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कश्मीर के हंदवाड़ा में आर्मी कैंप पर हमले की कोशिश नाकाम

भारतीय सेना के जांबाज जवानों ने एक बार फिर आर्मी कैंप पर आतंकी हमले की कोशिश को नाकाम कर दिया है। उत्तर कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में सेना के शिविर पर कुछ आतंकवादियों ने आज सुबह हमला किया जिसके बाद सुरक्षा बलों ने भी जवाबी कार्रवाई की और दोनों आतंकियों को मार गिराया। भारतीय सेना की जवाबी फायरिंग में दोनों आतंकी मारे गए। सेना के एक अधिकारी ने कहा, ‘आतंकवादियों ने सुबह करीब पांच बजे कुपवाड़ा जिले के लंगाटे में सैन्य शिविर पर गोलीबारी शुरू की जिसके जवाब में सतर्क भारतीय जवानों ने भी कार्रवाई की।’  दोनों ओर से करीब 15 से 20 मिनट तक गोलीबारी हुई। अधिकारी ने कहा, ‘‘जवान सतर्क थे और हमले को नाकाम कर दिया गया।’ उन्होंने बताया कि तलाशी अभियान जारी है। सेना के अधिकारी ने बताया कि जब सैन्य बल तलाश अभियान चला रहे थे तभी आतंकवादियों ने उन पर फिर से गोलीबारी की। अधिकारी ने कहा, ‘बल जब तलाश अभियान चला रहे थे, उसी दौरान सुबह करीब साढ़े छह बजे शिविर पर फिर से गोलीबारी हुई।’  साथ ही सेना ने जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ की तीन कोशिशें आज नाकाम कर दीं। घुसपैठ की ये कोशिशें पाकिस...

क्या पत्थरबाज सुरक्षा तंत्र को भेदने सुरक्षा दल में शामिल तो नहीं हो रहे?

जम्मू-कश्मीर में आतंकी बुरहान वानी के एनकाउंटर के बाद से हालात अशांत हैं। घाटी में कश्मीर में लगातार कर्फ्यू लगा हुआ है। दरअसल कश्मीर में हालात खराब करने के पीछे पाकिस्तान प्रायोजित पत्थरबाज हैं। आतंकी इन पत्थरबाजों को बाकायदा पैसे देकर सुरक्षाबलों पर पत्थर फिंकवाते हैं। पिछले एक महीने से सेना ने घाटी में मोर्चा संभाला हुआ है। माहौल को देखते हुए केंद्र सरकार ने सेना को खुली छूट दी है कि वो अपने हिसाब से इन लोगों को न्यूट्रालाइज करें। सेना भी कड़े कदम उठाने के बजाय धैर्यपूर्वक घाटी के हालात को सामान्य करने की कोशिश कर रही है। पिछले एक महीने में सेना ने करीब 300 पत्थरबाजों को गिरफ्तार किया है। इन संदिग्ध पत्थरबाजों की गिरफ्तारी के बाद घाटी में पत्थर फेंकने के मामलों में काफी गिरावट देखी गई है। इस बारे में सेना ने जानकारी दी है। कश्मीर में भाड़े के पत्थरबाज भाग रहे हैं। या तो सुरक्षा बल उन्हे पकड़ रहे हैं या तो वो अंडरग्राउंड हो रहे हैं। इसके कारण घाटी में हिंसक वारदातों में काफी कमी आई है। कश्मीर में हालात की समीक्षा करे हुए सुरक्षा अधिकारियों ने इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने बत...

अंधकारमय होने को अलगाववादियों और इनके परिजनों का भविष्य

इस काम को क्या नाम दिया जाए? देशद्रोह या देशभक्ति? अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी ने कहा कि कश्‍मीर आजादी के करीब है। सितम्बर ९ को गिलानी ने कहा कि आजादी की लड़ाई का वर्तमान चरण आजादी के लक्ष्‍य के काफी करीब ले गया है। अब आजादी नजरों के सामने हैं। उन्‍होंने मीडियाकर्मियों को लिखे खत में यह बात कही। गिलानी ने यह खत प्रेस कांफ्रेंस की अनुमति न मिलने के बाद जारी किया है। उन्‍होंने सुबह 11 बजे हैदरपुरा स्थित घर पर प्रेस कांफ्रेंस बुलाई थी लेकिन प्रशासन ने उनके घर की ओर जाने वाले रास्‍तों पर पाबंदी लगा दी। गिलानी ने लिखा कि ‘कमांडर बुरहान के शहीद’ होने के बाद से प्रत्‍येक गांव और कस्बे से यह संदेश आया है कि भारत और कश्‍मीर के बीच केवल किरायेदार और कब्‍जेदार का रिश्‍ता है। उसने अब्‍दुल्‍ला, मुफ्ती, लोन और ऐसे अनगिनत नामों के रूप में परदे बनाए। उन्‍होंने लिखा, ”हम हमेशा से कह रहे हैं कि ये सहयोगी भारत की कठपुतली मात्र हैं और आज यह साफ है कि उनका एकमात्र काम भारत के कब्‍जे को मजबूत करना और हमारे लोगों की हत्‍याओं व उन्‍हें अंधे करने पर सफाई देना भर है। उन्‍होंने मारने ...

कश्मीर पर मोदी की सफल होती नीति

कश्मीर समस्या के समाधान के लिए मोदी सरकार लगातार कोशिशों में लगी हुई है। पिछले डेढ़ महीने से घाटी  के हालात सामान्य नहीं हैं। कर्फ्यू से लोगों को परेशानी हो रही है। लेकिन हिंसा रोकने के लिए कर्फ्यू का सहारा लेना राज्य सरकार की मजबूरी है। कश्मीर समस्या हमेशा से केंद्र सरकारों के लिए परेशानी का विषय रही है। मगर मोदी सरकार जिस तरह से रणनीति बनाकर आगे बढ़ रही है उस से अलगाववादियों की नींव हिलती दिख रही है। कश्मीर समस्या के समाधान के लिए केंद्र सरकार ने सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल घाटी में भेजा था। इस में सभी दलों के नेता थे। वो नेता भी थे जो अलगाववादियों से बातचीत के पक्षधर हैं। ये प्रतिनिधिमंडल कश्मीर में समस्या का हल खोजने के लिए गया था। इस प्रतिनिधिमंडल के साथ अलगाववादियों ने जिस तरह का व्यवहार किया उस से पीएम मोदी की चाल कामयाब होती दिख रही है। दरअल सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल जब अलगाववादियों से मिलने के लिए पहुंचा तो उन्होने मिलने से इंकार कर दिया। सैयद अली शाह गिलानी, मीरवाइज उमर फारुख जैसे अलगाववादियों ने तो अपने घर का दरवाजा तक नहीं खोला था। अलगाववादियों का प्रतिनिधिमंडल से नहीं मिल...

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shannomagan
To write on general topics and specially on films;THE BLOGS ARE DEDICATED TO MY PARENTS:SHRI M.B.L.NIGAM(January 7,1917-March 17,2005) and SMT.SHANNO DEVI NIGAM(November 23,1922-January24,1983)