लगता है पाकिस्तान 2017 में टूटना शुरू हो जायेगा। क्योंकि बलूचिस्तान, PoK,पख्तून और सिन्ध में जिस तरह पाकिस्तान के ज़ुल्मों से मुक्ति पाने के लिए भारत से मदद की गुहार लगाई जा रही है, पाकिस्तान के बिखराओ की दास्तान लिखी जा चुकी हैं। जिसे भारत में आतंक फ़ैलाने में अँधा हुआ पाकिस्तान आज तक समझने में असमर्थ ही रहा है। जो पाकिस्तान के लिए शुभ संकेत नहीं हैं। ऐसा लगता है, पहले बलूचिस्तान पाकिस्तान से अलग होगा फिर पख्तून इलाका पाकिस्तान से अलग हो जाएगा ... फिर दो साल के अंदर POK पाकिस्तान का साथ छोड़ देगा फिर सिंध को कमजोर पाकिस्तान ज्यादा दिनों तक काबू में नहीं रख पायेगा वो भी अगले दो तीन सालों में वो भी पाकिस्तान से मुक्ति पा लेगा।
भारत में पल रहे पाकिस्तान समर्थकों ने भी अपनी आँखें मूंदी हुई हैं, जिन्हें सोते-जागते केवल अपना वोट-बैंक ही दिखता है। उनकी मुस्लिम तुष्टिकरण नीति इन नेताओं को कहाँ लेकर जाएगी, यह कहना भविष्य के गर्भ में छिपा है। लेकिन इतना निश्चित है कि पाकिस्तान के बिखराओ होने के साथ ही शायद इन नेताओं की संतानों को भी इन्हें अपना पारिवारिक सदस्य कहने में ग्लानि महसूस होगी। यह एक कटु सत्य है।
यदि अब तक हुए भारत-पाक युद्धों का गंभीरता से अध्ययन किया जाये तो यही निष्कर्ष निकलकर कर आएगा कि अपने गृह युद्ध एवं बिखराओ को रोकने के लिए कश्मीर की आड़ लेकर भारत से युद्ध कर उस बिखराओ को रोकने का प्रयास किया गया था। इतना ही नहीं, राजनीतिज्ञों के अनुसार, भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्धारा लाहौर बस लेकर जाने से पाकिस्तान ने राहत की साँस ली थी। क्योंकि उस समय पाकिस्तान अपने बिखराओ को रोकने का प्रयास कर रहा था।
पाकिस्तान को तोड़ने से कई देशों के परोक्ष हित जुड़े हैं, पाकिस्तान के टूटने से ईरान, अमेरिका, अफगानिस्तान और भारत को सीधा फायदा होगा परोक्ष रूप से बांग्लादेश, इस्राएल और यूरोप को भी पाकिस्तान के टूटने का फायदा होगा, केवल चीन एक ऐसा देश है जिसको पाकिस्तान के टूटने से नुकसान उठाना पड़ेगा क्योंकि उसने काफी सारा पैसा रणनीतिक फायदे के पाकिस्तान में निवेश किया हुआ है .... कहना का मतलब है विश्व की बड़ी शक्तियाँ चाहती हैं पाकिस्तान टूट जाए उनकी चिंता का मुख्य कारण है सनकी पाकिस्तान का परमाणु अस्त्रों से लेस होना, दूसरा पाकिस्तान का दुनिया में परमाणु तकनीक को दूसरे देशो को सोंपना, तीसरा कारण पूरे विश्व में आतंकवाद का सबसे बड़ा निर्यातक पाकिस्तान है, चौथा कारण पाकिस्तान धीरे धीरे चीन का उपनिवेश बनता जा रहा है ....
पहले बलूचिस्तान के अलगावादी मूवमेंट को भारत ही अकेले समर्थन करता था मगर भारत की सबसे बड़ी परेशानी ये थी की उसकी सीमा बलूचिस्तान से नहीं मिलती थी और अफगानिस्तान और ईरान को पाकिस्तान को तोड़ने में कोई इंटरेस्ट नहीं था .... मगर मोदी सरकार की सबसे बड़ी कूटनीतिक सफलता है की वो ईरान, अफगानिस्तान और अमेरिका को ये समझाने में सफल रहा की जब तक पाकिस्तान का वजूद रहेगा अफगानिस्तान में कभी भी शांति नहीं हो सकती और परमाणु बम का ISIS के आतंकवादियों के हांथों में में पहुँचने की संभावना हर समय रहेगी क्योंकि ISIS और पाकिस्तान का लक्ष्य एक ही है पूरे विश्व को इस्लाम के झंडे के नीचे लाना, जिससे शिया मुस्लिम देश ईरान को भी खतरा है ... कुछ दिनों से जिस तरह ईरान, अफगानिस्तान के राष्ट्रपतियों और अमेरिका के कूतिनितिक हलकों से पाकिस्तान के खिलाफ तीखी टिप्णियाँ आई हैं वो भारत की कूटनीति सफलता को उजागर करता है ....
पाक अधिकृत कश्मीर में मानवाधिकारों की स्थिति पर चिंता जाहिर करते हुए अमेरिका ने मतभेदों पर शांतिपूर्ण तरीके और एक वैध राजनीतिक प्रक्रिया के जरिए काम करने की अपील की है।
विदेश मंत्रालय के उप प्रवक्ता मार्क टोनर ने अपने दैनिक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि वहां (पीओके में) मानवाधिकारों की स्थिति को लेकर हम चिंतित हैं। हमने अपनी मानवाधिकारों की रिपोर्ट में इसका जिक्र कई साल तक किया है। पाक अधिकृत कश्मीर में मानवाधिकारों की स्थिति के बारे में सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि हम हमेशा से पाकिस्तान में सभी पक्षों से अपील करते आए हैं कि वे अपने मतभेदों पर शांतिपूर्ण तरीके से और एक वैध राजनीतिक प्रक्रिया के तहत काम करें।
टोनर ने कहा कि कश्मीर के बारे में हमारी नीति सर्वविदित है। इस माह की शुरुआत में गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र में मानवाधिकारों के उल्लंघन और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कार्रवाई के खिलाफ प्रदर्शन किए गए थे।
ईरान, अफगानिस्तान और अमेरिका को अपने पक्ष में करने के बाद ही मोदी जी ने आजाद बलूचिस्तान के समर्थन में बयान दिया है अगर ये चार देश संयुक्त प्रयास करें तो बलूचिस्तान दो साल में ही आजाद हो जाएगा, ईरान, अफगानिस्तान और अमेरिका खुल कर सामने नहीं आयेंगे वो परोक्ष रूप से बलूचिस्तान की आजादी के लिए समर्थन करेंगे ... भारत और उसकी मीडिया खुलकर समर्थन करेगी …
अगर बलूचिस्तान आजाद हो जाता है तो दक्षिण एशिया में भारी उथल पुथल होगी पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में बलूचिस्तान का बहुत बड़ा हाँथ है सारे प्राकर्तिक संसाधन वहां पे हैं, बलूचिस्तान के अलग होते ही पाकिस्तान के रुपए की कीमत डॉलर के मुकाबले 200 रुपए तक पहुँच जायेगी ..... पाकिस्तान को अपनी अर्थव्यवस्था सँभालने के लिए भारी मात्रा में सेना की कटोती करनी पड़ेगी, इन सब के कारण पाकिस्तान की सेना हाईपर टेंशन में पहुँच जायेगी तब भारत को सबसे ज्यादा परमाणु हमले का खतरा रहेगा, परमाणु हमले के खतरे से बचने के लिए अमेरिका और भारत बलूचिस्तान को आजाद कराने से पहले ये सुनिश्चित करेंगे की सेना और पाकिस्तान की ISI का चीफ उनकी मनपसंद का हो, अगर परमाणु हमले का खतरा टाल दिया गया तो पाकिस्तान के परमाणु बम को हथियाना अमेरिका के बाएं हाँथ का खेल होगा .... क्योंकि अब तुम भारत से टकराने के काबिल नहीं रहे अगर अपनी जनता को बची कुची सेना को भूखे मरने से बचाना चाहते हो तो परमाणु बम को हमारे हवाले करो ...।
गौर हो कि पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) के गिलगिट बाल्टिस्तान क्षेत्र में पाकिस्तानी पुलिस की ओर से किए जा रहे अत्याचार और बर्बरता की खबरें लगातार सामने आती हैं। बीते दिनों एशियन ह्यूमन राइट कमिशन की ओर से जारी की गई एक रिपोर्ट में पाक पुलिस की बर्बरता और जुल्म की तस्वीर सामने आई थी। कमिशन ने पुलिस के अत्याचारों के तस्वीरें जारी करते हुए इन पाकिस्तानी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। पीओके के गिलगिट बाल्टिस्तान इलाके के चलत बाला जिला में पुलिस ने एक बेकसूर व्यक्ति की सिर्फ इसलिए पिटाई कर दी कि उसने स्थानीय पंचायत के भेदभाव पूर्ण उस फैसले को मानने से इनकार कर दिया।
गौर हो कि पाक अधिकृत कश्मीर में आजादी की मांग तेज पकड़ने लगी है। गिलगित-बाल्टिस्तान इलाके में स्थानीय लोगों ने बीते कुछ महीनों में पाकिस्तानी सुरक्षाबलों के खिलाफ जमकर प्रदर्शन और नारेबाजी की।
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