नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री मनोनीत होने से पूर्व से एक पाक्षिक को सम्पादित करते लिखा था कि "इस आदमी के दिमाग को समझना आसान नहीं है। इस व्यक्ति में पत्तों से खेलने की आदत नहीं। यह आदमी जड़ को पकड़ता है। अगस्त 7 को हैदराबाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक रैली में खुलकर कहा कि “दलितों का ठेका लेकर बैठे कुछ लोग उन पर अत्याचार करवाकर इश्यू क्रिएट कर रहे हैं। अगर उन्हें हमला करना है तो मुझ पर करें।” मोदी के इस कथन की आलोचना भी हो रही है। मीडिया भी खूब तूल दे रही है। मोदी विरोधी और मीडिया ने इतना भी समझने का साहस नहीं किया कि आखिर क्या कारण है कि मोदी इतने समय उपरांत सार्वजनिक रूप से इतनी बड़ी बात बोल रहे हैं। जबकि मोदी ने इस बात को बोल एक तीर से तीन निशाने खेले हैं। लेकिन खोजी पत्रकार फिर कहीं लुप्त हो गए। पता नहीं किसकी गोदी में बैठ हलुआ-पूरी का आनंद ले रहे हैं? गोधरा कांड को आज तक मोदी विरोधी उछालते रहते हैं ,लेकिन कोई यह बताने का साहस नहीं करता कि इस कांड में गिरफ्तार एवं सजायाफ्ता कौन लोग है; उनकी क्या पृष्ठभूमि है ?उछालते इस लिए हैं कि तत्कालीन गुजरात ...