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NRC: अरुण जेटली ने ब्लॉग लिख विपक्ष को घेरा, ममता बनर्जी और कांग्रेस को याद दिलाया पुराना स्टैंड

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार  असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) पर मचे घमासान के बीच केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने ब्लॉग लिखकर विरोधियों पर निशाना साधा है। जेटली ने इस ब्लॉग को  'राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर- संप्रभुता बनाम वोट बैंक'  नाम के शीर्षक से प्रकाशित किया है। जेटली ने ब्लॉग में लिखा है, 'क्षेत्र और नागरिक एक संप्रभु राज्य के दो सबसे महत्वपूर्ण पहलू हैं। किसी भी सरकार का मुख्य कर्तव्य देश की सीमाओं की रक्षा करना, किसी भी अतिक्रमण को रोकना और अपने नागरिकों के जीवन को सुरक्षित बनाना है। जम्मू-कश्मीर में संप्रभुता की रक्षा के लिए स्वतंत्र भारत को बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा है।' उन्होंने लिखा, 'स्वतंत्रता और भारत के विभाजन के समय असम पाकिस्तान के लिए भी एक गंभीर मुद्दा था। पाकिस्तान ने इस तथ्य से नाराजगी व्यक्त की कि कश्मीर की तरह असम स्वतंत्र भारत का हिस्सा बन गया है।' इस संबंध में जेटली ने जुल्फीकार अली भुट्टो की किताब 'मिथ ऑफ इंडिपेंडेंस' का जिक्र किया है, जिसमें लिखा है, 'यह गलत होगा कि कश्मीर ही एकमात्र मुद्दा है जो भारत और पा...

एनपीए पर मोदी के आरोप पर कांग्रेस चुप क्यों है?

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार  कांग्रेस पार्टी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  के खिलाफ लोकसभा में विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाना चाहिए। उन्हें संसद में पूछना चाहिए कि ऐसा कौन सा “टैक्स” था जिसका पैसा सरकार के खाते में नहीं जाता था? लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण का सबसे महत्वपूर्ण अंश यह था जब उन्होंने बताया कि जब तक कांग्रेस सत्ता में थी तब तक बैंकों को लूटने का खेल चलता रहा। उन्होंने कहा कि आजादी के 60 साल के बाद बैंकों ने कुल 18 लाख करोड़ रुपए लोन के रूप में दिए थे, लेकिन 2008 से 2014 के बीच मात्र 6 साल में यह रकम 18 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 52 लाख करोड़ रुपए हो गई। पीएम ने पूछा कि 6 साल में यह रकम कैसे दोगुनी (34 लाख करोड़ रुपए) हो गई? प्रधानमंत्री ने कहा कि विश्व में इंटरनेट बैंकिंग आने के पहले ही भारत में फोन बैंकिंग शुरू हो गई थी। इन 6 साल में कांग्रेस ने अपने चहेते लोगों के लिए बैंकों का खजाना लुटा दिया। उसका क्या तरीका था? कागज वगैरह कुछ देखना नहीं था, केवल टेलीफोन आता था कि लोन दे दो। लोन चुकाने के लिए दूसरा लोन दे दो उसके बाद कोई ...

‘मोदी-राज खत्म करने के लिए राजीव गांधी की हत्या जैसा कुछ करेंगे’

महाराष्ट्र में भीमा-कोरेगांव हिंसा के आरोपियों से पुलिस को संदिग्ध ईमेल और चिट्ठी मिली हैं। इसमें पूर्व प्रधानमंत्री  राजीव गांधी  की तरह  नरेंद्र मोदी  की हत्या की साजिश  का जिक्र है। पुणे पुलिस के मुताबिक, माओवादियों ने प्रधानमंत्री के रोड शो को निशाना बनाने की बात लिखी है। पुलिस ने ये सभी दस्तावेज कोर्ट में पेश किए। उधर, कांग्रेस ने इसे मोदी का पुराना हथकंडा करार दिया है। बता दें कि 1 जनवरी को हुई हिंसा के मामले में पुलिस ने नक्सलियों के हाथ होने का दावा किया है। केरल निवासी एक्टिविस्ट रोना विल्सन समेत 5 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। मोदी राज खत्म करने के लिए कदम उठाएं न्यूज एजेंसी के मुताबिक, पुलिस ने माओवादियों के इंटरनल कम्युनिकेशन को इंटरसेप्ट किया। ईमेल में कहा गया- ''नरेंद्र मोदी 15 राज्यों में भाजपा की सरकार बनाने में कामयाब हुए हैं। अगर ऐसे ही चलता रहा तो सभी मोर्चों पर पार्टी के लिए परेशानी खड़ी हो जाएगी। कॉमरेड किसन और कुछ अन्य सीनियर कॉमरेड ने मोदी राज खत्म करने के लिए कारगर सुझाव दिए हैं। हम इसके लिए राजीव गांधी जैसे हत्याकांड पर विचार कर...

Maoists planning to assassinate PM Modi in 'Rajiv Gandhi type' incident

In a shocking revelation, the Pune Police have intercepted internal communication of Maoists planning a 'Rajiv Gandhi type' assassination of Prime Minister Narendra Modi by "targeting his roadshows". The letter read, "We are thinking along the lines of another Rajiv Gandhi type incident. It sounds suicidal and there is a good chance that we might fail but we feel that the party PB/CC must deliberate over our proposal. Targeting his roadshows could be an effective strategy." The reason stated was, "Modi led Hindu fascist regime is bulldozing its way into the lives of indigenous adivasis. In spite of big defeats like Bihar and West Bengal, Modi (Prime Minister Narendra Modi) has successfully established BJP govt in more than 15 states. If this pace continues then it would mean immense trouble for the party on all fronts. Greater suppression of dissent and more brutal form of Mission 2016 (OGH). Com. Kisan and few other senior comrades have propose...

क्‍या राजीव गांधी सरकार की राह पर है मोदी का बेनामी प्रॉपर्टी कानून?

ब्‍लैकमनी और बेनामी प्रॉपर्टी के खिलाफ कड़े कदम उठाने का दावा करने वाली मोदी सरकार की मंशा सवालों के घेरे में है। यह सवाल इसलिए पैदा हुए हैं क्‍योंकि मोदी सरकार बेनामी प्रॉपर्टी ट्रांजैक्‍शन एक्‍ट के जरूरी एडजुकेटिंग अथॉरिटी का गठन अब तक नहीं कर सकी है जबकि कानून को लागू हुए 1.5 साल बीत गए हैं। इससे इनकम टैक्‍स डिपार्टमेंट द्वारा अटैच की गई 780 से अधिक बेनामी प्रॉपर्टी के इनवैलिडेट होने का खतरा पैदा हो गया है। अटैच प्रॉपर्टी को जब्‍त करने का फैसला एडजुकेटिंग अथॉरिटी ही कर सकती है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्‍या मोदी सरकार में बेनामी प्रॉपर्टी रखने वालों के खिलाफ सख्‍त कदम उठाने के लिए जरूरी इच्‍छा शक्ति का अभाव है। क्‍या सरकार बड़े नेताओं, नौकरशाहों, बिजनेसमैन और प्रभावशाली लोगों के दबाव में है? आम तौर पर माना जाता है कि भ्रष्‍टाचार से कमाए गए काले धन को लोग बेनामी प्रॉपर्टी में लगाते हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि अपने कार्यकाल के आखिरी दौर में प्रधानमन्त्री मोदी बेनामी प्रॉपर्टी पर एक्‍शन के लिहाज से सुस्‍त क्‍यों दिख रहे हैं? इन बेनामी प्रॉपर्टी पर कोई कार्यवाही न करना, क...

निर्माणाधीन इमारत में वीवीपैट मशीनें कैसे पहुंची?

जबसे भारत में चुनाव प्रक्रिया का श्रीगणेश हुआ है, तभी से किसी न किसी कमी के कारण चुनाव आयोग को कटघरे में खड़ा किया जाता है। लेकिन परिणाम वही ठाक के तीन पात।  मुझसे वरिष्ठ पत्रकारों एवं नेताओं को ज्ञात होगा कि पहले ही चुनाव में चुनाव आयोग ने तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री गोबिंद बल्लब पन्त की मिलीभगत से लोकतन्त्र की निर्मम हत्या की थी यानि रामपुर से लगभग 6000 वोटों से विजयी हिन्दू महासभा के बिशन सेठ को पराजित घोषित कर पराजित मौलाना आज़ाद को विजयी घोषित किया गया था। क्या हुआ चुनाव आयोग का? कुछ नहीं हुआ।  फिर किस कारण कोर्ट ने प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी को अयोग्य घोषित किया था? एक बार तो बैलेट पेपर और उस पर मोहर लगाने वाली स्याही को रूस से मंगवाने का आरोप भी लगा था। जिस पर तत्कालीन भारतीय जनसंघ के वरिष्ठ नेता प्रो बलराज मधोक ने कांग्रेस पर आरोप लगाया था कि "मोहर लगाई "दीपक" पर, बक्से खुलने पर मोहर निकली "गाय बछड़े" पर।"  उस समय दीपक जनसंघ का और गाय बछड़ा कांग्रेस का चुनाव चिन्ह था। इंदिरा गाँधी की हत्या उपरान्त सिखों के भा...

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To write on general topics and specially on films;THE BLOGS ARE DEDICATED TO MY PARENTS:SHRI M.B.L.NIGAM(January 7,1917-March 17,2005) and SMT.SHANNO DEVI NIGAM(November 23,1922-January24,1983)