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स्वतन्त्रता संग्राम में आरआरएस का योगदान

संघ विषयों पर विशेषज्ञ या शोधकर्ता तो नहीं, लेकिन यदाकदा संघ सम्बन्धी समाचार से अवगत होने पर अपने नोट पैड पर सुरक्षित करता रहता हूँ। लगभग हर मुद्दे पर चुप्पी साधे रखने वाली कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने काफ़ी दिन बाद मुँह खोला है और राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ यानी संघ के लिए ज़हर उगला है । सोनिया गांधी ने ये भी पूछा है कि राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ का आज़ादी में क्या योगदान रहा है, यह सब इस कारण से हुआ है कि कांग्रेस और वामपंथियों ने इतिहास की वास्तविकता को छुपा कर भ्रमित इतिहास जनमानस के सम्मुख रख, तुष्टिकरण को बैसाखी बना राज करते रहे। यह तुष्टिकरण समूह यह भूल गया कि जिस दिन जनमानस को वास्तविक इतिहास का बोध होगा, इनका नाम लेने वाला तक मिलना बहुत कठिन होगा।  इतिहास के जानकारों-- जन्म बेशक आज़ादी उपरान्त हुआ हो-- को शायद स्मरण हो बटवारे के बाद पाकिस्तान के चर्चित अख़बार 'The Dawn" ने लिखा था "... if RSS was formed 10 years before its formation, partition was not possible...." जो अपने आप में इस बात का प्रमाण है कि संघ की स्वतन्त्रता संग्राम में भूमिका अवश्य रही होगी। ल...

क्या भाजपा अपने वैचारिक गुरू गोलवलकर की शिक्षाओं से आज उतनी ही दूर है जितनी कि कांग्रेस?

यह बात किसी से छुपी नहीं है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की एक राजनीतिक शाखा है. इस पार्टी के अधिकतर बड़े नेता, फिर चाहे वह अटल बिहारी वाजपयी हों या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सक्रिय राजनीति में आने से पहले आरएसएस के प्रचारक रहे हैं. यह कहना ग़लत न होगा कि भाजपा के शरीर में संघ की ही रूह बसती है. हम सभी ये जानते हैं कि माधव सदाशिव या ‘गुरूजी’ गोलवलकर आरएसएस के वैचारिक एवं बौद्धिक गुरु हैं. उनके विचार आज भी संघ का मार्गदर्शन करते हैं. उनकी पुस्तक ‘अ बंच ऑफ़ थॉट्स’ संघ के लिये आज भी प्रेरणास्रोत मानी जाती है. अगर हम गुरूजी के राजनीतिक विचारों और उनकी अपने समय के राजनीतिज्ञों की आलोचनाओं पर ध्यान दें तो पायेंगे कि आज की भाजपा उनसे शायद ही प्रभावित है. मिसाल के तौर पर उनकी पुस्तक के खंड तीन में मौजूद अध्याय 24वें अध्याय - ‘फाइट टू विन’ - पर नजर डालते हैं जो उन्होंने भारत-चीन युद्ध के दौरान लिखा था. ‘जब हम अपने महान नेताओं को ये सब बताने लगते हैं तो वे कहते हैं कि देश की इस मुश्किल घड़ी में सरकार की आलोचना न कीजिये’ गुरू गोलवलकर सरकार की आलोचना को देशहित...

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To write on general topics and specially on films;THE BLOGS ARE DEDICATED TO MY PARENTS:SHRI M.B.L.NIGAM(January 7,1917-March 17,2005) and SMT.SHANNO DEVI NIGAM(November 23,1922-January24,1983)