केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता अरुण जेटली ने कांग्रेस के आरक्षण फार्मूले पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि पाटीदार समुदाय को आरक्षण देने का कांग्रेस का वादा कुछ नहीं बल्कि वोटों की खातिर छलावा है क्योंकि उच्चतम न्यायालय शिक्षा एवं नौकरियों में आरक्षण की सीमा 50 फीसद तय कर चुका है.कांग्रेस के नेता कपिल सिब्बल ने पाटीदारों को आरक्षण देने के लिए जो फार्मूला दिया है, हार्दिक पटेल उससे संतुष्ट हैं और वो उसी को आधार बनाकर पाटीदार समाज से कांग्रेस को वोट देने की अपील कर रहे हैं. इस बीच भाजपा सवाल खड़े कर रही है. जेटली ने राजस्थान और सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देकर कहा कि पाटीदारों को आरक्षण के नाम पर धोखा दिया जा रहा है.
जेटली से कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल द्वारा हार्दिक पटेल की अगुवाई वाले संगठन को पाटीदारों के लिए 50 फीसद से हटकर आरक्षण दिलाने के दिये गये आश्वासन के बारे में पूछा गया था. सिब्बल ने कथित रुप से कहा था कि कांग्रेस अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के वर्तमान आरक्षण में छेड़छाड़ नहीं करना चाहती और वह पाटीदारों को उससे हटकर आरक्षण देगी.
गुजरात चुनाव को लेकर इन दिनों गहमागहमी बढ़ गई है. भाजपा की ख्वाहिश जहाँ फिर से सत्ता पर काबिज होने की है तो कांग्रेस हार्दिक के सहारे पाटीदारों के वोट पाने के चक्कर में है. वैसे, कांग्रेस को इसमें कामयाबी मिलती दिखाई भी दे रही है. हार्दिक पटेल की प्रेस कांफ्रेंस कई बार रद हुई है, लेकिन अब आखिरकार उन्होंने एक प्रेस कांफ्रेंस की और इसमें कांग्रेस को समर्थन की बात फाइनल की है.हार्दिक ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि, कांग्रेस ने पाटीदारों के आरक्षण की बात मान ली है. वे कांग्रेस के फ़ॉर्मूले से संतुष्ट हैं. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने पाटीदारों को 50 प्रतिशत आरक्षण की बात मान ली है. उन्होंने एक बात और जोड़ी कि सरकार बनने पर 50 प्रतिशत से ज़्यादा का आरक्षण भी संभव है. इस बयान को कोटे में कोटे से जोड़कर देखा जा रहा है. हालाँकि कांफ्रेंस में उन्होंने ऐसा कोई जिक्र नहीं किया.
अब इसमें समझने वाली बात ये है कि आरक्षण 50 प्रतिशत के अन्दर ही रहना है. इस बात को सुप्रीम कोर्ट कई बार कह चुका है. उत्तर प्रदेश की पूर्ववर्ती सपा सरकार ने भी कुछ जातियों को इसमें शामिल करते हुए आरक्षण का दायरा बढ़ाने की कोशिश की थी. उस समय भी जब ये मामला सुप्रीमकोर्ट के संज्ञान में आया, तो इस पर फिर से प्रकाश डाला गया था कि आरक्षण को 50 प्रतिशत के अन्दर ही रहना है, जबकि उसमें अल्पसंख्यक, ओबीसी, एससी और एसटी सभी शामिल हैं.
इसके बाद भी हार्दिक 50 प्रतिशत से ज़्यादा के आरक्षण की बात कर रहे हैं, जो कि संभव नहीं हैं. इस मामले में हार्दिक की एक बात समझ से परे है कि कांग्रेस उन्हें 50 प्रतिशत से ज़्यादा आरक्षण के मुद्दे पर कैसे मना ले गई. इसके अलावा एक अबूझ पहेली ये भी है कि 50 प्रतिशत आरक्षण नहीं दिया जा सकता ये बात तो कम समझ रखने वाला व्यक्ति भी बता सकता है, फिर वे इस बात पर कैसे मान गए. आखिर ये सब माजरा वही है जो दिखाया जा रहा है. या फिर परदे के पीछे कोई दूसरा गेम चल रहा है. वैसे आरक्षण का यह खेल गुजराती भी समझते हैं.
फिलहाल हार्दिक ने कांग्रेस को समर्थन का ऐलान कर दिया है. उनके इस ऐलान की गुजरात की राजनीति पर कितना असर पड़ेगा, ये 18 दिसंबर को मतगणना में पता चल जाएगा.
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