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तीसरा मोर्चा: खतरे में अस्तित्व को बचाने के लिए एकजुटता

आर.बी. एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
राजनीति भी क्या तेजी से रंग बदलती है, गिरगिट भी शायद इतनी तेजी से रंग बदल पाती। आइये, एक नज़र डालते हैं, दलित, भ्रष्टाचार, गरीबी, बेरोजगारी, जनसुविधा, महँगाई, मिलावट, साम्प्रदायिकता, खाद्य आपूर्ति, किसान आत्महत्या, क़र्ज़ में डूबता किसान, तस्करी, तुष्टिकरण, आरक्षण आदि आदि समस्याओं को लेकर भारत में कितनी पार्टियाँ बन गयी, क्या किसी समस्या का समाधान हुआ ? हाँ, इन मुद्दों पर बनी पार्टियों के नेताओं की तिजोरियाँ जरूर मोटी हो गयी। लेकिन समस्याएँ निरन्तर बढ़ रही हैं। किसान आत्महत्या कर रहे हैं। किसान आत्महत्या आज कोई नया मुद्दा नहीं, बहुत पुराना है। इनकी आड़ लेकर कर्जे पर ऐश करने वालों के विरुद्ध कोई आवाज़ नहीं उठाता, क्यों? आखिर कब इस स्वाँग का पर्दाफाश होगा?
एक समय था, जब दिल्ली में भी गांव और खेतों की कोई कमी नहीं थी, परन्तु आज उनकी जगह ऊँची-ऊँची इमारतें बन गयी हैं, मॉल और पीवीआर आदि बन गए हैं, और सरकार अथवा बिल्डर ने यह सब बनाने के लिए उन को मोटा धन भी दिया होगा, लेकिन जब धरने की बात होगी, दिल्ली के धन्नासेठ किसान गरीब बनकर आ जाएँगे।   
एक समय था, जब जून 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने भारत में इमरजेंसी लगाकर अपने समस्त विरोधियों को जेलों में भर दिया था। कुछ भूमिगत होकर तत्कालीन सरकार के विरुद्ध जनचेतना जागृत में संलग्न थे। 
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1977 में जब चुनाव की घोषणा हुई, समस्त पार्टियाँ अपने भेदभाव भुलाकर कांग्रेस के विरुद्ध जनता पार्टी के नाम पर लामबंद हो गए, जिसमे सर्वाधिक नुकसान वर्तमान भारतीय जनता पार्टी यानि तत्कालीन भारतीय जनसंघ को हुआ, शायद ही किसी पार्टी को हुआ हो। लेकिन लगभग ढाई वर्ष कांग्रेस को सत्ता से बाहर भी रखा। परन्तु उसी कांग्रेस के हाथ कठपुतली बन जनसंघ पर आरएसएस के साथ दोहरी सदस्यता का मुद्दा उठवाकर जनता पार्टी टूट गयी। परिणामस्वरूप, तत्कालीन जनसंघ ने भारतीय जनता पार्टी के नाम से अपना नामकरण कर राजनीति का श्रीगणेश किया। उस समय केवल वामपंथियों ने अपने आपको उस महागठबंधन में विलय करने की बजाए अपना अस्तित्व बनाए रखने के लिए बाहर से अपना समर्थन जारी रखा। तत्कालीन जनसंघ, तो भारतीय जनता पार्टी के नाम से पुनः जीवित हो गयी, लेकिन वामपंथियों के लिए अतिकठिन होता। कांग्रेस(ओ) लगभग भाजपा में ही समा गयी, शेष पार्टियों को नया नाम रख अपने वर्जस्व के लिए झुझना पड़ा। 
लेकिन इतिहास पुनः दोहराया जा रहा है, देखना केवल यह है कि आज महागठबंधन 1977 की भाँति 2019 में एकजुट होकर मोदी सरकार को शिकस्त देने नए चुनाव चिन्ह पर चुनावी मैदान में आता है, जनता को भ्रमित कर अपनी-अपनी ढपली अपना-अपना राग रागते है अथवा नहीं। यदि एनडीए या युपीए की भाँति चुनाव लड़ा, निश्चित रूप से यह गठबंधन अकाल मृत्यु का शिकार होगा, जिसे रोक पाना असम्भव होगा। नितरोज कोई न कोई पार्टी तोडू ब्लैकमेल करता रहेगा।    
तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात के बाद गैर-बीजेपी, गैर-कांग्रेसी फ्रंट बनाने की घोषणा की। इन दोनों नेताओं ने मुलाकात के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कहा कि देश के लिए तीसरा फ्रंट बनाने की जरूरत है और इसकी शुरुआत हो गई है। वैसे तीसरे फ्रंट के लिए पूर्व में भी अनेकों प्रयास हो चुके हैं। लेकिन इस समय कांग्रेस को बाहर रखना घातक होगा। 
ममता बनर्जी ने उम्मीद जताई कि इस कोशिश में दूसरे दल भी उनके साथ आएंगे। उन्होंने कहा कि जल्द ही दूसरे दलों से भी तीसरे फ्रंट में शामिल होने के लिए बात की जाएगी। ममता ने यह भी कहा कि अगर राज्य मजबूत और विकसित होंगे तभी देश विकसित और मजबूत हो सकता है। 
संयुक्त नेतृत्व में होगा फ्रंट
अभी-अभी: ममता से मिलकर तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने की थर्ड फ्रंट की घोषणा
ममता ने कहा कि यह नई शुरुआत है. उन्होंने कहा कि राजनीति एक सतत चलने वाली प्रकिया है. ममता से सवाल पूछा गया कि दोनों नेताओं के बीच में क्या बातें हुईं तो उन्होंने कहा कि देश के विकास को लेकर बातें हुईं. ममता बनर्जी ने कहा, ‘राजनीति आपको ऐसी स्थितियों में डाल देती हैं, जहां आपको अलग-अलग लोगों के साथ मिलकर काम करना होता है. मैं राजनीति में और काम करने में भरोसा करती हूं.’ वहीं, के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) ने कहा कि तीसरा फ्रंट संयुक्त नेतृत्व में होगा.
अवलोकन करें कि किस तरह तीसरा मोर्चा में संलग्न नेताओं के राज में हिन्दू अपमानित होता रहा:--


राजनीतिक दल अल्पसंख्यकों के नाम पर भले ही किसी धर्म विशेष के अधिकारों की वकालत करते हों लेकिन हकीकत यह है कि देश मे....
NIGAMRAJENDRA28.BLOGSPOT.COM
केसीआर ने पत्रकारों के इस सवाल पर- ‘अगर कांग्रेस आपको बाहर से समर्थन देगी तो आप क्या करेंगे’, कहा- ‘आप आम राजनीतिक मॉडल की तरह सोच रहे हैं. हम वैकल्पिक राजनीतिक मॉडल देने की कोशिश कर रहे हैं. राव ने यह भी कहा कि कांग्रेस और बीजेपी दोनों पार्टियों का नेतृत्व देश के लिए उचित नहीं है. उन्होंने कहा कि वह असल में संघीय गठबंधन पेश करने की योजना बना रहे हैं. राव ने कहा कि लोग उनके साथ जुड़ रहे हैं. उन्होंने कहा कि इस फ्रंट में शामिल करने के लिए दूसरे दलों के नेताओं से भी बात और मुलाकात की जाएगी.
ममता की तारीफों के पुल बांधे
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राव ने कहा, ‘लोगों को भी लग रहा है कि 2019 से पहले एक फ्रंट सामने आएगा. मैं बता दूं कि यह आम लोगों का फ्रंट होगा. यह केवल राजनीतिक दलों का गठबंधन नहीं होगा, इसमें लोग भी शामिल होंगे.’ तेलंगाना के सीएम ने पश्चिम बंगाल की सीएम की तारीफ भी की. उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी सांसद और मंत्री रह चुकी हैं, वह राज्य की सीएम भी रह चुकी हैं. उनका अुनभव काफी ज्यादा है. वह काफी वरिष्ठ नेता हैं. तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी से मिलने के लिए तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) प्रमुख केसीआर कोलकाता पहुंचे थे.
Image result for वैश्य ब्राह्मण के मारो जूते चारइसलिए अहम है ये मुलाकात
दोनों नेताओं की इस मुलाकात का राजनीतिक महत्व है. क्योंकि राव ने हाल ही में 2019 के आम चुनाव के लिए बीजेपी और कांग्रेस के खिलाफ ‘तीसरा मोर्चा’ बनाने का सुझाव दिया था. वहीं, ममता बनर्जी बीजेपी नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के खिलाफ विपक्षी पार्टियों को एक साथ लाने में सहायक भूमिका भी निभा रही हैं. ममता को राज्य में बीजेपी से चुनौती मिल रही है, वह कह चुकी हैं कि अगर बीजेपी ने राज्य (पश्चिम बंगाल) में नजरें डालने की कोशिश की तो वह बीजेपी से केंद्र की सत्ता छीन लेंगी. वह खुद भी तीसरे मोर्चे की आवाज उठा चुकी हैं.यूपी में भी सपा-बसपा आए थे साथ
समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने हाल ही में यूपी में दो लोकसभा सीटों पर हुए उपचुनावों में हाथ मिलाया था. सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा भी है कि बीजेपी को हराने में क्षेत्रीय दल ही सक्षम हैं. हालांकि, सपा या बसपा ने 2019 के आम चुनावों के लिए अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं.
कांग्रेस भी कर रही है पहल
कांग्रेस ने भी कुछ ही दिनों पहले बीजेपी के खिलाफ संयुक्त विपक्ष को एक मंच पर लाने की पहल की थी. यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने अपने आवास पर कांग्रेस समेत 20 राजनीतिक दलों के नेताओं को डिनर पर आमंत्रित किया था. इसमें कांग्रेस के बड़े नेताओं समेत वाम दल और एनडीए के नाराज सहयोगी भी शामिल थे.
अपना दल का भी बदला रंग  
उत्तर प्रदेश की योगी कैबिनेट में मंत्री ओम प्रकाश राजभर द्वारा बगावती तेवर दिखाने के बाद ‘अपना दल’ के भी सरकार से नाराज होने की खबर हैं. सूत्रों के मुताबिक यूपी में 9 विधायकों वाला अपना दल राज्यसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ वोटिंग का फैसला तक ले सकता है.
सूत्रों के मुताबिक, अपना दल के कई विधायक उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के कामकाज से नाखुश हैं. अपना दल के विधायकों का मानना है कि सरकार का उनके प्रति व्यवहार ठीक नहीं है.

जानकारी के मुताबिक, राज्यसभा चुनाव को लेकर एनडीए की सहयोगी पार्टी अपना दल अपने नौ विधायकों के साथ बैठक करने वाली है. केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री और अपना दल की नेता अनुप्रिया पटेल अपने विधायकों के साथ बैठक करेंगी. इसी बैठक में तय किया जाएगा कि राज्यसभा चुनाव में एनडीए के पक्ष में वोटिंग करनी है या फिर किसी और दल के लिए.
अगर अपना दल भी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर की तरह राज्यसभा चुनाव में भाजपा को वोट नहीं करने का फैसला लेता है तो भाजपा के लिए यूपी से 9वां राज्यसभा उम्मीदवार जिताना संभव नहीं हो पाएगा.
योगी सरकार में सहयोगी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और योगी कैबिनेट में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने अपनी ही सरकार पर बड़ा हमला बोला है. राजभर ने आरोप लगाया है कि मौजूदा यूपी सरकार सिर्फ मंदिरों पर ध्यान दे रही है. जिन गरीबों ने उसे वोट दिया, उन पर सरकार तवज्जो नहीं दे रही है.राजभर ने साफ कहा कि सुलह समझौते को लेकर अब वो योगी की बात नहीं मानेंगे, जो भी बात होगी साफ-साफ होगी और सीधे अमित शाह से होगी. अमित शाह के नीचे कोई बात नहीं होगी. राजभर ने 23 मार्च को होने जा रहे राज्यसभा चुनाव में बीजेपी को समर्थन न देने ऐलान किया है.
खतरे में देश का संविधान, विपक्षी एका की जरूरत -- शरद यादव 
उधर भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ अभियान बनाने के क्रम में जनता दल यूनाईटेड के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव ने आज समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव से भेंट की। इस भेंट के दौरान दोनों नेताओं ने भाजपा के खिलाफ हाथ मिलाया। अखिलेश यादव से भेंट करने के बाद शरद यादव ने कहा कि देश का संविधान खतरे में है।
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भाजपा के खिलाफ अब पार्टियों को एकजुट होने की जरूरत है। इसके बाद महागठबंधन बनेगा। उन्होंने कहा कि देश विकट परिस्थितियों से गुजर रहा है। नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के चलते देश के छोटे उद्योग तबाह हो गए। इतना ही नहीं शरद यादव ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी आड़े हाथ लिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री जनता की समस्याओं को हल करने के बजाय मंदिर-मंदिर घूमते रहते हैं।उन्होंने कहा कि गोरखपुर के साथ फूलपुर की लोकसभा सीट पर जीत के लिए समाजवादी पार्टी और बसपा के नेताओं का अभिनंदन करता हूं।
उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्ष में सबसे ज्यादा असर गोरखपुर और फूलपुर के चुनाव का हुआ है। इस समय हर पार्टी से अपील करता हूं की चुनौती बड़ी है संविधान बचाने के लिए सब को एक होना होगा। उत्तर प्रदेश में लंबे समय बाद बहुजन समाज पार्टी के सहयोग से लोकसभा उप चुनाव में दो सीट जीतने वाली समाजवादी पार्टी अब महागठबंधन बनाने की ओर बढ़ रही है।
शरद पवार ने आज लखनऊ में पिछड़ा, अल्पसंख्यक, दलित आदिवासी मंच के कार्यक्रम में शिरकत की।बिहार के मुख्यमंत्री तथा जनता दल यूनाईटेड के अध्यक्ष नितीश कुमार से संबंध खराब होने के बाद से शरद यादव भी कोई मजबूत मंच तलाश रहे हैं।
अब प्रश्न यह है, जिसका "संविधान खतरे में" की आवाज़  

महागठबंधन बनाने को लालू से जल्द मिलेंगे अखिलेश के दूत

गोरखपुर और फूलपुर उप-चुनाव में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के साथ हाथ मिलाने के बाद अब समाजवादी पार्टी (सपा) ने राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) से हाथ मिलाने का निर्णय लिया है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पार्टी के उपाध्यक्ष किरणमय नंदा को लालू प्रसाद यादव के बेटे तेजस्वी यादव से रांची में मिलने के लिए कहा है। माना जा रहा है कि इस भेंट से 2019 में लोकसभा चुनाव के मद्देनजर महागठबंधन बनाए जाने की तैयारी की जा रही है। लालू के साथ नंदा भी भेंट 24 मार्च रिम्स अस्पताल या फिर बिरसा मुंडा जेल में हो सकती है। तीन तीन दिन से सीने में दर्द होने की वजह से लालू रिम्स में भर्ती हैं। सपा नेता नंदा ने कहा कि हमने जेल प्रशासन से पहले ही आज्ञा ले ली है। लालूजी से बैठक के बाद मैं तेजस्वी से मिलूंगा। यह एक शिष्टाचार मुलाकात होगी।
लोकसभा चुनाव में एक वर्ष का ही समय बचा है और देश भर की पार्टियां धीरे-धीरे भाजपा के खिलाफ एकजुट हो रही हैं। माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में बसपा के साथ गठजोड़ करने के बाद अब अखिलेश यादव आरजेडी को भी जोडऩा चाह रहे हैं। नंदा तथा लालू के बीच होने वाली मुलाकात को मोदी सरकार के खिलाफ क्षेत्रीय पार्टियों के गठबंधन की शरूआत के रूप में देखा जा रहा है। नंदा ने कहा कि आरजेडी हमेशा से समाजवादी पार्टी के साथ खड़ी रही है। उन्होंने कहा कि लालू बिना किसी राजनैतिक लाभ के एसपी के साथ हमेशा से खड़े रहे हैं।
संविधान खतरे में रोने वाले राष्ट्र को यह भी बताइये कि जब अखिलेश यादव के राज में आगरा में समाजवादी पार्टी के मुस्लिम नेता ने दलित को पेशाब पिलाया था, तब संविधान खतरे में नहीं था?
प्रस्तुत है देवभूमि समाचार पर प्रकाशित मेरी रिपोर्ट :--

आगरा में मुसलमानों ने दलित को मूत्र पिलाया

लगता है नेताओं की सोंच को किस निम्न स्तर पर अंकित किया जाये, शायद हर व्यक्ति की सोंच से बाहर होगा। पिछड़ी जाति, दलित जाति, अनुसूचित जाति और न जाने किन-किन जातियों के नाम पर दुकाने खोल जनता को और अपनी ही जातिओं को मूर्ख बनाकर केवल अपना और अपनी भावी पीडिओं का भला किया जा रहा है। इन जातियों पर आधारित कुछ दुकानदार तो इतने होशियार हैं की रातों-रात पाला बदल लेते हैं।
केवल भारत हीं नहीं समूचे विश्व ने जेएनयू देशद्रोही नारों एवं  हैदराबाद में एक दलित की आत्महत्या का विधवा-विलाप देखा एवं समाचार-पत्रों में पढ़ा। रोहित की मृत्यु पर हुए विधवा विलाप होता देख दलित एवं पिछड़ी जातिओं ने समझा हमारे नेताओं को अपनी जातियों की चिन्ता है। लेकिन 3 अप्रैल की शाम को एक दलित को एक समाजवादी मुस्लिम नेता ने पेशाब पिलाए जाने पर सबने चुप्पी साध ली, क्यों? क्या जिस दलित सब्जी बेचने वाले को पेशाब पिलाया वो दलित नहीं ?केन्द्रीय संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी का सिर मांगने वाली बहुजन समाज पार्टी की मायावती क्यों गूंगी हो गयी?
आगरा के एत्मादपुर में एक दलित युवक को साइड मांगना इतना महंगा पड़ा कि मुस्लिम नेता और उसके लोगों ने पहले तो उसको खूब पीटा, फिर लगभग पांच लोगों ने उस दलित को अपना पेशाब पिला दिया। इस पूरी शर्मनाक हरकत करने वाले अपराधी को समाजवादी पार्टी का नगर अध्यक्ष बताया जा रहा है।
मामला आगरा के थाना एत्मादपुर का है। जहाँ का निवासी निरोत्तम सिंह प्रतिदिन की भांति सब्जी बेचकर जब अपने घर जा रहा था।  तभी रास्ते में भीड़ होने के कारण निरोत्तम ने सामने खड़े बुजुर्ग पुन्नी खान से रास्ता देने को कहा। इस पर हटने की बजाय पुन्नी खान ने कहा “सड़क तेरे बाप की है क्या ?” और गाली-गलोच शुरू कर दी।
निरोत्तम ने जब इसका विरोध किया, पुन्नी खान पहले तो खामोश रहा फिर घर से अपने बच्चों को बुला लाया। और पुन्नी खान दे बड़े बेटे मुस्लिम खान ठेकेदार और अन्य परिजनों ने पहले तो उसे खूब पीटा और फिर तीन/चार लोगों ने मुँह में पेशाब कर, कोई कार्यवाही करने पर जान से मारने की धमकी दी।
इस अमानवीय घटना से निरोत्तम के परिवार इतने डर गए कि पुलिस में रिपोर्ट तक करवाने से डर रहे थे। जब यह घटना हिन्दू संगठनों तक पहुंची, तुरंत पीड़ित को पुलिस थाने लेकर गए।
मायावती को 1995 गेस्ट हाउस काण्ड नहीं भूलना चाहिए। अगर भूल गयी है, तो पढ़िए:--.

1995 की बात है लखनऊ का गेस्टहाउस काण्ड .

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मायावती के कपडे फट जाने और समाजवादी गुंडों से बचाने वाले भाजपाई की हत्या होने पर मायावती फूट-फूट कर रोयी थी 
2 जून 1995 को उत्तर प्रदेश की राजनीति में जो हुआ वह शायद ही कहीं हुआ होगा। मायावती उस वक्त को जिंदगी भर नहीं भूल सकतीं। उस दिन को प्रदेश की राजनीति का ‘काला दिन’ कहें तो कुछ भी गलत नहीं होगा। उस दिन एक उन्मादी भीड़ सबक सिखाने के नाम पर दलित नेता की आबरू पर हमला करने पर आमादा थी। उस दिन को लेकर तमाम बातें होती रहती हैं लेकिन, यह आज भी एक कौतुहल का ही विषय है कि 2 जून 1995 को लखनऊ के राज्य अतिथि गृह में हुआ क्या था? मायावती के जीवन पर आधारित अजय बोस की किताब ‘बहनजी’ में गेस्टहाउस में उस दिन घटी घटना की जानकारी आपको तसल्ली से मिल सकती है।
दरअसल, 1993 में हुए चुनाव में एक अब शायद ही कभी होने वाला गठबंधन हुआ था, सपा और बसपा के बीच। चुनाव में इस गठबंधन की जीत हुई और मुलायम सिंह यादव प्रदेश के मुखिया बने। लेकिन, आपसी मनमुटाव के चलते 2 जून, 1995 को बसपा ने सरकार से किनारा कस लिया और समर्थन वापसी की घोषणा कर दी। इस वजह से मुलायम सिंह की सरकार अल्पमत में आ गई।
सरकार को बचाने के लिए जोड़-घटाव किए जाने लगे। ऐसे में अंत में जब बात नहीं बनी तो नाराज सपा के कार्यकर्ता और विधायक लखनऊ के मीराबाई मार्ग स्थित स्टेट गेस्ट हाउस पहुंच गए, जहां मायावती कमरा नंबर-1 में ठहरी हुई थीं।
बताया जाता है कि, 1995 का गेस्टहाउस काण्ड जब कुछ गुंडों ने बसपा सुप्रीमो को कमरे में बंद करके मारा और उनके कपड़े फाड़ दिए, जाने वो क्या करने वाले थे
बसपा अध्यक्ष पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले दयाशंकर सिंह की पत्नी स्मिता सिंह के आरोपों पर बसपा नेता नसीमुद्दीन ने सफाई दी है। नसीमुद्दीन ने साफ कहा कि उन्होंने किसी को गाली नहीं दी है। ऐसे में माफी मांगने का सवाल ही नहीं है। स्मिता सिंह ने बसपा अध्यक्ष मायावती, नसीमुद्दीन सिद्दीकी और सतीश मिश्रा पर एफआईआर दर्ज कराई है।

विपक्ष के भानुमति के इस कुनबे को जोड़ेगा कौन 

केंद्र में वैकल्पिक सियासत की तलाश में ममता बनर्जी सक्रिय हैं तो शिवसेना में बेचैनी है. शरद पवार के नेतृत्व में एनसीपी हमेशा ऐसी कोशिशों में आगे रहने की परम्परा बनाए हुए है. जबकि अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी और मायावती की बहुजन समाज पार्टी ने उम्मीद जगाते हुए सक्रियता दिखलायी है. आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में भी अलग किस्म की बेचैनी है और राष्ट्रीय राजनीति में अपनी भूमिका निभाने की ललक दिख रही है. मगर, विपक्ष के भानुमति के इस कुनबे को जोड़ेगा कौन.
जोड़ेगा वही, जो कुर्बानी देगा
कोशिशों के इन टुकड़ों को जोड़ेगा कौन ? अतीत में भी यह प्रयोग बगैर कांग्रेस के पूरी नही हुई है. कांग्रेस क्या इन टुकड़ों को जोड़ने का प्रयास करेगी और अपनी बारी के लिए 2024 का इंतजार करेगी. कांग्रेस और राहुल गांधी से विपक्ष कुर्बानी मांग रहा है. ऐसे में वैकल्पिक राजनीति की खोज कर रहे विपक्ष को क्या वह नया चेहरा देंगे, वो चेहरा जिस पर विश्वास किया जाए, वो चेहरा जो नरेंद्र मोदी का विकल्प हो, वो चेहरा जो एकीकृत हिन्दुस्तान, सहिष्णु हिन्दुस्तान और गतिशील हिन्दुस्तान का बिम्ब बन सके. इसके लिए कोशिश अपने-अपने तरीके से देशभर में चल रही है. मगर, ये कोशिश कांग्रेस के बगैर पूरी नही होगी. जाहिर है राहुल गांधी के लिए भूमिका बाकी है मगर वे अपनी भूमिका को कुर्बानी से वजनदार बना सकते हैं. ऐसा करके वे वैकल्पिक सियासत को नयी ऊंचाई पर पहुंचा देंगे. मगर, पहल तो राहुल गांधी को ही करनी होगी.
अभी ऐसी कोशिशें और होंगी 

तीसरे मोर्चे की टीआरएस वाली कोशिश को एक तरफ कर दिया जाए तो इन कोशिशों की शुरुआत तो सोनिया गांधी के आवास में डिनर से ही हुई थी. सोनिया गांधी के डिनर में ममता बनर्जी नहीं आयीं थीं या नहीं आ सकी थीं. दिल्ली आकर उन्होंने सोनिया गांधी से मुलाकात की है. मगर, ये मुलाकात उन मुलाकातों की सीरीज़ का हिस्सा है जो ममता ने विपक्ष को जोड़ने की कोशिश के तहत की है. ममता बनर्जी ने दिल्ली में विभिन्न दलों के नेताओं के साथ मुलाकात की है. ममता बनर्जी ने हमेशा राज्य की राजनीति को वरीयता दी है मगर उनकी कोशिश रही है कि केन्द्र में जो सरकार रहे वह पश्चिम बंगाल की भी कद्र करती रहे. इसलिए ममता बनर्जी के नेतृत्व में इन दिनों सियासी गतिविधियां दिल्ली में तेज हैं. अखिलेश-माया भी वैकल्पिक सियासत का केन्द्र बने हुए हैं. वामदल भी यहां अपनी जगह देख सकते हैं. राहुल-ममता से लेकर माया-अखिलेश की कोशिशों को जोड़ सकते हैं. अभी ऐसी कोशिशें और होंगी और यह अखिलेश-माया के केन्द्र में होंगी और उनके साथ वामदल भी होंगे.
गठबंधन का घोषणा पत्र 
नकल करने में प्रशासनिक सहायता मिलेगी
सबको माल्या वाल लोन मिलेगा
मदरसो ओर हज सब्सिडी डबल होगी
बिजली चोरी करने की खुली छूट होगी
एनकाउंटर पर रोक होगी बलात्कार की आजादी
सभी कार्यकर्ताओं के लिए खाओ ओर खाने दो
फ्री बिजली फ्री पानी फ्री WIFI
शिक्षकों को घर बैठकर तन्ख्वाह मिलेगी
छात्र केबल मध्यान भोजन के लिए स्कूल जाएंगे
सरकारी नौकरिया जाती विशेष को मिलेगी
पुराने हजार 500 के नोट दोबारा चलेंगे
GST खत्म होगा इनकम टैक्स फ्री 
थानेदार ओर अफसरों को बसूली की खुली छूट मिलेगी
सभी घुसपैठियों के आधार कार्ड बनाये जाएंगे
भटके नौजवान ओर आतंकियो पर कार्यबाही बन्द होगी
पाकिस्तान से माफी माँगकर रिश्ते मधुर किये जायेंगे
पूरे देश मे फ्री बीफ के स्टोर खोले जाएंगे
अल्पसंख्यक की मौत पर 1 करोड़ का मुआबजा
सभी पार्को में मायावती ओर लेनिन की मूर्तियां लगेगी
मंत्रिमंडल -
राहूंल गाँधी - प्रधानमंत्री मंत्री
कीर्ती चिदम्बरम -वित्त मंत्री
फारुक अब्दुल्ला - रक्षा मंत्री
ओवेसी - गृह मंत्री
अखिलेश - शिक्षा मंत्री
मायावती - उद्द्योग मंत्री
मणीशकर - विदेश मंत्री
ममता बनर्जी - कानून मंत्री
ओर हम भारत के लोग यही deserve करते है।
■ • मोदी ने महँगाई बढ़ा रखी है,
■ • व्यापार में दिक़्क़त है,
■• GST रिटर्न भरने दिक़्क़त है,
■• पेट्रोल महँगा कर रखा है,
■• आरक्षण खत्म नहीं किया
■• राम मंदिर नहीं बनवाया
■• 15 लाख नहीं दिया
■• अच्छे दिन नहीं आए
■ नोटबन्दी की वजह से जनता मरी 
■• फलाना , ढेकाना इत्यादि
इसलिए अब हम मोदी की दुकान बंद कराएँगे, इस चुनाव में वोट नहीं देंगे, आदि आदि।
बंधुओं..!
रही मोदी की दूकान बंद कराने की बात, तो आपको बता दें कि मोदी की उम्र अब 67 वर्ष है और उनके पीछे ना परिवार है और बीवी-बच्चे।
उन्होंने ज़िंदगी में जो पाना था वो पा लिया है।
अब अगर आप वोट नहीं भी देंगे और वो हार भी जाएँगे, तब भी वो "पूर्व प्रधानमंत्री” कहलाएँगे ही..
👍 आजीवन दिल्ली में घर, गाड़ी, पेंशन, 👍 एसपीजी सुरक्षा, कार्यालय मिलता रहेगा।
👍 दस-पंद्रह साल जीकर चले जाएँगे।
लेकिन सवाल ये उठता है कि आप क्या करेंगे..?🤔👆🏼😳
 जब कांग्रेस+लालू+मुलायम+मायावती+ममता+केजरीवाल मिलकर---🙌🏻👬🙌🏻
★• इस देश का इस्लामीकरण और ईसाईकरण करेगी,!!
★• रोहिंग्याओं को बसाएगी,!!
★• अंधी लूट करेगी,
★• कोयला घोटाले होंगे,
★• भगवा आतंकवाद जैसे नए नए शब्द बनेंगे और
★• आतंकवादी सरकारी मेहमान बनेंगे!!
★• हिंदुओं का खतना करवाएगी
★• मुसलमानो को आरक्षण देगी !
★  लव जिहाद को बढ़ावा देगी ।
★• महंगाई आसमान छुएगी
★• पप्पू देश लूट कर इटली घूमने जायेगा
★• सैनिक रोज मारे जाएंगे
★• पाकिस्तान , चीन सर पर बैठ जाएगा
मोदी पर भ्रष्टाचार का एक भी दाग़ है क्या??
मोदी तो संतोष के साथ मरेंगे कि मैंने एक कोशिश तो की अपना देश बचाने की,
लेकिन आप लोग तो हर दिन मरेंगे, और अंतिम साँस कैसे लेंगे?
●अपने बच्चों के लिए कैसा भारत छोड़ कर मरेंगे???
●ज़रा विचार कीजिए और तब निर्णय लीजिए। 
और
मोदी जी की इमानदारी पर शक करनेवाले....
👍 3 साल में मोदी सरकार ने क्या किया इस देश के लिए , जानना चाहोगे ?
■  1 लाख करोड़ रू पेट्रोल में कमाया ....
उसमें 46 हज़ार करोड़ ईरान को देकर भारत का कर्जा उतरवा लिया....
■ बाकी बचे 54 हजार करोड़ में राफेल फाइटर जेट खरीद कर सेना को मजबूती दी।
■ बताओ एक रूपया भी दामाद के लिए नहीं रखा.... बेटी बेटा तो है नहीं तो दामाद कहा होंगे ,
■ अमेरिका जाकर अपने पूरे खानदान का इलाज भी नहीं करवाया .....
■ स्विसबैंक में खाता बनवाया नहीं , नाच गाने सुनने कहीं जाते नहीं ,
■ दिग्विजय , अहमद , गुलाम नबी , जैसा चापलूस रखे नहीं........
■ पप्पू जैसी अय्याशी कभी की नही ...
■  १ रुपया का आज तक घोटाला किया नहीं ...और बन गए हैं प्रधानमंत्री ...
लेकिन ये सब आपको बताने से क्या फायदा , आपकी समझ मे नही आने वाला 
आप तो मुफ्तखोरी की लत से ग्रस्त बीमारी से जूझ रहे हो ।
 आपकी नजर में तो-
■ सरकार आपके बैंक खातों में 15 लाख रु खैरात रूपी जमा करा दे तो मोदी सरकार बहुत अच्छी है ।
■  सरकार सभी कर्जदारों का ऋण माफ करा दे तो सरकार बहुत अच्छी है
■ सरकार सभी को सरकारी नौकरी दिला दी तो बहुत अच्छी है
■ सरकार मुफ्त भोजन , मुफ्त यात्राएं , मुफ्त शिक्षा , मुफ्त आवास दिलाती रहे तो बहुत अच्छी है 
■ सरकार घर के सभी सदस्यों को पेंशन देती रहे कोई काम करने को न कहे , कोई अपने सरकारी काम काज पर न जाये घर बैठे सैलरी आती रहे , जी भर के घूसखोरी करती रहे , भ्रष्टाचार पर कोई अंकुश न हो ! 

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To write on general topics and specially on films;THE BLOGS ARE DEDICATED TO MY PARENTS:SHRI M.B.L.NIGAM(January 7,1917-March 17,2005) and SMT.SHANNO DEVI NIGAM(November 23,1922-January24,1983)

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