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GST : अटल बिहारी का सपना, पूरा किया नरेन्द्र मोदी ने

देश के पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी का निधन हो गया है। पत्रकार, लेखक और बोलने में प्रखर अटल बिहारी वाजपेयी का देश के इनडायरेक्‍ट टैक्‍स सिस्टम को बदलने में अहम रोल रहा है। इनडायरेक्ट टैक्स गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) 1 जुलाई 2017 को लागू हुआ, लेकिन इसकी नींव 19 साल पहले तत्‍कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 1999 में रख दी थी। हालांकि, इसे लागू करने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी टीम का बहुत बड़ा हाथ रहा है लेकिन जीएसटी पर पहली रिसर्च अटल बिहारी वाजपेयी के समय में हुआ था। जीएसटी को लाने का सपना उन्हीं के समय में देखा गया था। आइए जानते हैं जीएसटी को लाने के पीछे अटल बिहारी वाजपेयी का क्या अहम रोल रहा है। उनके समय में जीएसटी को लेकर की गई पहली रिसर्च 1999 में जब अटल बिहारी वाजपेयी देश के प्रधानमंत्री थे, उसी दौरान इस पर चर्चा शुरू हो गई थी। उसके बाद साल 2003 में वित्त केन्द्रीय मंत्री जसवंत सिंह की पहल पर केंद्र सरकार को सर्विस टैक्स लगाने का अधिकार देने के लिए संविधान में संशोधन किया गया था। फाइनेंस मिनिस्टर जसवंत सिंह ने अपने सलाहकार और प...

खूबियों के साथ खामियों से भी भरा रहा GST का 1 साल का सफर

पूरे देश को एक बाजार में तब्दील करने वाले ”वन नेशन वन टैक्स” यानी वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को एक साल पूरा होने जा रहा है। जीएसटी ने जहां एक ओर पूरी अप्रत्यक्ष कर प्रणाली को एक प्लेटफॉर्म पर लाने का काम किया, वहीं इसने छोटे दुकानदारों, कारोबारियों और बड़े व्यापारियों को एक ऐसा पारदर्शी प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराया, जिसने उनकी मुश्किलों को कम किया। भारत जैसे बड़े और जटिल टैक्स संरचना वाले देश में ऐसे सुधार की लंबे समय से जरूरत महसूस की जा रही थी, जिसे करीब दो दशकों से अधिक की मशक्कत के बाद 1 जुलाई 2017 को लागू किया गया। हालांकि बीते एक साल में जीएसटी का सफर काफी उतार-चढ़ाव से भरपूर रहा। नए टैक्स सिस्टम को लेकर कई तरह की जटिलताओं का सामना करना पड़ा, जिसकी वजह से इसमें कई सारे बदलाव भी किए गए। टैक्स एक्सपर्ट अंकित गुप्ता के अनुसार, बीते एक साल में जीएसटी का सफर कैसा रहा और इसमें आने वाले समय में क्या कुछ बदलावों की गुंजाइश बनती है। किन क्षेत्रों में खामियों से जूझ रहा है GST? वास्तव में जीएसटी से जुड़ा विभाग अभी तक यह तय नहीं कर पाया है कि किसे कौन सा जीएसटीआर फॉर्म भरना है। पहले यह त...

खत्‍म होना चाहि‍ए 28% GST का स्‍लैब, समान दर से लागू हो सेस : अरविंद सुब्रमण्‍यन

सरकार के मुख्‍य आर्थि‍क सलाहकार अरविंद सुब्रमण्‍यन ने जून 27 को कहा GST को और सहज बनाने के लि‍ए सबसे पहले 28 फीसदी के टैक्‍स स्‍लैब को हटाना होगा और समान दर से सेस लागू करना होगा। उन्‍होंने कहा, 'अभी जीएसटी की दरें 0 फीसदी, 3 फीसदी, 5 फीसदी, 12 फीसदी, 18 फीसदी और 28फीसदी हैं। हमें इन्‍हें तर्कसंगत करना होगा, मगर मेरा मानना है कि‍ सबसे पहले 28 फीसदी वाली दर को खत्‍म करना होगा।' अरविंद ने यह बात इंडि‍यन एक्‍सप्रेस के आइडि‍या एक्‍सचेंज प्रोग्राम में कही।  सेस में कई तरह के रेट ना हों  अरविंद से जब यह पूछा गया कि क्‍या सभी प्रकार के सेस को खत्‍म कर देना चाहि‍ए तो उन्‍होंने कहा कि मैं कह रहा हूं कि एक आदर्श सि‍स्‍टम के लि‍ए 28 फीसदी के स्‍लैब को जाना होगा। सेस बरकरार रह सकता है क्‍योंकि कुछ प्रोडक्‍ट पर ज्‍यादा रेट रखना होगा मगर तब भी कई तरह के रेट नहीं होने चाहि‍ए। अपनी रि‍पोर्ट में हमने एक 18 फीसदी और दूसरा 40 फीसदी रेट रखा था। सेस दरअसल 40 फीसदी के रेट को लागू करने का एक अन्‍य तरीका है।  बड़े स्‍तर पर हो रही GST की चोरी इस बीच GST, इंटेलिजे...

‘मन की बात’ में PM मोदी ने राज्यों को दिया GST की सफलता का क्रेडिट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के जरिए आज एक बार फिर देशवासियों से अपने विचार साझा किए.  कार्यक्रम की 45वीं कड़ी में पीएम मोदी ने भारत-अफगानिस्तान के बीच हुए ऐतिहासिक टेस्ट मैच को याद किया. साथ ही उन्होंने जीएसटी को सफल बताते हुए इसका क्रेडिट राज्यों को दिया. पीएम मोदी ने जीएसटी की पहली सालगिरह आने से पहले इसकी सफलता का क्रेडिट राज्यों को दिया. उन्होंने कहा कि ‘वन नेशन वन टैक्स’ देश के लोगों का सपना था, जो अब हकीकत में बदल चुका है. पीएम ने कहा कि जीएसटी की सफलता के लिए राज्यों ने मिलकर काम किया और इसे सफल बनाया. उन्होंने जीएसटी ईमानदारी की जीत करार दिया. ‘मन की बात’ की शुरुआत में बेंगलुरु में हुए भारत-अफगानिस्तान टेस्ट मैच का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने अफगानी स्टार बॉलर राशिद खान के खेल को सराहा. साथ ही उन्होंने कहा कि यह मैच यादगार रहेगा. पीएम मोदी ने कहा, ‘मुझे यह मैच इसलिए याद रहेगा क्योंकि भारतीय टीम ने ट्रॉफी लेते समय अफगानिस्तान की टीम को आमंत्रित किया और दोनों टीमों ने साथ में फोटो लिए.’  योग ने दुनिया को एकजुट किया पीएम मो...

मोदी सरकार ने डूब चुके 83000 करोड़ रु और वसूले

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार  अक्सर मोदी पर विपक्ष फेंकू, जुमलेबाज आदि अनेकों से अलंकृत करते रहते हैं, लेकिन मोदी द्वारा किए देशहित में कार्यों को सार्वजनिक होने में बाधक बन रहे हैं। जिनसे वह स्वयं भलीभांति परिचित भी हैं। हर आदमी दूध का धुला नहीं होता, कमियां होती हैं, परन्तु इसका मतलब यह नहीं कि गुणों को नज़रअंदाज़ कर अवगुणों को उछाल जनता को भ्रमित किया जाये। लोक सभा और राज्य सभा चलने में अवरोध करते हो, ताकि सरकार काम न कर सके और हम उसका लाभ उठाकर जनता में सरकार के विरुद्ध माहौल बनाने में सफल हो सके। स्वयं किस तरह जनता के धन पर मालपुए खाते रहे और अब मालपुए खाने की राल उनको विचलित कर रही हैं।  मोदी आलोचना में कोई बुराई नहीं है लेकिन आलोचना के दोहरे मापदंड अपनाना ठीक नहीं है!  अगर नोटबंदी में ATM की लाइनों में लग कर लोग मर गये थे जिनके लिए आम तौर पर मोदी और नोटबंदी पर सवाल खड़े किए जाते हैं, तो एक बात समझ में आज तक नहीं आई कि जब पूरा देश राशन की लम्बी लम्बी लाइनों में लगता था, गैस cylinder लेने के लिये लम्बी- लम्बी लाइनों में लगता था, पिक्चर हॉल की टिकट लेने के लिये लम...

‘नोटबंदी और जीएसटी’ की मार से अर्थव्‍यवस्‍था की चाल हुई धीमी

क्रेडिट रेटिंग एजेंसी फिच ने अप्रैल 27 को भारत की दीर्घकालिक विदेशी मुद्रा जारीकर्ता डिफाल्ट रेटिंग (आईडीआर) को बीबीबी- (माइनस) कर दिया है, जबकि दृष्टिकोण को स्थिर रखा है. फिच ने देश को बीबीबी – रेटिंग 11 साल पहले दी थी. रेटिंग एजेंसी फिच ने अनुमान लगाया है कि वित्तीय साल 2018-19 में देश की जीडीपी का रेट 7.3 फीसदी रहेगी, जबकि वित्तवर्ष 2019-20 में यह बढ़कर 7.5 फीसदी हो जाएगी. रेटिंग एजेंसी ने मौजूदा अर्थव्यवस्था की रफ्तार में आई गिरावट की मुख्य वजह नवंबर 2016 में नोटबंदी और जुलाई 2017 में लागू जीएसटी को बताया है. अगले वित्तवर्ष जीडीपी रेट में कुछ सुधार होने का अनुमान जताया है. बता दें कि फिच ने देश को बीबीबी – रेटिंग 11 साल पहले दी थी. बता दें कि फिच ने यह कदम तब उठाया है, जबकि मूडीज ने 14 साल बाद देश की रेटिंग को बेहतर किया है. हालांकि, एसएंडपी ने भी भारत की स्वायत्त रेटिंग को बरकरार रखा था. कारोबार में सुधार पर अब कठिनाइयां अभी भी फिच ने कहा है कि भारत की स्वायत्त साख को इस दर्जे में इस लिए रखा गया है , क्योंकि एक तरफ जहां देश की मध्यकालिक आर्थिक वृद्धि का परिदृश्य मजबूत है औ...

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To write on general topics and specially on films;THE BLOGS ARE DEDICATED TO MY PARENTS:SHRI M.B.L.NIGAM(January 7,1917-March 17,2005) and SMT.SHANNO DEVI NIGAM(November 23,1922-January24,1983)