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विसनगर दंगा केस: हार्दिक पटेल को दो साल की सजा, जमानत मिली

मेहसाणा के विसनगर दंगा केस में हार्दिक पटेल, लालजी पटेल और एके पटेल को सेशन कोर्ट ने जुलाई 25 को दो-दो साल की सजा सुनाई। 14 आरोपियों को बरी कर दिया गया। बाद में कोर्ट ने सभी दोषियों को जमानत दे दी।  दंगा 23 जुलाई 2015 को पाटीदार आरक्षण आंदोलन के वक्त हुआ था। दरअसल, मेहसाणा पाटीदार आंदोलन का गढ़ था और इसकी शुरुआत विसनगर की सभा से ही हुई थी। इसके बाद वहां के भाजपा विधायक ऋषिकेश पटेल के दफ्तर में तोड़फोड़ की गई थी। कोर्ट ने इस मामले में फरियादी को 10 हजार, भाजपा विधायक को 40 हजार और एक कार मालिक को एक लाख रुपए मुआवजा देने का भी आदेश दिया। पाटीदार आंदोलन के दौरान यह राज्य में दर्ज किया गया पहला मामला था।  14 आरोपी बरी:  कोर्ट ने मामले में आरोपी हेमंत कुमार, दिनेश कुमार, सोमाभाई, राजेन्द्र कुमार कांतिलाल, कृष्ण कुमार मनुभाई, पर्थ भांजिभाई, प्रशांत कुमार, गोविंद भाई,  रामिककालाल, गोविंद भाई मंगनलाल, परेश कुमार, जयंती भाई, भारतभाई, सूरज कुमार को बरी कर दिया। 

दलितों से अधिक दलित नेता परेशान !!!

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार   पहले यूपी, फिर गुजरात, महाराष्ट्र और  उसके बाद बाकी देश में दलितों के नाम पर दंगे भड़काने की कोशिशें चल रही हैं। पिछले 3-4 साल में दलितों के कई नेता पैदा हो चुके हैं। इन सभी नेताओं में एक बात समान है वो ये कि ये सभी बाबा साहब अंबेडकर का नाम तो लेते हैं, लेकिन उनके अनुयायी नहीं हैं। ये सभी कांग्रेस के उस गुप्त प्लान का हिस्सा हैं जो उसने 2019 के चुनाव में जीत के लिए तैयार किया है। जिग्नेश मेवाणी हो या कोई और, इन सभी की जांच करें तो पता चलता है कि वो कम्युनिस्ट हैं और पिछले कुछ समय से कांग्रेस के संपर्क में हैं। यह बात किसी से छिपी नहीं है कि कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टियों के बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के साथ कैसे रिश्ते थे। तो सवाल उठता है कि कांग्रेस, कम्युनिस्टों और अनुसूचित जातियों के तथाकथित नेताओं में अचानक पैदा हुई नाराजगी और परेशानी का कारण क्या है?  इतिहास के पृष्ठों को पलटने पर ज्ञात होता है कि जिस तरह कांग्रेस और आम आदमी पार्टी सिक्के के एक ही पहलू है, ठीक वही स्थिति कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टी की है। कांग्रेस घोटाले और कम्य...

गुजरात सरकार संकट में

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार  गुजरात में सरकार बनने के एक सप्ताह के भीतर ही फूट सामने आ गई है। डिप्टी सीएम नितिन पटेल ने खुली बगावत करते हुए अल्टीमेटम दे दिया है। उधर 15 से ज्यादा बीजेपी विधायक पाला बदलने की तैयारी में हैं। अभी तो एक सप्ताह भी नहीं हुआ है गुजरात में सरकार बने, लेकिन सरकार में मतभेद और बीजेपी में फूट की खबरें सामने आने लगी हैं। मन-मुताबिक और कद के हिसाब से मंत्रालय न मिलने से उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल खफा हैं और उन्होंने आर-पार का ऐलान कर दिया है। इतना ही नहीं सूत्रों के मुताबिक उन्होंने बीजेपी हाईकमान को 3 दिन का अल्टीमेटम देकर कहा है कि अगर उनकी बात नहीं मानी गई तो वे इस्तीफा भी दे सकते हैं।सूत्रों का कहना है कि इस नई राजनीतिक रस्साकशी से बीजेपी परेशान है और वह ऐसे विकल्प पर विचार कर रही है कि सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे, यानी पटेल का सम्मान भी रह जाए और मुख्यमंत्री विजय रूपाणी की जिद को भी ठेस न पहुंचे। गुजरात बीजेपी में फूट की खबर उस समय सामने आई जब दिसम्बर 29 को नई सरकार के कई मंत्रियों ने कामकाज संभाल लिया, लेकिन उपमुख्यमंत्री और वरिष्ठ पाटीदार...

गुजरात में 62 प्रतिशत पाटीदार भाजपा के साथ

आर.बी.एल.निगम,वरिष्ठ पत्रकार  गुजरात चुनाव पर पूरे देश की नजर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की प्रतिष्ठा दांव पर बताई जा रही है। कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी गुजरात चुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंके हुए है। कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के लिए गुजरात चुनाव लिटमस टेस्ट है। राहुल गांधी अपने रिवाइवल के लिए गुजरात में पूरी ताकत लगा रखे है। दैनिक भास्कर द्वारा कराए गए सर्वे में स्पष्ट हुआ है कि गुजरात में जाति कोई मुद्दा नहीं है और 62 प्रतिशत पाटीदार को भारतीय जनता पार्टी के साथ है।  दैनिक भास्कर ने किया सर्वे गुजरात चुनाव से पहले दैनिक भास्कर और दिव्य भास्कर ने गुजरात में बड़ा सर्वे किया है. अखबार का दावा है एक से दस नवंबर के बीच पचासी हजार से ज्यादा लोगों का सैंपल सर्वे एकत्र किया गया. सर्वे के लिए वेबसाइट, मिस्ड कॉल के अलावा मतदाताओं से संपर्क भी किया गया है. नोटबंदी-जीएसटी भी बेअसर गुजरात चुनाव में जातिवाद के अलावा नोटबंदी और जीएसटी को भी दैनिक भास्कर के सर्वे में बेअसर बताया गया है...

आरक्षण के नाम पर पाटीदारों के साथ हार्दिक और कांग्रेस का धोखा -- अरुण जेटली

केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता अरुण जेटली ने कांग्रेस के आरक्षण फार्मूले पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि पाटीदार समुदाय को आरक्षण देने का कांग्रेस का वादा कुछ नहीं बल्कि वोटों की खातिर छलावा है क्योंकि उच्चतम न्यायालय शिक्षा एवं नौकरियों में आरक्षण की सीमा 50 फीसद तय कर चुका है. कांग्रेस के नेता कपिल सिब्बल ने पाटीदारों को आरक्षण देने के लिए जो फार्मूला दिया है, हार्दिक पटेल उससे संतुष्ट हैं और वो उसी को आधार बनाकर पाटीदार समाज से कांग्रेस को वोट देने की अपील कर रहे हैं. इस बीच भाजपा सवाल खड़े कर रही है. जेटली ने राजस्थान और सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देकर कहा कि पाटीदारों को आरक्षण के नाम पर धोखा दिया जा रहा है. जेटली से कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल द्वारा हार्दिक पटेल की अगुवाई वाले संगठन को पाटीदारों के लिए 50 फीसद से हटकर आरक्षण दिलाने के दिये गये आश्वासन के बारे में पूछा गया था. सिब्बल ने कथित रुप से कहा था कि कांग्रेस अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के वर्तमान आरक्षण में छेड़छाड़ नहीं करना चाहती और वह पाटीदारों को उससे हटकर आरक्षण देगी. गुजरात चुनाव को ल...

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To write on general topics and specially on films;THE BLOGS ARE DEDICATED TO MY PARENTS:SHRI M.B.L.NIGAM(January 7,1917-March 17,2005) and SMT.SHANNO DEVI NIGAM(November 23,1922-January24,1983)