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PAK की ये दरगाह है धर्म परिवर्तन का अड्डा, हिंदू लड़कियों को बना रहे मुसलमान

पाकिस्तान में एक बार फिर सिंध की दरगाह में हिंदू लड़की को जबरदस्ती मुस्लिम बनाए जाने का मामला सामने आया है। निशा नाम की लड़की को अगवाकर सिंध की दरगाह में ले जाया गया, जहां उसका जबरन धर्मांतरण करा दिया गया। इतना ही नहीं, धर्म परिवर्तन कराकर निशा का जबरन निकाह तक करा डाला गया। जिस दरगाह में ये सबकुछ हुआ उसे भरचंडी शरीफ के नाम से जाना जाता है। इसमें मौलवी और स्थानीय नेता मियां मिट्ठू का हाथ होने की पुष्टि भी हो गई है, जिसका भाई पीर मियां शमां ये दरगाह संचालित करता है।  200 से ज्यादा धर्म परिवर्तन... सिंध की भरचंडी शरीफ दरगाह। यह दरगाह सिंध के घोटकी जिले के भरचंडी इलाके में मौजूद है। इस दरगाह की पहचान ऐसे रूप में की गई है, जहां हिंदू लड़कियों को जबरन मुसलमान बनाया जाता है। - इस दरगाह में धर्म परिवर्तन की खबरों के बाद न्यूयॉर्क टाइम्स ने मियां मिट्ठू और उसके भाई पीर मियां शमां से मुलाकात की थी। - दोनों भाइयों ने हिंदू और ईसाई लड़कियों को जबरदस्ती मुसलमान बनाए जाने की बात से इनकार कर दिया था। - उन दोनों का दावा था कि वो अब तक 200 से ज्यादा हिंदू लड़कियों को उनकी मर्जी से मुस...

बलूचिस्तान में बुलन्द होती पाकिस्तान से अलग होने की माँग

बलूचिस्तान में पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन लगातार जोर पकड़ता जा रहा है. एक ऐसे ही ताजा मामले में बलूच प्रदर्शनकारियों ने भारतीय झंडा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीरें लहराईं।  अब की बार तो प्रदर्शनकारियों ने नया नारा दिया। लोगों ने भाजपा के नारे अबकी बार मोदी सरकार में थोड़ा बदलाव करके बलूचिस्तान में अबकी बार मोदी सरकार नारा लगाया। बलूचिस्तान में तेजी से बुलन्द होती मोदी-मोदी के नारों से पाकिस्तान और इसके समर्थकों की नींद कहीं गायब होती जा रही है। क्योंकि उन्हें ईस्ट पाकिस्तान(वर्तमान बांग्लादेश) की तर्ज़ पर बलूचिस्तान हाथ से फिसलता दिख रहा है। क्योंकि आज के हालात को देखते हुए, जिस दिन बलूचिस्तान पाकिस्तान से अलग हुआ, फिर वह दिन भी ज्यादा दूर नहीं होगा जब सिन्ध, पाक-अधिकृत कश्मीर के आलावा लाहौर न निकल जाए।  जिस तरह पाकिस्तान भारत में आतंकवाद के जरिये दहशत फ़ैलाने का कोई मौका नहीं चूक रहा, उसी तरह बलूचियों पर पाकिस्तान फ़ौज़ें अत्याचार कर रही हैं। जबकि बलूच से ही पाकिस्तान को सर्वाधिक आय होती है, उसके बावजूद बलूचियों पर अत्याचार करने का कोई मौका नहीं चूकता। ...

शक्तिशाली विदेश नीति किसकी : मोदी की या मोदी विरोधियों की?

प्रधानमंत्री मोदी को देश की बागडोर संभाले 2 साल से ज्यादा बीत चुके हैं और इन दो वर्षों में सबसे अधिक चर्चा मोदी की विदेश नीति की रही, प्रधानमंत्री मोदी ने दुनिया में भारत का डंका बजाने के अलावा दुश्मन देशों चीन और पाकिस्तान को चारों तरफ से घेर दिया, हालाँकि हमारे देश की राजनीतिक पार्टियाँ और आरोपों की राजनीति खेलने वाले कुछ नेता मोदी की विदेश नीति खासतौर पर पाकिस्तान के प्रति नीति को फेल बताते हैं लेकिन अगर वे लोग यह खबर पढेंगे तो शर्म से डूब मरेंगे। अपनी चुनावी रैलियों में नरेंद्र मोदी पाकिस्तान पर पिछली सरकार को आरोपित करते कहा करते थे "पाकिस्तान को प्रेम पत्र लिखना बंद करो। उसे उसी की भाषा में जवाब दो। ..."लेकिन प्रधानमंत्री बनने पर पाकिस्तान दौरा भी किया, कई दौर बातचीत के भी होने पर,  समस्त विपक्ष मोदी पर प्रहार करने में जुट गया। मोदी के दिमाग में क्या चल रहा है, किसी ने लेशमात्र भी चिन्ता नहीं की। क्योंकि इनका धेय तो केवल मोदी को नीचा दिखाना था। जैसा मैंने एक लेख में मोदी विरोधियों पर कटाक्ष करते निम्न लेख के अतिरिक्त  एक और लेख जिसका शीर्षक था "मोदी है ...

पाकिस्तान टूटने की कगार पर

लगता है पाकिस्तान 2017 में टूटना शुरू हो जायेगा। क्योंकि बलूचिस्तान, PoK,पख्तून और सिन्ध में जिस तरह पाकिस्तान के ज़ुल्मों से मुक्ति पाने के लिए भारत से मदद की गुहार लगाई जा रही है, पाकिस्तान के बिखराओ की दास्तान लिखी जा चुकी हैं। जिसे भारत में आतंक फ़ैलाने में अँधा हुआ पाकिस्तान आज तक समझने में असमर्थ ही रहा है। जो पाकिस्तान के लिए शुभ संकेत नहीं हैं। ऐसा लगता है, पहले बलूचिस्तान पाकिस्तान से अलग होगा फिर पख्तून इलाका पाकिस्तान से अलग हो जाएगा ... फिर दो साल के अंदर POK पाकिस्तान का साथ छोड़ देगा फिर सिंध को कमजोर पाकिस्तान ज्यादा दिनों तक काबू में नहीं रख पायेगा वो भी अगले दो तीन सालों में वो भी पाकिस्तान से मुक्ति पा लेगा। भारत में पल रहे पाकिस्तान समर्थकों ने भी अपनी आँखें मूंदी हुई हैं, जिन्हें सोते-जागते केवल अपना वोट-बैंक ही दिखता है। उनकी मुस्लिम तुष्टिकरण नीति इन नेताओं को कहाँ लेकर जाएगी, यह कहना भविष्य के गर्भ में छिपा है। लेकिन इतना निश्चित है कि पाकिस्तान के बिखराओ होने के साथ ही शायद इन नेताओं की संतानों को भी इन्हें अपना पारिवारिक सदस्य कहने में ग्लानि महसूस होगी। यह...

बलोचिस्तान मांगे पाकिस्तान अत्याचारों से मुक्ति

सन 50 के दशक में एक फिल्म प्रदर्शित हुई "जागृति" ; इस फिल्म का एक गीत "हम लाए हैं तूफ़ान से कश्ती निकल के" आज भी चर्चित है। यानि 1947 से लेकर पाकिस्तान और भारत की पिछली सरकार तक सब कश्मीर को झुनझुना बनाकर दोनों देशों के जनता को पागल बनाते रहे। भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू तो उस्तादों के उस्ताद निकल गए। कश्मीर के मसले को यूएनओ में लेजाकर नाश ही पीट दिया। लेकिन उस गलती को 1972 में इंडो-पाक युद्ध के दौरान, उन्हीं की पुत्री तत्कालीन प्रधानमन्त्री इन्दिरा गाँधी ने कुछ सीमा तक सुधारने की कोशिश की कि जो भी बातचीत होगी दोनों देशों के बीच होगी कोई तीसरा नहीं आएगा। लेकिन 2014 में सत्ता में आयी मोदी सरकार ने पासे ही बदल दिए।  नरेन्द्र मोदी के प्रधानमन्त्री मनोनीत होने से किसी न किसी लेख/रिपोर्ट में लिखता रहा हूँ कि इस आदमी को समझना लोहे के चने चबाने से कम नहीं। पाकिस्तान को सुधरने के बहुत अवसर दिए, जिसका विपक्ष ने मजाक भी खूब बनाया। कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेताओं ने तो पाकिस्तान चैनल पर मोदी के खिलाफ मुहिम छेड़ने तक बोल गए।  पाकिस्तान को अनेक मौके दिए सु...

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shannomagan
To write on general topics and specially on films;THE BLOGS ARE DEDICATED TO MY PARENTS:SHRI M.B.L.NIGAM(January 7,1917-March 17,2005) and SMT.SHANNO DEVI NIGAM(November 23,1922-January24,1983)