साल 2015-16 में देश की छह राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टियों को 20 हजार रुपए से ऊपर की कुल 1744 डोनेशन की गई थी, जिसकी कुल राशि 102 करोड़ रुपए थी। इस डोनेशन का सबसे बड़ा हिस्सा भारतीय जनता पार्टी को मिला था। अंग्रेजी अखबार द टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, 2015-16 में 20 हजार से ऊपर की कुल 102 करोड़ रुपए की डोनेशन में 76 करोड़ रुपए सिर्फ भाजपा को मिले थे। भाजपा को 613 डोनर्स ने 20 हजार से ऊपर का दान दिया। 2015-16 के लिए भाजपा द्वारा घोषित की गई दान राशि इसी अवधि के लिए कांग्रेस, एनसीपी, सीपीआई, सीपीएम और तृणमूल कांग्रेस द्वारा बताई गई दान राशि से तीन गुना है।
बीजेपी, कांग्रेस, सीपीआई और एनसीपी की रिपोर्ट में 473 चंदे का पैन विवरण उपलब्ध नहीं है। दलों को 11.68 करोड़ की राशि बिना पैन की जानकारी के मिली है। कांग्रेस को 8.11 करोड़ और भाजपा को 2.19 करोड़ बिना पैन की जानकारी के प्राप्त हुआ है। सत्या इलेक्टोरल ट्रस्ट ने भाजपा को 45 करोड़ और कांग्रेस को दो करोड़ का चंदा दिया है। यह भाजपा के कुल चंदे का 58.56 फीसदी है। कांग्रेस के चंदे में यह कुल राशि का 9.79 फीसदी है।
किसको कितना मिला चंदा
- 77.28 करोड़ यानी कुल चंदे का 75.75% हिस्सा 359 कॉरपोरेट घरानों से मिला
- 102.02 करोड़ रुपये चंदे में प्राप्त हुआ राष्ट्रीय दलों को
- 20, 000से ज्यादा चंदा देनेवाले दानदाताओं की सूचना चुनाव आयोग को देनी होती है
- 23.41 करोड़ का चंदा (22.95}) 1322 व्यक्तिगत दाताओं से मिला
दल 2014-15 2015-16
बीजेपी 437.35 76.85
कांग्रेस 141.46 20.42
एनसीपी 38.82 0.71
तृणमूल 8.31 0.65
माकपा 3.42 1.81
भाकपा 1.33 1.58
(आंकड़े करोड़ रुपये में)
बीजेपी 437.35 76.85
कांग्रेस 141.46 20.42
एनसीपी 38.82 0.71
तृणमूल 8.31 0.65
माकपा 3.42 1.81
भाकपा 1.33 1.58
(आंकड़े करोड़ रुपये में)
2013 से 2015 के बीच बढ़ोतरी
– 156 % की वृद्धि हुई थी बीजेपी के चंदे में
– 137% की वृद्धि कांग्रेस के चंदे में हुई थी
– 156 % की वृद्धि हुई थी बीजेपी के चंदे में
– 137% की वृद्धि कांग्रेस के चंदे में हुई थी
कहां से कितनी नगदी
- 80 लाख रुपये कर्नाटक से नकद चंदे के रूप में मिले
- 21.54 लाख रुपये का चंदा मेघालय से मिला
- 11.13 लाख रुपये नई दिल्ली से चंदे में मिले
- 9.80 लाख रुपये छत्तीसगढ़ से प्राप्त हुए
- 3.55 लाख रुपये मिले मध्य प्रदेश से
- 14.29 लाख रुपये अन्य राज्यों से मिले
बसपा को बड़ा चंदा नहीं
10 साल से 20,000 से ज्यादा चंदे के मामले में बसपा ने अपनी राशि शून्य दिखाई है।
10 साल से 20,000 से ज्यादा चंदे के मामले में बसपा ने अपनी राशि शून्य दिखाई है।
राजनीतिक पार्टियों को अपने आयकर रिटर्न में 20 हजार रुपए से ज्यादा के चंदे का स्त्रोत बताना होता है। पार्टियों ने चंदे की डीटेल चुनाव आयोग को जमा कराई है। एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्मस (ADR) द्वारा किए गए इन डोनेशन डीटेल के आंकड़ों के विश्लेषण से पता लगा कि कांग्रेस पार्टी दूसरी सबसे ज्यादा चंदा पाने वाली पार्टी रही। कांग्रेस को 120 करोड़ में से 20 करोड़ रुपए का चंदा मिला। कांग्रेस को 918 डोनेशन मिले।
कांग्रेस और बीजेपी ने अपने आयकर रिटर्न की जानकारी चुनाव आयोग को नहीं दी है इसलिए 20,000 रुपए से कम की लिमिट में कितना चंदा इन्हें प्राप्त हुआ है, यह पता नहीं लग पाया। बसपा ने घोषणा की कि उसे 2015-16 के बीच 20,000 से नीचे का चंदा नहीं मिला है। जानकर हैरानी होगी कि वित्त वर्ष 2014-15 के मुकाबले इस वर्ष राष्ट्रीय पार्टियों के कुल चंदे में 528 करोड़ रुपये की कमी हुई है। यह सीधे तौर पर चंदे में 84 प्रतिशत की गिरावट है। एनसीपी को मिले चंदे में 98 प्रतिशत की कमी हुई है, उसे इस बार सिर्फ 71 लाख का ही चंदा मिला है। जबकि बीजेपी को मिला चंदा 2014-15 की तुलना में 82 प्रतिशत कम है। बीजेपी को मिले चंदे में 2013-14 और 2014-15 में 156 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी और कांग्रेस को मिले चंदे में उसी अवधि में 137 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी।

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