जम्मू-कश्मीर में आतंकी बुरहान वानी के एनकाउंटर के बाद से हालात अशांत हैं। घाटी में कश्मीर में लगातार कर्फ्यू लगा हुआ है। दरअसल कश्मीर में हालात खराब करने के पीछे पाकिस्तान प्रायोजित पत्थरबाज हैं। आतंकी इन पत्थरबाजों को बाकायदा पैसे देकर सुरक्षाबलों पर पत्थर फिंकवाते हैं। पिछले एक महीने से सेना ने घाटी में मोर्चा संभाला हुआ है। माहौल को देखते हुए केंद्र सरकार ने सेना को खुली छूट दी है कि वो अपने हिसाब से इन लोगों को न्यूट्रालाइज करें। सेना भी कड़े कदम उठाने के बजाय धैर्यपूर्वक घाटी के हालात को सामान्य करने की कोशिश कर रही है। पिछले एक महीने में सेना ने करीब 300 पत्थरबाजों को गिरफ्तार किया है। इन संदिग्ध पत्थरबाजों की गिरफ्तारी के बाद घाटी में पत्थर फेंकने के मामलों में काफी गिरावट देखी गई है। इस बारे में सेना ने जानकारी दी है।
कश्मीर में भाड़े के पत्थरबाज भाग रहे हैं। या तो सुरक्षा बल उन्हे पकड़ रहे हैं या तो वो अंडरग्राउंड हो रहे हैं। इसके कारण घाटी में हिंसक वारदातों में काफी कमी आई है।
कश्मीर में हालात की समीक्षा करे हुए सुरक्षा अधिकारियों ने इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ दिनों से घाटी में पत्थरबाजी की घटनाओं में कमी आई है। श्रीनगर की सड़कें और उसके आस -पास का इलाका शांत और सुरक्षित बना हुआ है। हिंसक घटनाओं में भी कमी देखी जा रही है। प्रदर्शनकारियों पर लगाम लगाई गई है। सुरक्षाबलों ने उम्मीद जताई है कि आने वाले दिनों में कश्मीर में पूरी तरह से शांति होगी। पाकिस्तान से होने वाली घुसपैठ को रोका जा रहा है। जो भाड़े के पत्थरबाज हैं उनकी पहचान करके गिरफ्तार किया जा रहा है। इसके अलावा भड़काऊ बयान और भाषण देने वालों की भी पहचान की जा रही है। कश्मीर में अलगाववादियों को भी किनारे किया जा रहा है। सुरक्षाबलों ने उम्मीद जताई है कि कश्मीर की जनता अब किसी बहकावे में नहीं आएगी।
8 जुलाई को हिज्बुलल आतंकी बुरहान वानी के एनकाउंटर के बाद से कश्मीर में हिंसक घटनाएं हो रही हैं। प्रदर्शनकारी सरकारी इमारतों और सुरक्षाबलों पर हमला कर रहे हैं। इन घटनाओं से राज्य सरकार के साथ केंद्र सरकार भी परेशान थी। इन पर रोक लगाने के लिए जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल ने पत्थरबाजों को सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम यानि PSA के तहत गिरफ्तार करना शुरू किया। इस कदम के बाद घाटी में हिंसक घटनाओं में कमी आनी शुरू हुई। पत्थरबाजों और प्रदर्शनकारियों पर नकेल कसने के अलावा सुरक्षाबलों ने हुर्रियत के भी कुछ नेताओं को गिरफ्तार किया है। अभी तक अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी, जमात-ए-इस्लामी और हिज्बुल मुजाहिदीन के लोगों के साथ कुल 423 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। सुरक्षा बलों की इस कार्रवाई के बाद घाटी में लोगों को भड़काने वाले फरार हैं। वो या तो पाकिस्तान चले गए हैं या फिर अंडरग्राउंड हो गए हैं।
गृह मंत्रालय के मुताबिक पुलिस और सीआरपीएफ ने अनंतनाग , शोपिया, बांदीपुरा, पुलवामा, कुलगाम और सोपोर के गावों में जाकर हिंसा फैलाने वालों की धरपकड़ की है। इन लोगों से पूछताछ की जा रही है। वहीं घाटी में हाल ही में कुछ जगहों से कर्फ्यू हटाया गया था। लेकिन तीम युवकों की गिरफ्तारी के बाद बढ़े तनाव को देखते हुए फिर से कर्फ्यू लगा दिया गया है। शनिवार को कानून और व्यवस्था का उल्लंघन करने के आरोप में तीन युवकों को गिरफ्तार किया था। PSA के तहत गिरफ्तार किए गए इन युवकों को हालांकि बाद में छोड़ दिया गया था। साफ है कि घाटी में पुलिस और सुरक्षाबलों ने पत्थरबाजों पर लगाम लगाने के लिए जो रणनीति तैयार की थी वो कामयाब होती दिख रही है। वहीं कश्मीर के लोग भी कर्फ्यू से परेशान हैं वो खुद शांति चाहते हैं। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले कुछ दिनों में कश्मीर घाटी में पहले की तरह हालात सामान्य हो जाएंगे। केंद्र सरकार के लिए भी कश्मीर में शांति सबसे बड़ा एजेंडा है।
सुरक्षा तंत्र को भेदने की साज़िश तो नहीं?
सूत्रों को इस बात की भी शंका है कि सुरक्षा में भर्ती के लिए हो रही मारा-मारी कहीं कोई अलगाववादियों की साज़िश तो नहीं। भारत सरकार के खर्चे पर प्रशिक्षण लो और फिर इन्ही पर वार करो। एक तरफ सरकार का पाकिस्तान के साथ सख्ती करना और उसके बाद सुरक्षा में भर्ती होना, मष्तिक में सन्देह उत्पन्न कर रहा है। यदि इन लोगों में वास्तव में शांति की भावना थी, तो अब तक कहाँ थे? राज्य और केन्द्र सरकार को इस पर अपनी निगाह रखनी होगी। क्योंकि हाफिज सईद का कहना है कश्मीर को फौज़िओं का कब्रिस्तान बना देंगे। दुश्मन को काम नहीं आंकना चाहिए। कल तक "पाकिस्तान ज़िन्दाबाद", "आईएसआईएस ज़िन्दाबाद" "Go back India go Back" नारे लगाने वालों में अचानक इतना बदलाव किसी गहरी साज़िश की ओर संकेत दे रहा, जिसे शायद हम समझ नहीं पा रहे और पाकिस्तान से होने वाली संभावित लड़ाई में इनके हाथों कहीं मात न खा जाएं? जो इतने वर्षों से बंदूक, गोली, पेलेट गोली एवं कर्फ्यू से नहीं डरे और अब अचानक मानसिकता में इतना बदलाव ?
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