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मकर संक्रान्ति से पहले क्यों मनाते हैं लोहड़ी का पर्व

मकर संक्रान्ति की पूर्वसंध्या पर लोहड़ी का पर्व मनाया जाता है। इस अवसर पर रात में खुले स्थान में परिवार और आस पड़ोस के लोगों के साथ मिलकर आग के किनारे घेरा बना कर पूजा की जाती है। लोहड़ी पौष के अंतिम दिन, सूर्यास्त के बाद माघ संक्रांति से पहली रात को होती है। लोहड़ी मुख्यत: पंजाब का पर्व है। ऐसा लगता है कि इसके प्रत्‍येक शब्द को लोहड़ी की पूजा के समय प्रयोग होने वाली वस्तुओं से लिया गया है, जैसे ल लकड़ी से ओह गोहा मतलब सूखे उपले और ड़ी रेवड़ी से लेकर बन गया लोहड़ी। ऐसा माना जाता है कि श्वतुर्यज्ञ का अनुष्ठान मकर संक्रांति पर होता था, संभवत: लोहड़ी उसी का अवशेष है। पूस-माघ की कड़कड़ाती सर्दी से बचने के लिए आग सहायक होती है और यही व्यावहारिक आवश्यकता ‘लोहड़ी’ को मौसमी पर्व का स्थान देती है। ऐसे होती है पूजा इस दिन पूजा करने के लिए लकड़ियों के नीचे गोबर से बनी लोहड़ी की प्रतिमा रखी जाती है। जिसमें गटनि प्रज्‍जवलित करके भरपूर फसल और समृद्धि के लिए उसकी पूजा होती है। इस आग की सभी परिक्रमा करते हैं जिसके दौरान लोग तिल, मक्‍का और गेहूं जैसे अनाज डालते हैं। लोहड़ी पर पूजा के बाद गजक, गुड़...

भारत से बाहर अन्य देशों में हिन्दुओं का वर्चस्व

आर.बी.एल.निगम,वरिष्ठ पत्रकार  हिन्दू धर्म दुनिया के सबसे बड़े धर्मों में से एक हैं जिसके अनुयायी अरबों में हैं. जनसंख्या के हिसाब से हिन्दू दुनिया में तीसरे नंबर पर हैं, जबकि पहले नंबर पर ईसाई और दूसरे नंबर पर मुस्लिम हैं. कई लोगों के मन में यह प्रश्न होता है कि, वे कौन-कौन से देश हैं जहाँ हिन्दू आबादी बड़ी संख्या में निवास करती है. नेपाल और भारत के हिन्दुओं के बारे में में तो सभी जानते हैं पर हम आपको उन चुनिन्दा देशों के बारे में बता रहे हैं जहाँ हिन्दू आबादी बड़ी संख्या में निवास करती है. इनमें से कई देश तो ऐसे भी हैं जो पहले हिन्दू देश हुआ करते थे लेकिन समय के साथ वे बदलते गये और अब वहां अन्य धर्म के लोगों की आबादी बहुसंख्यक हो गयी है. फिजी फिजी एक द्वीपीय देश है जो आस्ट्रेलिया महाद्वीप में बसा हुआ है. इस देश में बड़ी मात्रा में हिन्दू रहते हैं. फिजी में सबसे बड़ी आबादी ईसाईयों की है उसके बाद हिन्दुओं का की जनसंख्या है. मारीशस मारीशस अफ्रीका महाद्वीप में हिन्द महासागर में बसा हुआ एक खूबसूरत देश है. इस देश में हिन्दुओ की एक बड़ी आबादी निवास करती हैं जहाँ ज्याद...

यदि मोहम्मद पर कोई ऐसी टिप्पणी करता तो देश में दंगा हो गया होता।

आखिर किस हद तक गिर गए हैं देश में कुछ लोग? इतनी नीचता और नपुंसकता की सभी सीमाएं लांघ गए हैं लोग? कुछ लोगों के लिए तो यह कोई मायने नहीं रखता है, लेकिन अब जो बात हम आपको बताने जा रहे हैं वो सच में आपका खून खौला देगी अगर आप असल हिन्दू और एक बाप की औलाद हो तो। ऐसी अभद्र भाषा इसलिए बोलने का साहस कर पाते हैं, ऐसे लोग क्योकि ऐसी प्रवित्ति के लोग भलीभांति जानते हैं, पतली दाल खाने वाला बोलेगा क्या? जो अपने ही देश में अपने प्रभु श्रीराम का मन्दिर बनवाने के लिए न्यायालय का मुँह ताकते हैं। इन्हे तम्बू में बैठाकर स्वयं वातानुकूलित भवनों में रहते हैं, क्या बोलेगा हिन्दू? अगर बोला साम्प्रदायिक घोषित कर दिया जाएगा। इस सन्दर्भ में एक जैन मुनि का प्रवचन प्रस्तुत है: https://www.facebook.com/aslikattarhindu/videos/512682209096354/ सुनिए और शर्म करिए। आखिर सहनशीलता की भी एक सीमा होती है। कुछ समय पूर्व समाजवादी पार्टी के नेता आज़म खान ने भारत माता को डायन बोला, क्या हुआ? यदि किसी मुस्लिम देश में रहते, उस देश के विरुद्ध ऐसा बोला होता, आज़म खान आजतक जेल में होता। एक हम है, जो वोट देकर ऐसे लोगों को शै देत...

प्राचीन अरब कभी हिंदू संस्कृति का अभिन्न अंग था।

गुंजन अग्रवाल :   इस्तांबुल, तुर्की के प्रसिद्ध राजकीय पुस्तकालय ‘मक्तब-ए-सुल्तानिया’ (सम्प्रति मक्तब-ए-ज़म्हूरिया), जो प्राचीन पश्चिम एशियाई-साहित्य के विशाल भण्डार के लिए प्रसिद्ध है, के अरबी विभाग में प्राचीन अरबी-कविताओं का संग्रह ‘शायर-उल्-ओकुल’ हस्तलिखित ग्रन्थ के रूप में सुरक्षित है। इस ग्रन्थ का संकलन एवं संपादन बग़दाद के ख़लीफ़ा हारून-अल्-रशीद के दरबारी एवं सुप्रसिद्ध अरबी-कवि अबू-अमीर अब्दुल अस्मई ने किया था, जिसे ‘अरबी-काव्य-साहित्य का कालिदास’ कहा जाता है। लेखक  सन् 1792 ई. में तुर्की के प्रसिद्ध शासक सलीम-III (1789-1807) ने अत्यन्त यत्नपूर्वक किसी प्राचीन प्रति के आधार पर इसे लिखवाया था। इस दुर्लभ हस्तलिखित ग्रन्थ के पृष्ठ लेखनयोग्य कच्ची रेशम की एक कि़स्म ‘हरीर’ के बने हैं, जिसके कारण यह सर्वाधिक मूल्यवान पुस्तकों में से एक है। इस ग्रन्थ के प्रत्येक पृष्ठ को सुनहले सजावटी किनारी (बॉर्डर) से सुसज्जित किया गया है। जावा एवं अन्य स्थानों पर पाई गई अनेक प्राचीन संस्कृत-पाण्डुलिपियाँ ऐसे ही सुनहली किनारी से सुसज्जित हैं। इस महान् ग्रन्थ का प्रथम अंग्रे़ज़ी...

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To write on general topics and specially on films;THE BLOGS ARE DEDICATED TO MY PARENTS:SHRI M.B.L.NIGAM(January 7,1917-March 17,2005) and SMT.SHANNO DEVI NIGAM(November 23,1922-January24,1983)