2019 में या तो मोदी फिर प्रधानमंत्री बनेंगे या नहीं बनेंगे. दोनों स्थितियों के लिए जो मैं कहने जा रहा हूं, वो अहम बात है. अगर सिस्टम यही रहा तो कोई भी प्रधानमंत्री आए-जाए, कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा. पॉलिसी नई आती है, सिस्टम चलते रहता है. हिन्दुस्तान में यही हुआ. 1977 में जब पहली बार कांग्रेस हारी तो लोगों को अंदेशा था कि इंदिरा गांधी सत्ता छोड़ेंगी या नहीं? कुछ नहीं हुआ. मोरारजी भाई प्रधानमंत्री बन गए और ढाई-तीन साल रहे. इसके बाद, चरण सिंह आ गए, फिर इंदिरा गांधी आ गईं. यह सिलसिला चलता रहा. अब यह प्रश्न अभी क्यों उठ रहा है? क्योंकि मोदी जी ने कई फैसले लिए हैं, जो सिस्टम के लिए ठीक नहीं हैं. अभी कुछ दिन पहले मोदी जी ने भाषण दिया. कहा कि इमरजेंसी 43 साल पुरानी बात हो गई. इमरजेंसी के दौर में देवकांत बरूआ कांग्रेस के अध्यक्ष थे. उन्होंने एक बेहूदा बयान दिया कि अब सरकार और पार्टी का डिफरेंस खत्म हो गया है. आज के बाद लोग समझें कि इंदिरा इज इंडिया और इंडिया इज इंदिरा. यह बहुत ही बेहूदा बयान था. आज इमरजेंसी नहीं है. लेकिन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह बयान दे रहे हैं कि भारत का अगला...