आज जिसे देखो गरीबी की बात करता है। नेता से लेकर अभिनेता तक जिसको देखो एक ही अलाप राग रहा है : गरीबी गरीबी गरीबी!!!!!! इनको शायद यह भी नहीं मालूम की जो गरीब होता है,वह इतना आत्मसम्मानी होता है, जो किसी के आगे हाथ नहीं फैलाता। कन्हैया जिसके लिए उसके समर्थक चिल्ला रहे है कि “वह एक गरीब परिवार से है और उसके माँ-बाप बड़ी कठिनाई से तीन हज़ार रूपए में गुजारा करते हैं। ” यह भी बात नहीं भूलनी चाहिए , कि जिस छात्र के माता-पिता निर्धन हो,उसे शर्म आनी चाहिए कि वह देशविरोधी नारे लगाये या नारे लगाने वालों के साथ खड़ा हो। जब से तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने “गरीबी हटाओ” का नारा दिया , मेरा अनुभव है ,शायद गलत हूँ ,कि “गरीबी एक स्वांग अधिक और वास्तविक कम ” प्रतीत हो रहा है। नेताओं के चाल-चलन देख जनता इतनी होशियार हो गयी है, पूछों नहीं। जनता देख रही है कि कोई जाति के नाम और कोई धर्म के नाम पर पार्टियाँ बनाते समय गरीब होते/होती है, लेकिन नेतागीरी चलने पर इतना धन अर्जित कर लेते/लेती हैं कि उनकी कम से कम तीन पीढ़ी को कमाने की जरुरत नहीं,फिर हम क्यों पीछे रहें। तर्क में दम इतना है कि किसी भी नेता मे...