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कांग्रेस को सपा-बसपा से समझौता देगा बड़ा फायदा


आर.बी.एल.निगम,वरिष्ठ पत्रकार 
समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव के सुझाव पर अमल करते हुए यदि कांग्रेस फ्रांस की फुटबाल टीम की तरह व्यवहार कर गई तो मध्य प्रदेश की सियासत के रंग कुछ और ही देखने को मिलेंगे। पिछले सप्ताह भोपाल आए अखिलेश ने कांग्रेस को सलाह दी थी कि जिस तरह फीफा वर्ल्ड कप में फ्रांस ने कई देशों से अपने खिलाड़ी चुने थे, उसी तरह कांग्रेस को भी करना चाहिए। उनका इशारा चुनाव पूर्व गठबंधन की ओर था, जिसकी तैयारियां कांग्रेस की ओर से जोर-शोर से जारी हैं। कांग्रेस, बसपा और सपा के साथ टिकटों के बंटवारे पर चर्चा शुरू कर चुकी है ताकि ग्वालियर-चंबल संभाग, बंुदेलखंड और विंध्य की 90 सीटों के नतीजे पलटाए जा सकें।
मप्र के ये वे हिस्से हैं जो उत्तर प्रदेश से सटे हुए हैं। वहां की सामाजिक-राजनीतिक व्यवस्था इन इलाकों पर गहरा असर रखती हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो यह साबित भी होता है कि ग्वालियर, विंध्य और बुंदेलखंड में यदि पिछले चुनावों में भाजपा और कांग्रेस के बीच के मतों के अंतर को बसपा-सपा को मिले वोट से पाट दिया जाए तो भाजपा घाटे में दिखाई पड़ती है। इन तीनों क्षेत्रों में विधानसभा की कुल 90 सीटें आती हैं। सबसे ज्यादा 34 सीटें ग्वालियर-चंबल संभाग की हैं। 2013 के विधानसभा चुनावों में यहां वोट और सीटों के मामले में भाजपा, कांग्रेस से आगे है।
भाजपा ने 17 लाख 81 हजार 598 वोट पाकर 20 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल की थी और कांग्रेस ने 15 लाख 12 हजार 20 वोट पाकर 12 सीटें पाई थीं। दोनों पार्टियों के बीच वोटों का फासला महज पौने तीन लाख का था, लेकिन सीटों का फासला आठ का रहा। फर्ज कीजिए कांग्रेस के वोट में अगर बसपा के सात लाख वोट मिल जाते तो स्थिति क्या होती? 2008 में तो स्थितियां और भी खराब थीं। तब बसपा के साथ-साथ सपा भी कुछ सीटों पर ठीक-ठाक स्थिति में थी। इसी अंचल में 2008 में कांग्रेस के मुकाबले भाजपा पिछड़ी हुई थी। कांग्रेस 50 हजार मतों से भाजपा से आगे थी। भाजपा को कुल 9 लाख 50 हजार और कांग्रेस को 9 लाख्ा 99 हजार वोट मिले थे। तब बसपा के वोट छह लाख से ज्यादा थे।
टिकट बंटवारे पर शुरू हो गई बातचीत
ऐसी ही स्थिति विंध्य की भी है। वहां भी यदि कांग्रेस, बसपा और सपा मिल जाती हैं तो नतीजे चौंकाने वाले होंगे। 2013 में सपा ने दमदारी से चुनाव नहीं लड़ा था, लेकिन इस बार सपा भी पूरी ताकत लगाती दिख रही है। 2013 के चुनाव में विंध्य में कांग्रेस और भाजपा के बीच वोटों का अंतर लगभग चार लाख का था। जबकि बसपा ने छह लाख से ज्यादा मत पाए थे। बुंदेलखंड में भी स्थितियां कमोबेश ऐसी ही हैं। कांग्रेस सूत्रों की मानें तो पार्टी ने अखिलेश यादव की सलाह पर रणनीति बनाना शुरू कर दिया है। बसपा और सपा से टिकट बंटवारे पर बातचीत शुरू हो चुकी है। अखिलेश यादव ने भोपाल आकर सकारात्मक संकेत भी दिए हैं।

क्‍या आप ममता बनर्जी या मायावती का PM पद के लिए समर्थन करेंगे? राहुल गांधी ने दिया जवाब

कांग्रेस ने जुलाई 22 को आगामी 2019 लोकसभा चुनावों के मद्देनजर पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी को चुनाव से पहले और चुनाव के बाद गठबंधन के लिए अधिकृत करते हुए कहा कि बीजेपी को सत्‍ता से बेदखल करने के अभियान में राहुल गांधी ही पार्टी का चेहरा होंगे. इस तरह से एक प्रकार से कांग्रेस ने उनको पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में घोषित कर दिया है. इससे कांग्रेस ने यह भी साफ कर दिया है कि विपक्ष की धुरी अब सोनिया गांधी नहीं राहुल गांधी होंगे. यहीं से बड़ा सवाल उठता है कि क्‍या बसपा सुप्रीमो मायावती और तृणमूल कांग्रेस नेता ममता बनर्जी 2019 के चुनाव में उनको विपक्ष का नेता मानने को तैयार होंगे?
इन विपक्षी नेताओं की मंशा चाहे जो हों लेकिन कांग्रेस के ऐलान के बाद अपने पहले सार्वजनिक कार्यक्रम में स्थिति साफ करते हुए कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि वह किसी भी ऐसे प्रत्‍याशी का समर्थन करेंगे जो बीजेपी और आरएसएस को हराएगा. मंगलवार शाम को महिला पत्रकारों से बातचीत के एक कार्यक्रम में सूत्रों के मुताबिक जब उनसे पूछा गया कि क्‍या वह प्रधानमंत्री पद के लिए मायावती या ममता बनर्जी के नाम का समर्थन करेंगे तो राहुल गांधी ने यह जवाब दिया.
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Congress President @RahulGandhi met and interacted with women journalists earlier this evening and what a wonderful interaction it was!
सूत्रों के मुताबिक 2019 के आम चुनावों में कांग्रेस की रणनीति के संबंध में राहुल गांधी ने कहा कि मुख्‍य मुद्दा यूपी और बिहार में जीत हासिल से है क्‍योंकि इन दोनों राज्‍यों की कुल मिलाकर लोकसभा में 22 प्रतिशत सीटें हैं. इसलिए इन राज्‍यों में बीजेपी को हराने के लिए कांग्रेस गठबंधन को तैयार है.
राहुल की PM उम्मीदवारी को देवगौड़ा का समर्थन, कई दलों की सहमति अभी बाकी
भाजपा के खिलाफ संयुक्त गठबंधन की ओर से राहुल गांधी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बनने का जेडीएस नेता एचडी देवगौड़ा ने समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि राहुल के नेतृत्व में गठबंधन सरकार चलाए जाने को लेकर हमें कोई दिक्कत नहीं है। हालांकि विपक्षी गठबंधन में तृणमूल कांग्रेस जैसे बड़े घटक दल राहुल का नेतृत्व स्वीकारने के पक्ष में नजर नहीं आ रहे हैं।
तृणमूल नेता ममता बनर्जी ने  राहुल को बाद की पीढ़ी का नेता बताया। बता दें कि रविवार को कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में राहुल गांधी को पीएम पद का उम्मीदवार बनाने और उनके नेतृत्व में विपक्षी गठबंधन बनाने का फैसला किया गया था। हालांकि ममता के अलावा सपा, बसपा और एनसीपी के प्रमुखों की महत्वाकांक्षा को देखते हुए राहुल की सहज स्वीकार्यता असंभव ही लगती है। 
मिलकर चुनेंगे पीएम उम्मीदवार: तेजस्वी
राजद नेता तेजस्वी यादव ने राहुल गांधी को पीएम पद के लिए एक तरह से नकारते हुए कहा कि गठबंधन दलों में एकमात्र राहुल ही इस पद के उम्मीदवार नहीं हैं। हम सब मिलकर इस पर फैसला करेंगे। इसमें ममता, चंद्रबाबू, शरद पवार और मायावती में से जिस किसी को भी पीएम उम्मीदवार घोषित किया जाता है, वह हमें मंजूर होगा। विपक्षी दल का जो भी नेता संविधान की रक्षा करेगा उन्हें वह प्रधानमंत्री के तौर पर स्वीकार होगा।(एजेंसीज इनपुट के साथ)
















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