चाणक्य की एक युक्ति है : "जब देश में हाहाकार मचने लगे, समझ लो, प्रशासक सख्त है।" मजे की बात है कि देश और प्रदेश दोनों प्रशासक सख्त हैं। जो किसी भी विरोधी को हज़म नहीं हो रहे। और दूसरी मजेदार बात, जब-जब विरोधियों ने उत्तर प्रदेश या मोदी सरकार को घेरना चाहा, असलियत बहुत जल्दी सड़क पर जाती है। ठीक वैसी ही स्थिति काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के साथ हो गयी। वैसे काफी समय से इस विश्वविद्यालय पर छद्दम धर्म-निरपेक्षों की गन्दी निगाह पड़ी हुई है, वरिष्ठ पत्रकार स्मरण करें कि इस विश्वविद्यालय से "हिन्दू" शब्द निकालने के लिए छद्दम धर्म-निरपेक्ष नेताओं दवारा कितनी बार असफल प्रयास किया जा चुका है। पुलिस को मार सकती हैं, लेकिन छेड़छाड़ करने वालों को नहीं ; मतलब इस आंदोलन की इस आग में कुछ काला नहीं, बल्कि सारी दाल ही काली है? काशी हिंदू विश्वविद्यालय में हुई हिंसा का सच अब सामने आने लगा है। यह बात साफ हो गई है कि छेड़खानी के खिलाफ छात्राओं के आंदोलन को एक साजिश के तहत हिंसा की आग में झोंक दिया गया। इसके पीछे साफ तौर पर कैंपस में सक्रिय नक्सली वामपंथी गिरोह शामिल हैं। इन्हें समाजव...