महादेवी वाराणसी गई
थीं, रैली करने । कांग्रेसी चमचों की फौज उमड़ी । महादेवी प्रसन्न हुईं
भीतर इतनी प्रसन्नता भर गई कि तबीयत जवाब दे गई । महादेवी बीमार पड़ गईं,
लेकिन बीमार इसलिए पड़ीं कि बनारस की धूप ने निचोड़ लिया । इधर दिल्ली का
बंदर दिन भर चीं ची करता रहता है, खों खो करके आजतक इसने कोई सकारात्मक बात
नहीं की लेकिन ध्यान लगाने धर्मशाला पहुंच गया । "'मन चंगा तो कठौती में
गंगा'', तू क्या करेगा धर्मशाला और अमरनाथ जाकर ? तू तो अपनी कुंठा की
कंदरा में ही घुट-घुट कर मरने के लिए पैदा हुआ हैा। दिन भर भौंकने के बाद
कभी कर्नाटक जाएगा इलाज कराने, कभी धर्मशाला में विपश्यना का सहारा लेगा ।
अरे जरा देख उस मर्द को, उसके पुरुषार्थ को, उसकी जिजीविषा को, उसके
धर्मार्थ को, जिसने सत्ता संभालने के पहले से लेकर अब तक छुट्टी नाम के
किसी मेहमान को अपने विचारों के घर में दाखिल नहीं होने दिया । कठोर धूप,
बारिश और मौसम की सताइश में खड़ा रहा । विदेश यात्राएं कीं, घंटों की
यात्रा के बाद सीधे दफ्तर पहुंचे मोदी. बैठक की । कभी सुना है कि
खांसी,सरदी, बुखार, बदन दर्द, सीने में जलन की कोई शिकायत हुई है उस आदमी
को । ऐसा नहीं है कि वो इंसान थकता नहीं लेकिन देश के लिए जागता रहता है ।
मोदी का अंतर वज्र कठोर है, जिसमें देश को बदलने का दीया जलता है । संघ के
बताए रास्ते पर चलकर खुद को तपाया है उस इंसान ने । तेरे जैसे स्वार्थी,
मौकापरस्त, वोट बैंक के लुटेरे और सांप्रदायिक कहां से उसकी बराबरी करेंगे ।
तू सौ जनम ले ले लेकिन मोदी नहीं बन सकता । मोदी इकलौते हैं । इस देश को
मोदी जरूरत है, तुझ जैसे भेड़िये और लकड़बग्घों की नहीं । वो पुरुष है,
उसका पुरुषार्थ बोलता है । तेरे जैसे भांडों और लफंगों की पार्टी दिन भर
चिल्ला कर और अनर्गल प्रलाप कर उसे मलिन करने निकली है । तू चिल्ला, जितना
हो सके उतना चिल्ला, वो आदमी ऊपर उठेगा । भारत का बेटा है नरेन्द्र मोदी,
बीमार उसी दिन पड़ेगा, जिस दिन देश को स्वस्थ होने की राह पर अग्रसर होता
देखा लेगा । और इस बात को भी याद रख कि तुम जैसों से कई गुणा अधिक दरिद्रता
में उसने अपना बचपन काटा है और अब तुम जैसों से कई गुणा ज्यादा ऐश्वर्य
में बुजुर्गियत काट रहा है लेकिन सुविधा भोगकर निकल जाना उसकी फितरत नहीं
है । वो भारत मां का लाल है, तुझ जैसा गिरगिट नहीं । अब तू मुझे मोदी का
परम भक्त कहेगा तो भी कुछ फर्क नहीं पड़ता अगर तू सोनिया और दिल्ली के बंदर
का भक्त हो सकता है तो मैं मोदी का भक्त क्यों नहीं हो सकता । मेरे पास तो
लोकतांत्रिक, नैतिक सारे अधिकार हैं ।:
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