आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार एक वक्त था जब हम और आप टोटियों और हैंडपंप से आने वाले पानी को यूं ही मुंह लगाकर पी लिया करते थे। हमें किसी चीज की चिंता भी नहीं रहती थी। लेकिन आज तो ऐसा पानी पीना आपके लिए किसी खतरे से कम नहीं। लेकिन बदलते परिवेश में आज सब कुछ बेमानी हो गया है। जिस समय टोटियों और हैंडपंप का पानी पीते तब सरसों का तेल और शुद्ध घी अंगीठी पर रखते ही आसपास के घर तक महक जाते थे, लेकिन आज घर की चारदीवारी में ही पता नहीं चलता, क्यों? किसी नेता ने मंथन करने का प्रयास तक करने का विचार भी नहीं किया होगा। पता नहीं, खाद्य और स्वास्थ्य मंत्रालय क्या कर रहा है? क्या है इन मन्त्रियों का काम, केवल पद लेना? जो गम्भीर चिन्ता का विषय है। चुनावों में जिस पार्टी को देखो, जनहित की बात करती आती है, लेकिन मिलावट का बाजार उतना ही उन्नति कर रहा है, जनता का स्वास्थ्य जाए भाड़ में, इनको वोट चाहिए और जनता को लॉलीपॉप देकर अपनी जीविका और तिजोरी की चिन्ता करते नज़र आते हैं। फिर जो सरकार जनता को पीने का शुद्ध जल न दे सके, ऐसी सरकार का क्या लाभ? अभी कु...