवन की शुरुआत का अर्थ ही मौत का निश्चित आना है। ३ मार्च की रात विलक्षण प्रतिभा के धनी लाला हरदयाल जो सोये तो सोते ही रह गये। ४ मार्च की सुबह अनपेक्षित रूप से वे फिलाडेल्फिया-अमेरिका में मृत्यु की आगोश में चले गये। लाला हरदयाल कुशल वक्ता व उच्च कोटि के लेखक थे।दीनबंधु एंड्रूज के अनुसार यदि लाला हरदयाल का जन्म शांति के समय में होता तो वो अपनी बुद्धि का उपयोग आश्चर्य जनक कार्यो के लिए करते। लाला हरदयाल ने उन्हें विलक्षण आदर्श वादी करार दिया। पेशकार गौरी दयाल माथुर के पुत्र रत्न रूप में लाला हरदयाल का जन्म दिल्ली में हुआ था। सेंट स्टीफेन कॉलेज दिल्ली से कला स्नातक की उपाधि लाला हरदयाल ने ली। राजकीय कॉलेज लाहौर सेएक ही वर्ष में अंग्रेजी साहित्य में तथा अगले वर्ष इतिहास में परास्नातक किया। दिल्ली में लाला हरदयाल क्रान्तिकारियो के प्रति आकर्षित हो गये। मास्टर अमीर चन्द्र,भाई बाल मुकुंद और हनुमंत सहाय जैसे विख्यात क्रां...