लोकसभा चुनाव घोषित होने से पूर्व बसपा और समाजवादी कहीं साइकिल तो कहीं हाथी पर सवार होकर भाजपा को शिकस्त देने गठबंधन का ढोल पिट रहे थे, लेकिन जैसे-जैसे चुनाव तारीख पास आती जा रही है, गठबन्धन का रायता फैलना शुरू हो चूका है। हर अवसरवादी "जहाँ दिखे तवा-परात, वहीँ बिता सारी रात" नीति अपना रहे हैं। जो इस बात की भी पुष्टि करता है कि हवा का रुख किधर जा रहा है, वरना यूँ ही कोई अवसरवादी भारी होते पलड़े की तरफ नहीं भागता। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के समाजवादी पार्टी (सपा) के एक दिग्गज नेता मार्च 30 को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होंगे। जानकारी के अनुसार, सपा एमएलसी वीरेन्द्र सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष महेन्द्र नाथ पाण्डेय की उपस्थिति में भाजपा का दामन थामेंगे। पहले निषाद समुदाय और अब गुर्जर समुदाय गठबंधन से अलग हो रहे हैं, देखिए, मतदान होते-होते पता नहीं और कितने अवसरवादी पाला बदलते हैं। अब समय आ गया है कि जनता भी ऐसे अवसरवादियों को सबक सिखाये क्योकि गिरगिट की तरह रंग बदलने वाले नेता विश्वास योग्य नहीं होते। चाहे जितने भी जनह...