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कांग्रेस को सपा-बसपा से समझौता देगा बड़ा फायदा

आर.बी.एल.निगम,वरिष्ठ पत्रकार   समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव के सुझाव पर अमल करते हुए यदि कांग्रेस फ्रांस की फुटबाल टीम की तरह व्यवहार कर गई तो मध्य प्रदेश की सियासत के रंग कुछ और ही देखने को मिलेंगे। पिछले सप्ताह भोपाल आए अखिलेश ने कांग्रेस को सलाह दी थी कि जिस तरह फीफा वर्ल्ड कप में फ्रांस ने कई देशों से अपने खिलाड़ी चुने थे, उसी तरह कांग्रेस को भी करना चाहिए। उनका इशारा चुनाव पूर्व गठबंधन की ओर था, जिसकी तैयारियां कांग्रेस की ओर से जोर-शोर से जारी हैं। कांग्रेस, बसपा और सपा के साथ टिकटों के बंटवारे पर चर्चा शुरू कर चुकी है ताकि ग्वालियर-चंबल संभाग, बंुदेलखंड और विंध्य की 90 सीटों के नतीजे पलटाए जा सकें। मप्र के ये वे हिस्से हैं जो उत्तर प्रदेश से सटे हुए हैं। वहां की सामाजिक-राजनीतिक व्यवस्था इन इलाकों पर गहरा असर रखती हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो यह साबित भी होता है कि ग्वालियर, विंध्य और बुंदेलखंड में यदि पिछले चुनावों में भाजपा और कांग्रेस के बीच के मतों के अंतर को बसपा-सपा को मिले वोट से पाट दिया जाए तो भाजपा घाटे में दिखाई पड़ती है। इन तीनों क्षेत्रों में विध...

Congress faces challenges within to form anti-BJP alliance for 2019 polls

The Congress party's pursuit to stitch a larger anti-BJP alliance for 2019 is already facing challenges from quarters within. The party was confronted with massive rumblings within its West Bengal unit where the state leadership is bitterly divided over alliance options. While one section of the West Bengal Congress led by party chief Adhir Ranjan Chowdhury is advocating a pact with the opposition left front in the state, another camp led by Congress secretary and local MLA Mainul Haque has batted for an alliance with the ruling TMC. Congress president Rahul Gandhi had to meet all state leaders individually earlier to dissipate the crisis amid possibilities of Haque and some of his supporters switching over to the Mamata Banerjee-led TMC, should Gandhi decide to go with the Left. "We will not quit the Congress and will await the decision of Congress President Rahul Gandhi before taking any decision," Haque told PTI. He felt no vote transfer to the Congres...

उत्तर प्रदेश में विपक्षी गठबंधन से कांग्रेस हुई बाहर

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार   यूपी में महागठबंधन की चुनावी रणनीति में कांग्रेस बाहर रह सकती है।  सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के इस ऐलान के बाद, कि यूपी में 2019 में भाजपा का विजय रथ रोकने के लिए वो बहुजन समाज पार्टी का 'जूनियर' बनने को तैयार हैं, दोनों दलों के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर बातचीत लगभग फाइनल दौर में है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि मायावती और अखिलेश के बीच सीटों के बंटवारे की रूपरेखा खिंच चुकी है। अब इसे लेकर केवल आधिकारिक ऐलान होना बाकी है। यूपी में 2019 के लिए बनने वाले महागठबंधन का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि इसमें आरएलडी को तो शामिल किया जाएगा, लेकिन कांग्रेस को जगह नहीं दी जाएगी। माना यह जा रहा है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी 35 और बहुजन समाज पार्टी 40 सीटों पर लड़ सकती हैं। बाकी सीटें सहयोगी दलों के लिए छोड़ी जाएंगी।  इसके अलावा 3 सीटें आरएलडी को दी जा सकती हैं। आरएलडी को मिलने वाली तीन सीट बागपत, कैराना और मथुरा हो सकती हैं। कांग्रेस को महागठबंधन में शामिल तो नहीं किया जाएगा, लेकिन अमेठी और रायबरेली में सपा, बसपा या आरएलडी अपने उम्म...

बीएसपी के 200 कार्यकर्ताओं ने की 'घर वापसी'

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार  2019 के लोकसभा चुनाव को लेकर तैयारियों में जुटी बीएसपी सुप्रीमो मायावती के लिए राहत भरी खबर आई है। बहुजन समाज पार्टी के करीब 200 कार्यकर्ताओं ने 'घर वापसी' की है। ये सभी लखनऊ जोन कैडर के कार्यकर्ता हैं।  मायावती एक बार को जरूर खुश हो लें, कि उनकी खोई साख वापस हो रही है, लेकिन ऐसे बरसाती मेंढकों पर किसी को खुश होने की जरुरत नहीं,क्योकि इन लोगों को कहाँ और कब तवा परात दिखी नहीं वहीँ सारी रात बिता देंगे और मालपुए खत्म होते ही, वापस कहीं और डेरा डालने पहुँच जायेंगे। ऐसे लोग विश्वास के लेशमात्र भी काबिल नहीं होते। ऐसे लालची केवल अपना स्वार्थ देखते हैं, समाज या देश का नहीं और ऐसे ही लोगों के कारण भ्रष्टाचार भी फैलता है।   बीएसपी सुप्रीमो मायावती के पास वापस लौटे 200 पुराने कार्यकर्ता, कहा- भाजपा के भी कुछ आने वाले हैं जानकारी के मुताबिक ये कार्यकर्ता 2017 में हुए यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान बीएसपी का साथ छोड़कर दूसरे दलों में चले गए थे। उस समय पार्टी के कई नेताओं ने बीएसपी का साथ छोड़ दिया था। इसका खामियाजा भी पार्टी को यूपी चुनाव...

यूपी में शाह का गणित नहीं अब माया-अखिलेश का गणित

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार  देश की 4 लोकसभा सीटों और 10 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजे आए, 14 सीटों में एनडीए और महागठबंधन के बीच उपचुनाव का स्कोरकार्ड 3-11 का रहा। क्या 2019 के आम चुनावों की ओर बढ़ रहे राजनीतिक दलों के लिए ये नतीजे काफी दूरगामी असर डालने वाले हैं?  1. जहां बीजेपी के लिए उपचुनाव के नतीजे बड़ा झटका माने जा रहे हैं वहीं विपक्षी महागठबंधन के प्रयोग की सफलता की कहानी भी बयान करने वाले रहे। खासकर उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा के बोल्ड सियासी फैसले ने साफ कर दिया कि बीजेपी के चाणक्य अमित शाह के लिए 2019 की जंग यूपी में 2014 जितनी आसान नहीं रहने वाली।  2. इस जीत का श्रेय दिया जाना चाहिए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और बसपा प्रमुख मायावती को. जिन्होंने अपनी साझी रणनीति से पहले गोरखपुर-फूलपुर और अब कैराना-नूरपुर में बीजेपी को मात देकर तमाम दलों को मोदी मैजिक को मात देने का अचूक फॉर्मूला दे दिया।  3. अब मोदी मैजिक की काट विपक्षी दलों के पास है और वो है महागठबंधन का फार्मूला। जो पहले बिहार में सफल रही थी और अब यूपी में हर उपचुनाव मे...

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