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ममता ने कैग को अॉडिट करने से रोका

ममता सरकार की तो हर काम में रोड़ा अटकाने की आदत सी हो गयी है। इससे पहले भी ममता ने केन्द्र सरकार की हर योजनाओं का पुरजोर विरोध किया।केन्द्र सरकार की आधार योजना का भी ममता ने पुरजोर विरोध किया। इससे पहले भी केन्द्र सरकार की कालेधन के खिलाफ लड़ाई नोटबंदी और जीएसटी का विरोध जिस प्रकार ममता ने किया, वो तो हम सब लोग देख ही चुके हैं।लेकिन अब ममता का एक नया विरोध देखने को मिला है। कैग को राज्य की कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, राज्य के हथियारों के लाइसेंस आदि का ब्योरा और उस पर हुए खर्चे का आंडिट करना था, लेकिन ममता ने इसका विरोध किया है। कैग के अकाउंटटेन्ट नामिता प्रसाद ने राज्य के गृह सचिव अत्री भटाचार्य  को पत्र लिखा कि कैग पश्चिम बंगाल के ‘पब्लिक आडँर’ का अॉडिट करना चाहता है. इसके तहत राज्य की कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, राज्य के हथियारों के लाइसेंस आदि का ब्यौरा और उस पर हुए खर्चे का अॉडिट किया जाएगा। कैग ने कहा कि राज्य को किस मद में कितनी धनराशी मिली थी और उसने कितनी धनराशी आवंटित की है, कितनी व्यय की है, इसकी पड़ताल करनी थी। लेकिन राज्य के गृह सचिव ने कैग...

NRC: अरुण जेटली ने ब्लॉग लिख विपक्ष को घेरा, ममता बनर्जी और कांग्रेस को याद दिलाया पुराना स्टैंड

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार  असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) पर मचे घमासान के बीच केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने ब्लॉग लिखकर विरोधियों पर निशाना साधा है। जेटली ने इस ब्लॉग को  'राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर- संप्रभुता बनाम वोट बैंक'  नाम के शीर्षक से प्रकाशित किया है। जेटली ने ब्लॉग में लिखा है, 'क्षेत्र और नागरिक एक संप्रभु राज्य के दो सबसे महत्वपूर्ण पहलू हैं। किसी भी सरकार का मुख्य कर्तव्य देश की सीमाओं की रक्षा करना, किसी भी अतिक्रमण को रोकना और अपने नागरिकों के जीवन को सुरक्षित बनाना है। जम्मू-कश्मीर में संप्रभुता की रक्षा के लिए स्वतंत्र भारत को बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा है।' उन्होंने लिखा, 'स्वतंत्रता और भारत के विभाजन के समय असम पाकिस्तान के लिए भी एक गंभीर मुद्दा था। पाकिस्तान ने इस तथ्य से नाराजगी व्यक्त की कि कश्मीर की तरह असम स्वतंत्र भारत का हिस्सा बन गया है।' इस संबंध में जेटली ने जुल्फीकार अली भुट्टो की किताब 'मिथ ऑफ इंडिपेंडेंस' का जिक्र किया है, जिसमें लिखा है, 'यह गलत होगा कि कश्मीर ही एकमात्र मुद्दा है जो भारत और पा...

तीसरा मोर्चा: खतरे में अस्तित्व को बचाने के लिए एकजुटता

आर.बी. एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार  राजनीति भी क्या तेजी से रंग बदलती है,  गिरगिट भी शायद इतनी तेजी से रंग बदल पाती । आइये, एक नज़र डालते हैं, दलित, भ्रष्टाचार, गरीबी, बेरोजगारी, जनसुविधा, महँगाई, मिलावट, साम्प्रदायिकता, खाद्य आपूर्ति, किसान आत्महत्या, क़र्ज़ में डूबता किसान, तस्करी, तुष्टिकरण, आरक्षण आदि आदि समस्याओं को लेकर भारत में कितनी पार्टियाँ बन गयी, क्या किसी समस्या का समाधान हुआ ? हाँ, इन मुद्दों पर बनी पार्टियों के नेताओं की तिजोरियाँ जरूर मोटी हो गयी। लेकिन समस्याएँ निरन्तर बढ़ रही हैं। किसान आत्महत्या कर रहे हैं। किसान आत्महत्या आज कोई नया मुद्दा नहीं, बहुत पुराना है। इनकी आड़ लेकर कर्जे पर ऐश करने वालों के विरुद्ध कोई आवाज़ नहीं उठाता, क्यों? आखिर कब इस स्वाँग का पर्दाफाश होगा? एक समय था, जब दिल्ली में भी गांव और खेतों की कोई कमी नहीं थी, परन्तु आज उनकी जगह ऊँची-ऊँची इमारतें बन गयी हैं, मॉल और पीवीआर आदि बन गए हैं, और सरकार अथवा बिल्डर ने यह सब बनाने के लिए उन को मोटा धन भी दिया होगा, लेकिन जब धरने की बात होगी, दिल्ली के धन्नासेठ किसान गरीब बनकर आ जाएँगे।...

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To write on general topics and specially on films;THE BLOGS ARE DEDICATED TO MY PARENTS:SHRI M.B.L.NIGAM(January 7,1917-March 17,2005) and SMT.SHANNO DEVI NIGAM(November 23,1922-January24,1983)