चुनाव 2019 : ओडिशा में कांग्रेस के पास अलग राज्य का मुद्दा, लेकिन वहां चर्चा यह कि मोदी पुरी से लड़ेंगे या नहीं
लोकसभा सीटों की संख्या के हिसाब से देश के 11वें राज्य ओडिशा में फिलहाल किसानों की हालत, गरीबी और पिछड़ापन सबसे बड़े मुद्दे हैं। सत्ताधारी बीजद के खिलाफ पार्टियां इसे भुनाने में जुटी हैं। लेकिन, अटकलें हैं कि भाजपा यहां पुरी सीट से मोदी के नाम का ऐलान कर मतदाताओं को ध्रुवीकरण की बड़ी वजह दे सकती है। दावा है कि इसका असर भगवान जगन्नाथ के अनुयायियों वाली दूसरे राज्यों की सीटों पर भी पड़ेगा। ओडिशा में करीब दो दशक से सत्ता का सुख भोग रहे बीजू जनता दल (बीजद) को पांचवीं बार भी यहां सरकार बना लेने का भरोसा है। ओडिशा में लोकसभा-विधानसभा चुनाव साथ हो रहे हैं, इसलिए पार्टी का यह भी दावा है कि अधिकांश लोकसभा सीटें उसी के पास होंगी। पिछली बार पार्टी के पास 21 में से 20 सीटें थीं। मगर राज्य की जनता बीजद के इन दावों से इत्तेफाक नहीं रखती। पुरी में एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करने वाले दीपक कुमार मिश्रा कहते हैं कि पर्यटन के मामले में समृद्ध इस राज्य में अभी भी गरीबी हावी है। बीजद सरकार ने बेहतर काम जरूर किए हैं, लेकिन ये काफी नहीं। वहीं भुवनेश्वर के छात्र दीपक बेहरा का मानना है कि राज्य सरकार...