आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार देश में जब भी कोई कांड होता है, पहले तो पीड़ित को ही दोषी ठहराया जाता है, और जब चुनाव पास होते हैं, उस स्थिति में एक पार्टी दूसरी पार्टी की लापरवाही को उछाल अपनी रोटियाँ सेंकना शुरू कर देती हैं। जैसा बवाना कांड में हो रहा है। भ्रष्टाचार का रोना सब पार्टियाँ रोती हैं, लेकिन समाप्त कोई नहीं करना चाहती।सड़क पर कोई हादसा हुआ, सीधा आरोप चालक पर लगता है। कोई मकान गिरता है, सीधा आरोप मकान मालिक पर लगता है कि नींव कमजोर होते हुए अवैध निर्माण कर लिया, जिस कारण यह दुर्घटना हुई। पुलिस से लेकर नगर निगम तक अपने ऊपर कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेगा कि निर्माण के दौरान हमने रिश्वत ली थी। किसी ने शिकायत कर दी, निर्माण रुकवाने में पुलिस को फिर पैसा। विवाद समाप्त होने पर निर्माण शुरू करते समय फिर पैसा। हैरानी की बात यह है कि जब भी देश में किसी भी सदन का चुनाव होता है, हर पार्टी भ्रष्टाचार दूर करने का लॉलीपॉप जनता को देते हैं, लेकिन दूर आज तक नहीं हुआ है। कोई भी सार्वजनिक कार्यालय ऐसा नहीं है, जहाँ बिना रिश्वत दिए काम होता हो। नगर निगम के बारे में तो कुछ कहना अँधेरे क...