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अटल बिहारी वाजपेयी : जिनकी जवाहरलाल नेहरू भी करते थे तारीफ, इंदिरा गांधी लेती थीं सलाह

अटल बिहारी वाजपेयी के ओजस्‍वी भाषणों के मुरीद देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू भी थे। देश में 1957 में दूसरे संसदीय चुनाव में वाजपेयी उत्‍तर प्रदेश के बलरामपुर से पहली बार जीतकर लोकसभा पहुंचे थे। तब उन्‍होंने सदन में जो भाषण दिया था, उसने तत्‍कालीन प्रधानमंत्री नेहरू को खासा प्रभावित किया था। विदेश मामलों में वाजपेयी की जबरदस्‍त पकड़ ने नेहरू को भी उनका कायल बना दिया था। हालांकि तब उनकी गिनती 'बैक बेंचर्स' यानी संसद में पिछली बेंचों पर बैठेने वाले सांसद के तौर पर होती थी, पर वह दौर ही कुछ ऐसा था कि वैचारिक मतभेदों के बावजूद नेता एक-दूसरे को परस्‍पर सम्‍मान देते थे और उनकी अनदेखी करने की बजाय महत्‍वपूर्ण मुद्दों पर उनकी राय को तवज्‍जो देते थे। नेहरू और वाजपेयी से जुड़ा एक किस्‍सा मशहूर है कि एक बार जब ब्रिटेन के प्रधानमंत्री भारत दौरे पर आए तो नेहरू ने वाजपेयी का उनसे परिचय यह कहते हुए कराया कि 'ये विपक्ष के उभरते हुए युवा नेता हैं। हमेशा मेरी आलोचनाएं करते हैं, लेकिन मैं भविष्‍य को लेकर इनमें बहुत संभावनाएं देखता हूं।' यहां तक कि एक बार उन्‍होंने वाजपेयी का...

गोपाल दास नीरज : पांव जब तलक उठें कि जिन्दगी फिसल गई.

आर.बी.एल.निगम, फिल्म समीक्षक  सांसों की डोर के आखिरी मोड़ तक बेहतहरीन नगमे लिखने के ख्वाहिशमंद मशहूर गीतकार और पद्मभूषण पुरस्कार से सम्मानित कवि गोपालदास सक्सेना ‘नीरज‘ का जुलाई 19 को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान अस्पताल (एम्स) में निधन हो गया। वह 93 वर्ष के थे। महफिलों और मंचों की शमां रोशन करने वाले नीरज को कभी शोहरत की हसरत नहीं रही। उनकी ख्वाहिश थी तो बस इतनी कि जब जिंदगी दामन छुड़ाए तो उनके लबों पर कोई नया नगमा हो, कोई नई कविता हो। दिल्ली स्थित एम्स में इस फनकार ने गुरुवार शाम 7.35 बजे अंतिम सांस ली।  नीरज ने एक बार किसी साक्षात्कार में कहा था,‘‘अगर दुनिया से रुखसती के वक्त आपके गीत और कविताएं लोगों की जबान और दिल में हों तो यही आपकी सबसे बड़ी पहचान होगी। इसकी ख्वाहिश हर फनकार को होती है। उनकी बेहद लोकप्रिय रचनाओं में ‘‘कारवां गुजर गया …….’’ रही : स्वप्न झरे फूल से, मीत चुभे शूल से, लुट गए सिंगार सभी बाग के बबूल से, और हम खड़े-खड़े बहार देखते रहे। कारवां गुजर गया, गुबार देखते रहे! नींद भी खुली न थी कि हाय धूप ढल गई, पांव जब तलक उठें कि जिन्दगी फिसल गई, नीरज न...

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