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| नॉउफ मारावी |
भारत में कट्टरपंथी और छद्दम धर्म-निरपेक्ष योगा पद्धति पर जो भी उल-जलूल बयानों से मुस्लिम समाज को भड़काने का प्रयत्न करें, लेकिन अब तक कई मुस्लिम देश योगा को प्रोत्साहन देने में प्रयत्नशील है। लेकिन भारत में कट्टरवाद और छद्दम धर्म-निरपेक्ष भारतीय मुस्लिम समाज को प्रगतिशील एवं मुख्यधारा से जुड़ने में बाधक बन रहे हैं। ये लोग इस तरह चीखते-चिल्लाते है, जैसे योगा करने से इस्लाम खतरे में पड़ जाएगा और दूसरे यह कि दुनियाँ में पक्के मुसलमान भारत में ही रहते हैं। यही लोग इस्लाम के मानने वाले हैं और दुनियाँ में इस्लाम को जिन्दा रखे हुए हैं। शेष मुस्लिम देशों में इस्लाम को केवल भारत के मुसलमानों के ही कारण जाना जाता है। क्या अब सऊदी अरब द्वारा योगा अपनाने से उनके इस्लाम को खतरा नहीं? हकीकत यह है कि ये लोग-- कट्टरपंथी और छद्दम धर्म-निरपेक्ष-- भारतीय मुस्लिम समाज को प्रगतिशील बनता नहीं देख सकते, ताकि इनकी रोज़ी-रोटी चलती रहे और भारतीय सरकारों को इस्लाम के नाम पर ब्लैकमेल करते रहो। जनता इस भ्रम रहेगी कि भारत सरकार इस्लाम पर ज़ुल्म कर रही है। मुस्लिम देशों में तीन तलाक़ कब का बैन है और जब भारत में इसे बैन करने पर कितना शोर मचाया, जैसे तीन तलाक़ बैन होने से इस्लाम का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा।
अपनी कट्टर छवि से पीछा छुड़ाने की कोशिश कर रहे सऊदी अरब ने भारत की पांच हजार साल पुरानी योग पद्धति को खेलकूद की गतिविधि का दर्जा दिया है। साथ ही अब सऊदी अरब में सार्वजनिक तौर पर योग किया जा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक व्यापार एवं उद्योग मंत्रालय ने योग को खेल पद्धति के रूप में मान्यता देने संबंधी प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। साथ ही सरकार अब योग शिक्षकों को भी लाइसेंस जारी करेगी।सार्वजनिक रूप से यहां योग आसन किए जा सकेंगे। योग को सऊदी अरब में अपनाए जाने का पूरा श्रेय नॉउफ मारावी को जाता है।
| सऊदी अरब में योगा करती महिलाएँ |
सऊदी अरब के कट्टर समाज में योग को खेल का दर्जा दिलाने का श्रेय 37 वर्षीय महिला योग गुरु नॉउफ मारावी को जाता है। वह 2005 से ही सरकार की विभिन्न एजेंसियों से योग को मान्यता देने के लिए जद्दोजहद कर रही थीं। मारावी ने बताया कि, मेरी खराब सेहत ने मुझे योग की ओर आकर्षित किया। सऊदी की कामयाब महिला उद्यमी और सऊदी अरब में योग और आयुर्वेद की आधिकारिक प्रमोटर मारावी ने बताया, मैं 1998 से ही योग कर रही हूँ।
मारावी बताती हैं कि वह योग को मान्यता दिलाने के लिए 2005 से ही कोशिश कर रही है। इसके लिए शाही परिवार के कई सदस्यों से उन्होंने मिलने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। अंतत: राजकुमारी रीमा बींत बंदार अलसउद से मुलाकात की, जो शाही परिषद की सदस्य हैं और जिन्होंने देश में महिलाओं के लिए बास्केट बॉल के खेल की शुरुआत कराई।
उन्होंने कहा, राजकुमारी ने मामले में सकारात्मक पहल करने का भरोसा दिया। मारावी ने 2009 में योग पद्धति और चीनी इलाज पद्धति आधारित चिकित्सा केंद्र की स्थापना की। इससे पहले 2008 में उन्होंने सऊदी अरब योग स्कूल भी खोला। 2009 में अंतराष्ट्रीय योग खाड़ी क्षेत्र की निदेशक बनी. 2010 में सऊदी में अंतरराष्ट्रीय योग संघ की मानद सचिव बनीं. 2012 में वह भारत में योगलिंपिक समिति की उपाध्यक्ष नियुक्त हुई।
मारावी 2005 से अब तक तीन हजार छात्रों को योग की शिक्षा दे चुकी है। जबकि 2009-14 के बीच 70 से अधिक शिक्षकों को योग सिखाने के लिए प्रमाणपत्र दिया। उनके लिए केरल सरकार ने उन्हें योगचारिणी की उपाधि दी है।

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