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राजनीति के ये 5 धुरंधर क्या ममता बनर्जी के मंसूबे पर फेरेंगे पानी?

देशभर में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के प्रभाव के चलते विपक्षी दलों के सामने अपना अस्तित्व बचाने की चुनौती आ खड़ी हुई है. बीजेपी का विजय अभियान रोकने के लिए विपक्षी दलों के नेता अपने-अपने हिसाब से योजना बनाने में जुट गए हैं।  इसी कड़ी में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष  ममता बनर्जी  के दिल्ली दौरे के बाद से थर्ड फ्रंट की बात चर्चा में है। विभिन्न दलों के नेताओं के साथ बातचीत के बाद ममता बनर्जी ने भी संकेत दिया कि 2019 के लोकसभा चुनाव में क्षेत्रीय दलों को एकजुट करके वह गैर बीजेपी, गैर कांग्रेस विकल्प देना चाहती है। हालांकि क्षेत्रीय दलों के हालिया बयानों पर गौर करें तो ममता बनर्जी के मंसूबे पर पानी फिरता दिख रहा है। आइए 5 बड़ी क्षेत्रीय पार्टियों के बड़े नेताओं के बयान पर एक नजर डालते है।  शरद पवार: ममता बनर्जी के दिल्ली दौरे के दौरान एनसीपी के अध्यक्ष शरद पवार के साथ पार्टी के बड़े नेता प्रफुल्ल पटेल ने भी मुलाकात की थी। इस मुलाकात के बाद प्रफुल्ल पटेल ने कहा था, 'मेरी ममता बनर्जी बनर्जी से बातचीत हुई, जो क...

तीसरा मोर्चा: खतरे में अस्तित्व को बचाने के लिए एकजुटता

आर.बी. एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार  राजनीति भी क्या तेजी से रंग बदलती है,  गिरगिट भी शायद इतनी तेजी से रंग बदल पाती । आइये, एक नज़र डालते हैं, दलित, भ्रष्टाचार, गरीबी, बेरोजगारी, जनसुविधा, महँगाई, मिलावट, साम्प्रदायिकता, खाद्य आपूर्ति, किसान आत्महत्या, क़र्ज़ में डूबता किसान, तस्करी, तुष्टिकरण, आरक्षण आदि आदि समस्याओं को लेकर भारत में कितनी पार्टियाँ बन गयी, क्या किसी समस्या का समाधान हुआ ? हाँ, इन मुद्दों पर बनी पार्टियों के नेताओं की तिजोरियाँ जरूर मोटी हो गयी। लेकिन समस्याएँ निरन्तर बढ़ रही हैं। किसान आत्महत्या कर रहे हैं। किसान आत्महत्या आज कोई नया मुद्दा नहीं, बहुत पुराना है। इनकी आड़ लेकर कर्जे पर ऐश करने वालों के विरुद्ध कोई आवाज़ नहीं उठाता, क्यों? आखिर कब इस स्वाँग का पर्दाफाश होगा? एक समय था, जब दिल्ली में भी गांव और खेतों की कोई कमी नहीं थी, परन्तु आज उनकी जगह ऊँची-ऊँची इमारतें बन गयी हैं, मॉल और पीवीआर आदि बन गए हैं, और सरकार अथवा बिल्डर ने यह सब बनाने के लिए उन को मोटा धन भी दिया होगा, लेकिन जब धरने की बात होगी, दिल्ली के धन्नासेठ किसान गरीब बनकर आ जाएँगे।...

समाजवादी पार्टी को दिखने लगे चुनाव में हार के संकेत !

यूपी चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी की कलह और जंग फिर से शुरू हो गई है। जानकारों की मानें तो ये जंग संकेत दे रही है कि चुनाव में पार्टी की क्या हालत होने वाली है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की आहट लगातार पास आती जा रही है। जानकारी के मुताबिक मार्च में चुनाव हो सकते हैं। लेकिन चुनाव से पहले सत्ताधारी समाजवादी पार्टी की कलह मुलायम सिंह के लिए बड़ी समस्या बनती जा रही है। वर्चस्व की जंग जो शिवपाल और अखिलेश यादव के बीच शुरू हुई थी वो भले ही अब परदों के भीतर है। लेकिन थमी नहीं है। इस जग का अगला पड़ाव टिकट बंटवारा दिख रहा है। चाचा और भतीजा दोनों ही टिकट को लेकर अपने अधिकारों की बात कर रहे हैं। बरेली में हाल में हुई रैली के दौरान अखिलेश और शिवपाल की दूरी एक बार फिर से दिखाई दी। जब शिवपाल ने अखिलेश को एकदम नजरअंदाज कर दिया था। उसी समय ये साफ हो गया था कि जैसे -जैसे चुनाव नजदीक आएंगे ये दूरी पार्टी के लिए नुकसान का कारण बनेगी। चाचा-भताजे की जंग में अब रामगोपाल यादव भी कूद पड़े हैं। रामगोपाल ने इशारों में साफ कर दिया है कि टिकट बंटवारे में उनकी मर्जी चलेगी। इस से ये त्रिकोणीय जंग बन...

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shannomagan
To write on general topics and specially on films;THE BLOGS ARE DEDICATED TO MY PARENTS:SHRI M.B.L.NIGAM(January 7,1917-March 17,2005) and SMT.SHANNO DEVI NIGAM(November 23,1922-January24,1983)