“सबको सूचित कर दीजिए कि अगर महीने के लक्ष्य पूरे नहीं हुए तो न सिर्फ वेतन रुक जाएगा बल्कि निलंबन और कड़ा जुर्माना भी होगा. सारी प्रशासनिक मशीनरी को इस काम में लगा दें और प्रगति की रिपोर्ट रोज वायरलैस से मुझे और मुख्यमंत्री के सचिव को भेजें.” ऊपर लिखी इन लाइनों को पढ़ कर आपको शायद कुछ समझ ना आया हो ऐसे में आपकी जानकारी के लिए हम आपको बता दें कि ये एक टेलीग्राफ का अंश है। जी हाँ ये उस टेलीग्राफ का अंश बताया जाता है जिसे आपातकाल के समय उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव ने अपने लोगों को भेजा था। इस टेलीग्राफ का लक्ष्य सुनेंगें तो शायद आपकी रूह काँप जाए। इस टेलीग्राफ का मकसद बताया जाता है नसबंदी। जी हाँ वो ही नसबंदी जिसे आपातकाल के समय लोगों में जबरन करायी गयी थी। आप इन बातों से खुद ही अंदाज़ा लगा लीजिये कि नौकरशाही में इस फैसले को लेकर लोगों में आखिर किस कदर खौफ रहा होगा। इस फैसले और इसके पीछे की वजह जानने से पहले हम नसबंदी के फैसले से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बात आपको बता दें। दरअसल “चोर की दाढ़ी में तिनका”, ये कहावत आपने यूँ तो कई बा...