नॉउफ मारावी आर.बी.एल. निगम, वरिष्ठ पत्रकार भारत में कट्टरपंथी और छद्दम धर्म-निरपेक्ष योगा पद्धति पर जो भी उल-जलूल बयानों से मुस्लिम समाज को भड़काने का प्रयत्न करें, लेकिन अब तक कई मुस्लिम देश योगा को प्रोत्साहन देने में प्रयत्नशील है। लेकिन भारत में कट्टरवाद और छद्दम धर्म-निरपेक्ष भारतीय मुस्लिम समाज को प्रगतिशील एवं मुख्यधारा से जुड़ने में बाधक बन रहे हैं। ये लोग इस तरह चीखते-चिल्लाते है, जैसे योगा करने से इस्लाम खतरे में पड़ जाएगा और दूसरे यह कि दुनियाँ में पक्के मुसलमान भारत में ही रहते हैं। यही लोग इस्लाम के मानने वाले हैं और दुनियाँ में इस्लाम को जिन्दा रखे हुए हैं। शेष मुस्लिम देशों में इस्लाम को केवल भारत के मुसलमानों के ही कारण जाना जाता है। क्या अब सऊदी अरब द्वारा योगा अपनाने से उनके इस्लाम को खतरा नहीं? हकीकत यह है कि ये लोग-- कट्टरपंथी और छद्दम धर्म-निरपेक्ष-- भारतीय मुस्लिम समाज को प्रगतिशील बनता नहीं देख सकते, ताकि इनकी रोज़ी-रोटी चलती रहे और भारतीय सरकारों को इस्लाम के नाम पर ब्लैकमेल करते रहो। जनता इस भ्रम रहेगी कि भारत सरकार इस्लाम पर ज़ुल्म कर रही...