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उत्तर प्रदेश में गठबन्धन बिखराने का श्रीगणेश

लोकसभा चुनाव 2019 में मतदान तिथि से पूर्व ही उत्तर प्रदेश में महागठबन्धन बिखराओ की शुरुआत होने का शंखनाद हो चूका है। जो मोदी लहर का स्पष्ट संकेत दे रहा हैं। अपना वर्चस्व बनाए रखने के लिए छोटी-छोटी पार्टियाँ गठबन्धन से बाहर निकल मुख्य पार्टी भाजपा की शरण में जा रही हैं। समाजवादी पार्टी को समर्थन देने वाली निषाद पार्टी अब गठबंधन से अलग हो गई है, र्और पार्टी ने चुनाव लड़ने का दावा किया है ।  इसके बाद निषाद पार्टी के नेताओं ने लखनऊ में मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ से मुलाकात की ।  निषाद पार्टी के अध्‍यक्ष संजय निषाद लखनऊ में भाजपा दफ्तर पहुंचे ।  इसके साथ ही तय हो गया कि अब निषाद पार्टी सपा के साथ चुनाव नहीं लड़ेगी. संभवत: अब उसका बीजेपी के साथ समन्‍वय हो सकता है । पार्टी के अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद ने मार्च 29 को घोषणा की है कि वह गठबंधन के साथ नहीं हैं ।  उन्होंने कहा कि वह स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ सकते हैं और अन्य विकल्प की भी तलाश कर सकते हैं ।  संजय निषाद ने कहा, "सपा मुखिया अखिलेश यादव ने कहा था कि वह हमारी पार्टी के लिए सीटों की घोषणा करेंगे, लेकिन उन्हो...

क्या महागठबंधन संभव है?

सबसे पहले बात देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की, जहां लोक सभा की 80 सीटें हैं. पिछले लोक सभा चुनाव में भाजपा की भारी जीत में इस राज्य का बड़ा हाथ था. यहां उसे लोक सभा की 71 सीटें मिली थीं. वहीं विपक्ष केवल सात सीटों पर सिमट गया था. लेकिन जिस विपक्षी एकता की बात की जा रही है, उसके लिए ये आंकड़े कुछ और नतीजे पेश करते हैं. दरअसल, यहां भाजपा को कुल 42.30 प्रतिशत वोट मिले थे और उसके सहयोगी अपना दल को 1 प्रतिशत. वहीं सपा को 22.20 प्रतिशत, बसपा को 19.60 प्रतिशत और कांग्रेस को 7.50 प्रतिशत वोट मिले थे. यदि कांग्रेस-सपा-बसपा के वोटों को मिला लिया जाए तो ये 49.3 प्रतिशत हो जाता है. इस समीकरण को देखने के बाद बताने की को आवश्यकता नहीं है कि यदि यह गठबंधन हो जाता है तो उसके नतीजे क्या होंगे. दूसरे, यह कि सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस को क्षेत्रीय पार्टियों के आंगन में बैठना पर रहा है। जो सिद्ध करता है कि वास्तव में आज कांग्रेस आधारहीन हो चुकी है। दूसरे शब्दों में यह भी कहा जा सकता है कि क्षेत्रीय पार्टियों और कांग्रेस में कोई अंतर नहीं रह गया है, यानि बरसाती मेंढक। बहरहाल, राज्य में हर व...

ईसाई मिशनरियों के इशारे पर काम करते हैं सोनिया और राहुल गांधी

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार  जस्टिस लोया की मौत  को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद  बलिया   से  बीजेपी सांसद भरत सिंह  ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी को लेकर कहा कि दोनों ईसाई मिशनरियों के इशारे पर काम करते हैं। भरत सिंह ने कहा कि कांग्रेस के पीछे ईसाई मिशनरियों का अदृश्य हाथ है, जिसके इशारे पर पार्टी और इसके नेता काम करते हैं. कांग्रेस पार्टी का स्लोगन 'कांग्रेस का हाथ आम आदमी के साथ' आपने जरूर सुना होगा, लेकिन कांग्रेस पर किसका हाथ है ये आपको नहीं मालूम होगा। भरत सिंह ने कहा कि ईसाई मिशनरियों से देश को खतरा है।  अक्सर सोनिया गाँधी परिवार पर हिन्दू विरोधी आरोप लगते रहे हैं, लेकिन उन्हें खंडित करने का साहस नहीं हुआ। परन्तु छद्दम धर्म-निरपेक्ष सत्ता के लालच में हिन्दुओं को विभाजित करने में, इस परिवार के प्रति सहानुभूति रख,अपना समर्थन देते नहीं, बल्कि अब तक दे रहे हैं। भूतपूर्व महामहिम प्रणव मुख़र्जी द्वारा अपनी पुस्तक में सोनिया गाँधी के हिन्दू विरोधी होने का खुलासा करने उपरान्त भी न किसी छद्दम धर्म-निरपेक्ष की आँख खुली और न ही जनता क...

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