आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार जनवरी महीने से कश्मीर में पत्थरबाजों की कैद में रहे बागपत और सहारनपुर जनपद के दर्जनों युवक आखिरकार छूटकर भाग निकलने में सफल रहे। कश्मीर से छूटकर घर पहुंचे पीड़ित युवकों ने बताया कि वे कश्मीर में सिलाई की फैक्ट्री में नौकरी करने गए थे, लेकिन फैक्ट्री मालिक ने कश्मीरियों की मदद से उन्हें बंधक बना लिया और उन्हें पत्थरबाजी करने की ट्रेनिंग देकर सेना के जवानों पर पत्थरबाजी करने को मजबूर किया। पीड़ितों का कहना है कि जब इन लोगों ने सेना के जवानों पर पत्थरबाजी से इंकार कर दिया तो इन्हें मारा-पीटा जाता था। क्या कश्मीर राज्यपाल उस आरोपी फैक्ट्री मालिक के विरुद्ध कार्यवाही करेंगे? नेशनल कांफ्रेंस और अलगाववादी नेता अक्सर कहते हैं कि "ये पत्थरबाज देश विरोधी नहीं, बल्कि अपनी आज़ादी के लिए सडकों पर हैं। पत्थरबाजों के समर्थक नेता शायद नहीं जानते कि आज़ादी के दीवाने सीना ठोक कर सामने आते हैं, मुँह छिपाकर नहीं। मुज़फ्फरनगर दंगे की फाइलों को खोलना होगा मुजफ्फरनगर दंगे पर प्रकाशित रपट प्रकाशित रपट को सत्यापित करते तत्कालीन ...