कश्मीर समस्या के समाधान के लिए मोदी सरकार लगातार कोशिशों में लगी हुई है। पिछले डेढ़ महीने से घाटी के हालात सामान्य नहीं हैं। कर्फ्यू से लोगों को परेशानी हो रही है। लेकिन हिंसा रोकने के लिए कर्फ्यू का सहारा लेना राज्य सरकार की मजबूरी है। कश्मीर समस्या हमेशा से केंद्र सरकारों के लिए परेशानी का विषय रही है। मगर मोदी सरकार जिस तरह से रणनीति बनाकर आगे बढ़ रही है उस से अलगाववादियों की नींव हिलती दिख रही है। कश्मीर समस्या के समाधान के लिए केंद्र सरकार ने सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल घाटी में भेजा था। इस में सभी दलों के नेता थे। वो नेता भी थे जो अलगाववादियों से बातचीत के पक्षधर हैं। ये प्रतिनिधिमंडल कश्मीर में समस्या का हल खोजने के लिए गया था। इस प्रतिनिधिमंडल के साथ अलगाववादियों ने जिस तरह का व्यवहार किया उस से पीएम मोदी की चाल कामयाब होती दिख रही है। दरअल सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल जब अलगाववादियों से मिलने के लिए पहुंचा तो उन्होने मिलने से इंकार कर दिया। सैयद अली शाह गिलानी, मीरवाइज उमर फारुख जैसे अलगाववादियों ने तो अपने घर का दरवाजा तक नहीं खोला था। अलगाववादियों का प्रतिनिधिमंडल से नहीं मिल...