सैनिटरी नैपकिन पर 12 फीसदी का कर लगाया जा रहा था जिसकी चौतरफा आलोचना हो रही थी. आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार जैसा कि सर्वविदित है कि वर्तमान समय चुनावी बिसात बिछाने का है। कुशल राजनीतिज्ञ वही है, जो चुनाव सम्पन्न होने उपरान्त सत्तारूढ़ पार्टी पूंजीपति व्यापारियों को चुनाव में खर्च किए धन की वसूली के लिए चार वर्ष देती है, और चुनावी वर्ष में कीमतें कम कर अपने पक्ष में माहौल बनाने के वातावरण का श्रीगणेश करने का बिगुल बजाने के लिए कहा जाता है। हर चुनाव की भाँति 2019 में होने वाले चुनाव की तैयारी में सरकारी स्तर पर कीमतें कम करने की शुरुआत होनी प्रारम्भ हो चुकी है। मतदान के समय मतदाता महंगाई में चार वर्ष भूल सत्ता पक्ष को वोट देने की होड़ में सम्मिलित हो जाएगा। जीएसटी से जुड़े फैसले लेने वाला शीर्ष निकाय जीएसटी परिषद की जुलाई 21 को हुई बैठक में कई उत्पादों की दरों में बदलाव किया गया. काउंसिल की बैठक के बाद वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने प्रेस कॉफ्रेंस में बताया कि सैनिटरी नैपकिन को जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) से मुक्त कर दिया गया है. इसकी क...