आर.बी.एल.निगम,वरिष्ठ पत्रकार समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव के सुझाव पर अमल करते हुए यदि कांग्रेस फ्रांस की फुटबाल टीम की तरह व्यवहार कर गई तो मध्य प्रदेश की सियासत के रंग कुछ और ही देखने को मिलेंगे। पिछले सप्ताह भोपाल आए अखिलेश ने कांग्रेस को सलाह दी थी कि जिस तरह फीफा वर्ल्ड कप में फ्रांस ने कई देशों से अपने खिलाड़ी चुने थे, उसी तरह कांग्रेस को भी करना चाहिए। उनका इशारा चुनाव पूर्व गठबंधन की ओर था, जिसकी तैयारियां कांग्रेस की ओर से जोर-शोर से जारी हैं। कांग्रेस, बसपा और सपा के साथ टिकटों के बंटवारे पर चर्चा शुरू कर चुकी है ताकि ग्वालियर-चंबल संभाग, बंुदेलखंड और विंध्य की 90 सीटों के नतीजे पलटाए जा सकें। मप्र के ये वे हिस्से हैं जो उत्तर प्रदेश से सटे हुए हैं। वहां की सामाजिक-राजनीतिक व्यवस्था इन इलाकों पर गहरा असर रखती हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो यह साबित भी होता है कि ग्वालियर, विंध्य और बुंदेलखंड में यदि पिछले चुनावों में भाजपा और कांग्रेस के बीच के मतों के अंतर को बसपा-सपा को मिले वोट से पाट दिया जाए तो भाजपा घाटे में दिखाई पड़ती है। इन तीनों क्षेत्रों में विध...