कोई भी राष्ट्र अपनी मूल राष्ट्रीय अस्मिता, राष्ट्रीय गौरव और सांस्कृतिक मूल्यों को अपने ही हाथों नष्ट करके, कभी भी विश्व में सम्मान अर्जित नहीं कर सकता। दुर्भाग्यवश विगत आधी शताब्दी में भारत के कतिपय लेखकों, # इतिहासकारों , # पुरातत्त्वविदों ने अपने लिखे ग्रंथों में भारतीय इतिहास को तोड़-मरोड़ और विकृत करके भारतीय गौरव को धूलि-धूसरित करने का प्रयास किया है। यह एक निर्विवाद तथ्य है कि विगत दो शताब्दियों में # भारतीय_इतिहास पर लिखे गए अनेक ग्रंथों में अनेक ग़लत, भ्रामक तथा अनैतिहासिक तथ्यों की भरमार है। अंग्रेज़ी-शासनकाल के दौरान अंग्रेज़-शासकों ने यूरोपीय इतिहासकारों को भारतीय इतिहासलेखन का कार्य सौंपा। लगभग दो सौ # यूरोपीय_इतिहासकारों तथा # प्राच्यविदों (इण्डोलॉजिस्ट्स) ने भारतीय इतिहास लेखन के लिए मूल भारतीय ग्रंथों को आधार न बनाकर यूरोपीय इतिहास-ग्रंथों को आधार बना, अपनी मनमर्जी, भारतीय इतिहास के तथ्यों को तोड़ा-मरोड़ा तथा गौरवशाली भारत को दीन-हीन के रूप में प्रस्तुत किया। उस कालखण्ड में अनेक # भारतीय_इतिहासकारों ...