आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार विपक्षी एकता की राह में एक बड़ी बाधा प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी भी है।कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी प्रधानमंत्री पद दावेदार हैं, लेकिन जो अन्य विपक्षी दल हैं, उनके इरादे कुछ और हैं। दरअसल, विपक्ष में ऐसे कई नेता हैं, जो इस पद की महत्वाकांक्षा रखते हैं। इसलिए अभी तक किसी ने भी राहुल गांधी के नाम पर अपनी सहमति नहीं दिखाई है। जबकि इसके उलट दक्षिण भारत के दो नेताओं के चंद्रशेखर राव और चंद्रबाबू नायडू ने तीसरे मोर्चे की बात कह दी है। हालांकि बंगलुरू में कांग्रेस-जनता दल (एस) सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में देश के लगभग सभी विपक्षी दलों के नेता स्टेज पर मौजूद थे, लेकिन उनकी मौजूदगी भाजपा के खिलाफ विपक्षी एकता की ज़मानत नहीं दे सकती. कर्नाटक विधान सभा और देश के अन्य हिस्सों से आये हालिया उपचुनावों के नतीजों के बाद देश में विपक्षी एकता और गठबंधन की क़वायद तेज़ हो गई है। कर्नाटक में त्रिशंकु विधान सभा ने कांग्रेस और जनता दल (एस) को एक साथ आने पर मजबूर कर दिया, वहीं उत्तर प्रदेश के कैराना लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस-सपा-बसपा समर्थ...