कर्नाटक चुनाव में सिर्फ 8 दिन शेष हैं। राज्य की तीन बड़ी पार्टी कांग्रेस, भाजपा और जेडीएस की निगाहें राज्य के लिंगायत समुदाय पर हैं। विधानसभा की कुल 224 सीट में से 105 लिंगायत बहुल हैं, इनमें से 44 इस बार निर्णायक हो सकती हैं। पिछले चुनाव में इन पर उम्मीदवारों की जीत-हार ज्यादा से ज्यादा 10 हजार वोटों से हुई थी। 2013 चुनाव में इस समुदाय ने कांग्रेस को सपोर्ट किया था। इससे पार्टी को इन 105 सीटों में से 63 पर कामयाबी मिली थी। माना जा रहा है कि इसी वजह से सिद्धारमैया सरकार ने लिंगायतों को अल्पसंख्यक का दर्जा देने का कार्ड खेला है। 2013 में लिंगायत बहुल कुल 105 सीटों की स्थिति पार्टी जीती सीटें कितने फीसदी सीटें जीतीं कांग्रेस 63 60% भाजपा 16 15.23% जेडीएस 16 15.23% केजेपी 6 5.71% अन्य 4 3.8% नवंबर 2012 में भाजपा से अलग होकर येदियुरप्पा ने कर्नाटक क्षेत्रीय पक्ष (केजीपी) नाम से पार्टी बनाई थी। अब चूंकि येदियुरप्पा की भाजपा में वापसी हो गई है ऐसे में ये 6 सीटें भाजपा को मिलने की उम्मीद है। जीत का अंतर कुल 1-2000 9 2000-4000 8 4000-6000 9 6000-8000 8 8000-10,000 10...