Skip to main content

Posts

Showing posts with the label cpi

क्या महागठबंधन संभव है?

सबसे पहले बात देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की, जहां लोक सभा की 80 सीटें हैं. पिछले लोक सभा चुनाव में भाजपा की भारी जीत में इस राज्य का बड़ा हाथ था. यहां उसे लोक सभा की 71 सीटें मिली थीं. वहीं विपक्ष केवल सात सीटों पर सिमट गया था. लेकिन जिस विपक्षी एकता की बात की जा रही है, उसके लिए ये आंकड़े कुछ और नतीजे पेश करते हैं. दरअसल, यहां भाजपा को कुल 42.30 प्रतिशत वोट मिले थे और उसके सहयोगी अपना दल को 1 प्रतिशत. वहीं सपा को 22.20 प्रतिशत, बसपा को 19.60 प्रतिशत और कांग्रेस को 7.50 प्रतिशत वोट मिले थे. यदि कांग्रेस-सपा-बसपा के वोटों को मिला लिया जाए तो ये 49.3 प्रतिशत हो जाता है. इस समीकरण को देखने के बाद बताने की को आवश्यकता नहीं है कि यदि यह गठबंधन हो जाता है तो उसके नतीजे क्या होंगे. दूसरे, यह कि सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस को क्षेत्रीय पार्टियों के आंगन में बैठना पर रहा है। जो सिद्ध करता है कि वास्तव में आज कांग्रेस आधारहीन हो चुकी है। दूसरे शब्दों में यह भी कहा जा सकता है कि क्षेत्रीय पार्टियों और कांग्रेस में कोई अंतर नहीं रह गया है, यानि बरसाती मेंढक। बहरहाल, राज्य में हर व...

त्रिपुरा के उप मुख्यमंत्री जीते उप चुनाव, बीजेपी विधायकों की संख्या पहुंची 36

चरिलाम विधानसभा सीट से सीपीएम के उम्मीदवार पलाश देबबर्मा के द्वारा चुनावी मैदान छोड़ने के बाद इस सीट पर बीजेपी के सबसे अमीर उम्मीदवार और राज्य के उप मुख्यमंत्री जिष्णुदेब बर्मा ने यह सीट रिकॉर्ड मतों से सीपीएम को परास्त कर जीत ली है. इसके साथ ही राज्य में बीजेपी विधायकों की संख्या तीन दर्जन यानी 36 हो गई है. वैसे भी इस सीट पर बीजेपी के जिष्णुदेब बर्मा के अलावा सीपीएम के पलाश देबबर्मा, कांग्रेस के अर्जुन देबबर्मा, आईएनपीटी के उमाशंकर देबबर्मा और निर्दलीय ज्योतिलाल देबबर्मा चुनावी मैदान में थे. दरअसल, 2018 विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान सीपीएम के उम्मीदवार रामेन्द्र नारायण देबबर्मा की 11 फरवरी को मौत हो गई थी. इसके बाद ही 12 मार्च उप चुनाव की नई तिथि मुकर्रर हुई थी. गौरतलब है कि चारिलाम सीट से सीपीआई(एम) ने त्रिपुरा में विधानसभा चुनाव के बाद जारी हिंसा के विरोध में अपना उम्मीदवार हटा लिया था. इस पर बीजेपी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि वामपंथियों ने मैदान छोड़ दिया. चरिलाम सीट का 51 साल का लेखा जोखा  19 चरिलाम विधानसभा सीट पर अब तक ह...

बीजेपी ने कहा 'चलो पलटाई', जनता ने पलटी 25 साल पुरानी 'सरकार'

त्रिपुरा की राजनीति में बीजेपी ने सीधे शून्‍य से सत्‍ता तक का शिखर तय किया है. शुरुआती रुझानों के मुताबिक बीजेपी को स्‍पष्‍ट बहुमत मिला है. बीजेपी ने त्रिपुरा में 'चलो पलटाई' (चलो करते हैं बदलाव) का नारा दिया था. बीजेपी अध्‍यक्ष अमित शाह की सधी रणनीति और पीएम मोदी के आक्रामक चुनावी अभियान के बूते बीजेपी ने रुझानों के मुताबिक इतिहास रच दिया है.  त्रिपुरा में नाथ संप्रदाय के लोगों की अच्छी खासी आबादी है। आदित्यनाथ गोरखपुर स्थित नाथ संप्रदाय के ही महंत हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक त्रिपुरा में बंगालियों की आबादी में 35 फीसदी नाथ संप्रदाय को मानते हैं। बीजेपी ने इन वोटरों को अपनी ओर लाने के लिए नाथ बहुल इलाकों में सीएम योगी आदित्यनाथ से चुनाव प्रचार करवाया था। बीजेपी महासचिव राम माधव ने पार्टी की जीत में इस नारे की अहमियत के बारे में बताते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि जनता ने इस नारे को समर्थन दिया है. बीजेपी के लिए यह जीत इसलिए भी अहम है क्‍योंकि पिछली बार बीजेपी को यहां महज 1.5 प्रतिशत वोट मिले थे. उसके पांच वर्षों के भीतर ही सीधे सत्‍ता में काबिज होना एक बड़ी चुनावी सफलता है. अवलो...

नार्थ ईस्ट : राष्ट्रीय दलों में कभी केवल कांग्रेस थी, अब उपस्थिति की लड़ाई लड़ रही है

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार  सेवेन सिस्टर्स यानी सात उत्तर पूर्वी राज्यों में कांग्रेस की सिर्फ दो जगह सरकारें हैं, मिजोरम और मेघालय।मेघालय विधानसभा का चुनाव 27 फरवरी को है जबकि मिजोरम विधानसभा का कार्यकाल दिसंबर’18 तक है। सेवेन सिस्टर्स में मेघालय के अलावा त्रिपुरा और नागालैंड में भी विधानसभा चुनाव होना है। कांग्रेस शासित मेघालय के साथ ही नागालैंड में भी 27 फरवरी को चुनाव है। वहीं सीपीएम शासित त्रिपुरा में 18 फरवरी को मतदान है। गौरतलब है कि कभी नार्थ ईस्ट में क्षेत्रीय दलों के अलावा राष्ट्रीय दलों में सिर्फ कांग्रेस की सरकारें थी, अब सिर्फ उपस्थिति बनी रहे इसी की लड़ाई कांग्रेस लड़ रही है।  मेघालय जहां कांग्रेस सत्ता में है  10 साल से मेघालय में कांग्रेस की सरकार है और 20 मार्च’10 से मुकुल संगमा मुख्यमंत्री की कुर्सी पर है। 5 साल पहले 23 फ़रवरी’13 को 60 सदस्यीय विधानसभा का चुनाव हुआ था। मैजिक फिगर 31 से 2 कम 29 पाकर ही कांग्रेस सत्ता में आ गई थी। हालांकि 2008 के मुकाबले 4 सीटें ज्यादा मिली थी। दरअसल पिछले चुनाव में कांग्रे...

20 हजार से ऊपर के कुल 102 करोड़ डोनेशन में से 76 करोड़ बीजेपी को मिले

केंद्र में मोदी की सरकार आने के बाद राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे में भारी गिरावट दर्ज की गई है। इसके बावजूद भी सच यही है कि अब भी बीजेपी को अन्य राजनीतिक दलों के मुकाबले सबसे ज्यादा चंदा मिलता है। आंकड़ों के मुताबिक, देश के सात प्रमुख दलों में से बीजेपी को मिला चंदा बाकी छह दलों की तुलना में तीन गुना अधिक है। 20 हजार से ज्यादा चंदा पाने की सूची में वह सबसे आगे है। साल 2015-16 में देश की छह राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टियों को 20 हजार रुपए से ऊपर की कुल 1744 डोनेशन की गई थी, जिसकी कुल राशि 102 करोड़ रुपए थी। इस डोनेशन का सबसे बड़ा हिस्सा भारतीय जनता पार्टी को मिला था। अंग्रेजी अखबार द टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, 2015-16 में 20 हजार से ऊपर की कुल 102 करोड़ रुपए की डोनेशन में 76 करोड़ रुपए सिर्फ भाजपा को मिले थे। भाजपा को 613 डोनर्स ने 20 हजार से ऊपर का दान दिया। 2015-16 के लिए भाजपा द्वारा घोषित की गई दान राशि इसी अवधि के लिए कांग्रेस, एनसीपी, सीपीआई, सीपीएम और तृणमूल कांग्रेस द्वारा बताई गई दान राशि से तीन गुना है। बीजेपी, कांग्रेस, सीपीआई और एनसीपी की रिपोर्ट में 473 चंद...

AUTHOR

My photo
shannomagan
To write on general topics and specially on films;THE BLOGS ARE DEDICATED TO MY PARENTS:SHRI M.B.L.NIGAM(January 7,1917-March 17,2005) and SMT.SHANNO DEVI NIGAM(November 23,1922-January24,1983)