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| पुलिस को मार सकती हैं, लेकिन छेड़छाड़ करने वालों को नहीं ; मतलब इस आंदोलन की इस आग में कुछ काला नहीं, बल्कि सारी दाल ही काली है? |
काशी हिंदू विश्वविद्यालय में हुई हिंसा का सच अब सामने आने लगा है। यह बात साफ हो गई है कि छेड़खानी के खिलाफ छात्राओं के आंदोलन को एक साजिश के तहत हिंसा की आग में झोंक दिया गया। इसके पीछे साफ तौर पर कैंपस में सक्रिय नक्सली वामपंथी गिरोह शामिल हैं। इन्हें समाजवादी पार्टी, कांग्रेसी और आम आदमी पार्टी की तरफ से खुला सपोर्ट मिल रहा है। मीडिया भी इस सोची-समझी साजिश का हिस्सा रहा। क्योंकि उन्होंने इस पूरे आंदोलन का दूसरा पहलू कभी सामने नहीं आने दिया। बीएचयू में कानून की पढ़ाई कर रही एकता सिंह नाम की छात्रा ने सोशल मीडिया के जरिए सच को सबके सामने लाने की हिम्मत दिखाई। उन्होंने एक के बाद एक फेसबुक पर कई पोस्ट के जरिए सारी सच्चाई देश के आगे रख दी। इसके लिए उन्हें भी धमकियों और गालियों का शिकार बनना पड़ा।
लड़कियाँ दुर्गा का रूप जरूर होती हैं लेकिन भारतरत्न महामना मदनमोहन मालवीय जी की प्रतिमा पर कालिख पोतने वाली लड़कियाँ दुर्गा का रूप नहीं हो सकतीं,ये लोकतंत्र है और लोकतंत्र में सर्वाधिक सम्मान यदि किसी का होता है तो वो हैं हमारे सेना व पुलिस के जवान जोकि हमारी रक्षा करते हैं,रक्षा करने वाले का दर्जा भी किसी भगवान् से कम नहीं होता,ऐसे हमारे पुलिस के जवानों के साथ हाथापाई करने वाली लड़कियाँ भी दुर्गा का रूप नहीं हो सकतीं,ऐसी लड़कियों पर यदि लाठी बरसाई भी गयीं हों तो मैं नहीं समझता कि पुलिस ने कुछ भी गलत किया है,ऐसी लड़कियों से सख्ती से ही निपटना चाहिए और जो लोग उन्हें दुर्गा का अवतार बताकर भाजपा पर निशाना साध रहे हैं वो पहले खुद के गिरेबां में झांकें,महिलाओं का जितना सम्मान भाजपा में है उतना किसी भी दल में नहीं है,वहीं सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव कितना महिलाओं का सम्मान करते हैं ये भी हाल ही में उन्होंने दिखा दिया,परिवार वाद का कलंक मिटाने के लिये खुद राजनीति से सन्यास लेने की बजाय अपनी पत्नि डिंपल यादव के चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया,क्यों भैया??ऐसी क्या कमी है डिंपल यादव में जो वह चुनाव नहीं लड़ सकतीं??
उल्टा जिसे पाँच साल सत्ता में रहने के बाद जनता ने नकार दिया ऐसे अखिलेश यादव में जरूर कोई कमी रही ही होगी तभी तो जनता ने उनका बोरिया-बिस्तर बांध दिया,लेकिन खुद को सजा देने की बजाय अपनी पत्नि को राजनीति से दूर करके घर की चारदीवारी में कैद रहने का फतवा जारी कर दिया,वैसे ऐसा करके अखिलेश यादव ने सपा की महिला विरोधी मानसिकता को ही आगे बढ़ाया है क्योंकि इससे पहले इनके पिता और पूर्व सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने भी महिला आरक्षण का पुरजोर विरोध करके साबित किया था कि ये लोग महिलाओं को सिर्फ घर संभालने के काबिल ही समझते हैं।कांग्रेस में भी महिलाओं को टंच माल ही समझा जाता है,वामपंथियों की तो बात ही ना की जाये तो बेहतर होगा क्योंकि ये लोग देवी दुर्गा की तुलना जिससे करते हैं वो जानने के बाद पता चल जाता है कि ये महिलाओं का कितना सम्मान करते हैं,इसलिये इन फर्जी महिला समर्थकों को महिलाओं के सम्मान को लेकर भाजपा को नसीहतें देने का कोई अधिकार नहीं है,जहाँ तक बात बीएचयू की है तो वहाँ मामला छेड़खानी का नहीं बल्कि कुछ और ही है,धीरे-धीरे सपा,कांग्रेस और वामपंथियों की तरह ही ये पूरा मामला भी साफ हो जाएगा।
BHU की एक छात्रा एकता सिंह ने NDTV की खोली पोल, छात्रा के साथ छेड़छाड़ में मीडिया और कुछ राजनीती पार्टियाँ सेक रही है अपनी रोटियाँ
| “छात्राओं के गैर राजनीतिक आंदोलन में बाहर से आये लोगो का अतिक्रमण” |
बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी में कुछ अप्राधिओं ने एक छात्रा के साथ बदतमीज़ी की तो साड़ी छात्राये एक साथ हो गई और इसका पुरजोर विरोध किया। पर इस विरोध में कुछ सरारती तत्वों के घुस जाने की वजह से पुलिस को भी कारवाही करनी पढ़ी जिसमे कई लोग घायल हो गए।
अब इस मुद्दे पर कुछ टीवी चैनल और राजनीतिक पार्टिया राजनीती करने लगी है। BHU की एक छात्रा एकता सिंह ने फेसबुक पर एक पोस्ट किया है जिसमे उन्होंने लिखा है की “साथियों एक मजेदार बात सामने आई है। NDTV जी आज कैंपस में आंदोलन कवर करने आई और उनके पीछे एक कार आयी। वैन में से निकले कैमरामैन जी और कार से निकले रिपोर्टर जी और 5-6 लड़कियां जो चुपचाप आकर बाकी लड़कियों के बीच बैठ गईं। रिपोर्टर जी फिर सामने से आके उन लड़कियों की बाइट लिए। फिर वो लड़कियाँ उसी कार में बैठकर फुर्र हो गईं।”
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| ये वहीं आकांक्षा गुप्ता हे जो JNU के कन्हैया कुमार नक्सल प्रशिक्षक , उमर खालिद जैसे देश विभाजनकारीयों से प्रशिक्षण लेकर बनारस ( काशी )
हिन्दू विश्वविधालय में भी
आरजकता का महौल खड़ा कर रहीं हें......| |
1. एक लड़का आज गिरफ्तार हुआ है जो आरोपी था छेड़छाड़ का धरने पर बैठा था।
2. चार लड़के पकड़ा गए हैं भीड़ में घुस कर लड़कियों के बॉडी को टच कर रहे थे।
3.अनसेफ बीएचयू के बैनर लगाने वाला लड़का सी.पी.एम.का था जो हैदराबाद यूनिवर्सिटी से आया था।4.जो लड़की बाल मुड़ाइ थी वो विजुअल ऑर्ट्स फैकेल्टी की स्टूडेंट है जो एक नाटक के लिए बाल 2 दिन पहले मुड़ाइ थी। वो अक्सर बाल मुड़ा के नाटक में भाग लेती है।
आंदोलन को लड़कियां सही दिशा दें ताकि असली मुद्दें चल सकें।”
“छात्राओं के गैर राजनीतिक आंदोलन में बाहर से आये लोगो का अतिक्रमण”
BHU में चल रहा छात्राओं का आंदोलन पूरी तरह से राजनैतिक रंग में रंग चुका है, बड़ी संख्या में DU, JNU, तथा Allahabad University से आये AISA, SFI, NSUI आदि के नेता बड़ी संख्या में उपस्थित है, और इसी वजह से त्रिवेणी छात्रावास की छात्राओं (जिन्होंने यह आंदोलन शुरू किया था) में आक्रोश माहौल है ।मुख्य मांग “न्याय और सुरक्षा” की जगह राजनैतिक नारो से गुलज़ार है BHU का सिंह द्वार।
देख कर ऐसा प्रतीत हो रहा कि नेतागण समाधान नही मीडिया में पब्लिसिटी चाहते है, और इसी वजह से वार्ता विफल हो रही है।
एकता ने ही आंदोलन की शुरुआत की
हॉस्टल के बाहर एक छात्रा से छेड़खानी का मामला सामने आने के बाद एकता ने ही लड़कियों को एकजुट करके विरोध में आवाज बुलंद करने का फैसला किया था। 21 और 22 तारीख की रात 2 बजे उन्होंने फेसबुक के जरिए पहली आवाज उठाई। एकता ने लिखा- साथियों, आज बीएचयू की एक लड़की के साथ महामना की बगिया में बदसलूकी हुई। कल मैं, आप या फिर कोई भी हो सकता है। मार्च में शामिल होकर हमारी आवाज़ और बुलंद कीजिये और छेड़छाड़ के खिलाफ हल्ला बोलिये। नतीजा यह हुआ कि सुबह छह बजे तक लड़कियों का हुजूम विरोध में तैयार हो गया। विरोध प्रदर्शन शुरू होते ही विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने उनसे पहुंचकर बात की और तय हुआ कि इस केस में एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। साथ ही कैंपस में लड़कियों के गुजरने वाली जगहों पर सुरक्षा और चौकस की जाएगी। लेकिन तब तक वामपंथी, कांग्रेसी संगठनों ने मोर्चा संभाल लिया।
आंदोलन में गुंडों के घुसने का विरोध
एकता ने फेसबुक पर 22 सितंबर की रात में लिखा है कि “बीएचयू में जो भी आंदोलन हो रहा है वो सिर्फ और सिर्फ यहां की आम छात्राओं का है। यहां कुछ अराजक तत्व जो अपने राजनीतिक हित साधने के लिए बीएचयू गेट पर Unsafe BHU लटकाए और महामना की मूर्ति पर कालिख पोतने और लाल झंडा फहराने की कोशिश किए, उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई होनी चाहिए। वो लाल सलामी वाले या तो खुद भाग जाएं या भगा दिए जाएंगे। यह आंदोलन हमारा है किसी भी पॉलिटिकल पार्टी का नहीं। हम सब उनकी कड़ी निंदा करते हैं अपनी घटिया राजनीति बंद कीजिए।” एकता ने आगे लिखा है कि “जब परसों रात त्रिवेणी कॉम्प्लेक्स की लड़कियों ने आंदोलन तय किया तभी कुछ राजनीतिक दलों का प्लान भी सुनियोजित तरीक़े से बन गया। अब यह छात्राओं की मांग कम और उनका पोलिटिकल प्रोपेगेंडा ज्यादा हो गया है।”
आंदोलन के नाम पर गाली-गलौज!
एकता सिंह ने 23 सितंबर को सुबह 10 बजे के करीब फेसबुक पर लिखा है कि “अगर हमारी कोई जेनुइन मांग है तो क्या उसे रखने का तरीका भी सही नहीं होना चाहिए? गांधी ने इतने सत्याग्रह किए पर क्या कभी अंग्रेजों को माँ-बहन की गाली दी? आप वाइस चांसलर आवास के सामने ऑटो और बाइक से उपद्रवियों की तरह चक्कर लगाते हुए ‘वाइस चांसलर भड़वा, वाइस चांसलर भड़वा’ चिल्लाते हैं, लंका गेट पर यह लड़के वाइस चांसलर को माँ-बहन की गाली देते हैं और कहते हैं कि ‘आवे द ओकर चौराहे पर इज्जत उतार लेब।’ जब मैं इस तरीक़े के समर्थन और आंदोलन का विरोध करती हूँ तो आप मुझसे पूछते हैं कि क्या वाइस चांसलर तुम्हारे बाप हैं? क्या जो व्यक्ति आपका बाप नहीं आप उसकी मां-बहन को गाली दोगे? क्या इसी तरीक़े से सत्य की लड़ाई लड़ी जाती है? और मैं इन सबका विरोध करतीं हूँ तो आप लड़कियो को भड़काते हैं कि उसकी मत सुनो वो मैनेज हो गई हैं। वीसी से घूस खा लिया है? क्या हमने त्रिवेणी में इसलिए आंदोलन शुरू किया था? क्या इसलिए ही मैं रात के तीन बजे तक लड़कियो के कमरों में जा-जा कर उन्हें मार्च के लिए इकट्ठा कर रही थी? आज वो लड़के जो आंदोलनस्थल पर भी कमेंटबाजी कर रहे हैं और उन्हीं के खिलाफ हमारी लड़ाई है। वो बताएंगे कि हम लड़कियों को कैसे धरना करना चाहिए?”
एकता सिंह ने ही फेसबुक के जरिए बताया कि बीएचयू गेट पर आंदोलन पर बैठी और टीवी चैनलों को इंटरव्यू दे रही कई लड़कियां बाहर से मंगाई गई हैं।
एकता ने एनडीटीवी चैनल की कवरेज की सच्चाई को भी सामने ला दिया।
यहां तक कि सच सामने लाने के गुनाह में उन्हें बीएचयू प्रशासन की तरफ से भी कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है।
“हर कुछ घंटे में नेता बदल रहे है नए नए लोग आ रहे है, हमे तो कुछ भी समझ नही आ रहा है” यह कहना है प्रदर्शन में बैठी कुछ प्रथम वर्ष की छात्राओं का।
सवाल यह है कि:
1. जब यह आंदोलन BHU की छात्राओं का है तो वहाँ बड़ी संख्या में अनजान युवक-युवतियां और बाहर से आये लोग क्यों उपस्थित है? उनका उद्देश्य क्या है?
2. क्या MMV की प्रथम और द्वितीय वर्ष की छात्राओं को कुछ नेताओं द्वारा हथियार की तरह राजनीति चमकाने के लिए उपयोग किया जा रहा है?
3. Justice & Safety के नारों का स्थान गालियों और राजनैतिक नारो ने ले लिया है, यह गांधी के देश मे क्या आंदोलन का उचित तरीका है?
4. विगत 2 दिनों से सिंह द्वार को रोककर आंदोलन करने से जनता को हुई परेशानी के लिए कौन जिम्मेदार है? जबकि उसी रास्ते का प्रयोग सुंदरलाल हॉस्पिटल के एम्बुलेंस और मरीजो द्वारा किया जाता है!
आज बीएचयू में हुए घटना पर प्रकाश डालते हुए समस्त बिन्दुवों पर चर्चा करूँगा।
सर्वप्रथम मैं छात्रों और छात्राओ पर हुए लाठी चार्ज की कड़े शब्दों में निंदा करता हूँ ।
अब हम घटना की बात करते हैं। लगातार ये बात सामने आती है कि बीएचयू में छात्राओं के साथ छेड़छाड़ और बत्तमीजी करते है लड़के और प्रशासन के संज्ञान में मामला जाने के बाद भी कोई उचित कार्यवाही नही हो पाती।
आप को जान के आश्चर्य होगा कि लड़कियां सिर्फ लड़को से ही नही बल्कि लड़कियों के साथ लडकिया भी अश्लीलता कर रही है बीएचयू के होस्टलों में।अभी कुछ दिन पहले ही 25-30 लड़कियों ने लिखित शिकायत भी दिया था।खैर इतना तो मैं भी मानता हूं कि विश्विद्यालय प्रशासन काफी हद तक नाकाम रहा ऐसे मामले को सुलझाने में।
अगर समय रहते प्रशासन उचित कदम उठाती तो आज ये नौबत ही न आती।हर मामले में राजनीति होने लगी है और यहां भी ऐसा ही हो रहा है।एक मौके की तलाश थी लोगो को बीएचयू में हंगामा करने की।क्योंकि जेएनयू हैदराबाद इलाहाबाद में तो हंगामा कर ही चुके थे अब बीएचयू बचा था।आंदोलन कर रही लड़की लगातार उन लोगो का विरोध कर रही थी जो बाहर से आ कर आंदोलन को उग्र रूप देने की कोसिस कर रहे थे।
इस तोड़ फोड़ के पीछे वामपंथीयो समाजवादी छात्र सभा nsui जैसे संगठनों की अहम भूमिका रही। abvp छात्राओं के साथ तो था पर तोड़फोड़ नही चाहता था क्योंकि सरकार भी उन्ही के संगठन से जुड़ी है।
कुछ सवाल मेरे मन में भी आता है-
1-जो लडकिया 10 बम फोड़ सकती है क्या वो छेड़ने वाले शोहदों से डरती है?
2-क्या ओ दिलफेंक लड़के भी अच्छी नियत से लड़कियों का साथ देंगे जिनके नेता जी कहते है लड़के है गलतिया हो जाती है?
3-बाल मुड़वाने वाली लड़की laxmi बाई नही हो सकती पर गौरी लंकेश हो सकती है।
4-आंदोलन के समय अखिलेश जिंदाबाद क्यों लग रहे थे ?
5-आखिर शांति से चल रहा आन्दोलन अचानक उग्र कैसे हो गया?
6-पता चला है कि जो लड़की टकली दिख रही है वो घटना के दो दिन पहले मुंडन करवाया था और पहले भी कई बार टकली हुई थी उसे वो अलग look बताती थी।
ऐसे तमाम सवाल है जो विरोधियों के मंतब्य का पर्दाफाश करता है।
प्रशासन को सतर्क रहने की जरूरत है।जल्द से जल्द मामला सुलझ जाए यही देश हित मे होगा।और विश्वविद्यालय प्रशासन को इस घटना से सीख लेनी चाहिए।
2. क्या MMV की प्रथम और द्वितीय वर्ष की छात्राओं को कुछ नेताओं द्वारा हथियार की तरह राजनीति चमकाने के लिए उपयोग किया जा रहा है?
3. Justice & Safety के नारों का स्थान गालियों और राजनैतिक नारो ने ले लिया है, यह गांधी के देश मे क्या आंदोलन का उचित तरीका है?
4. विगत 2 दिनों से सिंह द्वार को रोककर आंदोलन करने से जनता को हुई परेशानी के लिए कौन जिम्मेदार है? जबकि उसी रास्ते का प्रयोग सुंदरलाल हॉस्पिटल के एम्बुलेंस और मरीजो द्वारा किया जाता है!
आज बीएचयू में हुए घटना पर प्रकाश डालते हुए समस्त बिन्दुवों पर चर्चा करूँगा।
सर्वप्रथम मैं छात्रों और छात्राओ पर हुए लाठी चार्ज की कड़े शब्दों में निंदा करता हूँ ।
अब हम घटना की बात करते हैं। लगातार ये बात सामने आती है कि बीएचयू में छात्राओं के साथ छेड़छाड़ और बत्तमीजी करते है लड़के और प्रशासन के संज्ञान में मामला जाने के बाद भी कोई उचित कार्यवाही नही हो पाती।
आप को जान के आश्चर्य होगा कि लड़कियां सिर्फ लड़को से ही नही बल्कि लड़कियों के साथ लडकिया भी अश्लीलता कर रही है बीएचयू के होस्टलों में।अभी कुछ दिन पहले ही 25-30 लड़कियों ने लिखित शिकायत भी दिया था।खैर इतना तो मैं भी मानता हूं कि विश्विद्यालय प्रशासन काफी हद तक नाकाम रहा ऐसे मामले को सुलझाने में।
अगर समय रहते प्रशासन उचित कदम उठाती तो आज ये नौबत ही न आती।हर मामले में राजनीति होने लगी है और यहां भी ऐसा ही हो रहा है।एक मौके की तलाश थी लोगो को बीएचयू में हंगामा करने की।क्योंकि जेएनयू हैदराबाद इलाहाबाद में तो हंगामा कर ही चुके थे अब बीएचयू बचा था।आंदोलन कर रही लड़की लगातार उन लोगो का विरोध कर रही थी जो बाहर से आ कर आंदोलन को उग्र रूप देने की कोसिस कर रहे थे।
इस तोड़ फोड़ के पीछे वामपंथीयो समाजवादी छात्र सभा nsui जैसे संगठनों की अहम भूमिका रही। abvp छात्राओं के साथ तो था पर तोड़फोड़ नही चाहता था क्योंकि सरकार भी उन्ही के संगठन से जुड़ी है।
कुछ सवाल मेरे मन में भी आता है-
1-जो लडकिया 10 बम फोड़ सकती है क्या वो छेड़ने वाले शोहदों से डरती है?
2-क्या ओ दिलफेंक लड़के भी अच्छी नियत से लड़कियों का साथ देंगे जिनके नेता जी कहते है लड़के है गलतिया हो जाती है?
3-बाल मुड़वाने वाली लड़की laxmi बाई नही हो सकती पर गौरी लंकेश हो सकती है।
4-आंदोलन के समय अखिलेश जिंदाबाद क्यों लग रहे थे ?
5-आखिर शांति से चल रहा आन्दोलन अचानक उग्र कैसे हो गया?
6-पता चला है कि जो लड़की टकली दिख रही है वो घटना के दो दिन पहले मुंडन करवाया था और पहले भी कई बार टकली हुई थी उसे वो अलग look बताती थी।
ऐसे तमाम सवाल है जो विरोधियों के मंतब्य का पर्दाफाश करता है।
प्रशासन को सतर्क रहने की जरूरत है।जल्द से जल्द मामला सुलझ जाए यही देश हित मे होगा।और विश्वविद्यालय प्रशासन को इस घटना से सीख लेनी चाहिए।


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