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जम्मू-कश्मीर: अनुच्छेद 35-ए को लेकर अलगाववादियों के बंद के चलते 2 दिन के लिए रद्द हुई अमरनाथ यात्रा

जम्मू कश्मीर को विशेष शक्तियां देने वाली अनुच्छेद 35-ए में किसी तरह के बदलाव के खिलाफ अलगाववादियों के बंद को देखते हुए प्रशासन ने अगस्त 5 से अमरनाथ यात्रा दो दिन के लिए रद्द करने का फैसला किया है। पुलिस के अनुसार, यहां भगवती नगर यात्री निवास से किसी तीर्थयात्री को आगे जाने नहीं दिया गया ।   वहीं उधमपुर और रामबन में विशेष जांच चौकियां स्थापित की गई है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि तीर्थयात्रियों का जत्था जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग पर नहीं पहुंचे जो इन दोनों जिलों से गुजरता है। हालांकि, अधिकारियों ने कहा कि घाटी में बालटाल और पहलगाम आधार शिविरों में मौजूद यात्री यात्रा को जारी रखेंगे ।   28 जून को सालाना अमरनाथ की धार्मिक यात्रा शुरू होने के बाद से अब तक 2.71 लाख से ज्यादा श्रद्धालु पवित्र गुफा में स्थित शिवलिंग के दर्शन कर चुके हैं। इस यात्रा का समापन 26 अगस्त को होगा, उस दिन श्रावण पूर्णिमा भी हैं ।   जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 35A को रद्द करने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट में अगस्त 6 को सुनवाई होनी है। इसे देखते हुए अलगाववादि...

मारे गए आईएसजेके आतंकियों के निशाने पर थी अमरनाथ यात्रा?

जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में जून 22 को मारे गए 4 आतंकवादियों के निशाने पर 28 जून से शुरू हो रही अमरनाथ यात्रा भी थी। मारे गए आतंकियों का रिश्ता इस्लामिक स्टेट जम्मू ऐंड कश्मीर (आईएसजेके) से था। मारे गए आतंकियों में आईएसजेके का चीफ दाऊद अहमद सोफी भी शामिल है। खबरों के मुताबिक इस बात की आशंका थी कि इन आतंकियों ने अमरनाथ यात्रा में हमले की योजना बनाई हो क्योंकि इन्हें तीर्थयात्रा के मार्ग में पड़ने वाले खिर्रम गांव में छिपाया गया था। दरअसल, आईएसजेके तहरीक-उल-मुजाहिदीन का पुनर्निर्मित रूप है। सूत्रों की मानें तो यह 90 के दशक से शुरुआती दिनों से घाटी में ऐक्टिव था लेकिन बाद कई वर्षों तक यह निष्क्रिय भी पड़ा रहा। जम्मू-कश्मीर के डीजीपी एसपी वैद्य का दावा है कि आईएसजेके के केवल 8-10 सक्रिय आतंकी हैं, जिसमें 6 को मार दिया गया है।  आईएस का खौफनाक मॉडल, आईएसजेके की कोशिश  आईएसजेके इस्लामिक स्टेट द्वारा बताए मॉडल को अपनाते हुए पूरे विश्व में उसके द्वारा तैयार किया गया जिहाद कायम करना चाहता है। गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा,...

अमरनाथ यात्रा पर हमले का षड्यंत्र

आतंकी हमले कांग्रेस सरकारों में भी होते थे और आतंकी हमले बीजेपी सरकारों में भी हो रहे हैं, फर्क सिर्फ इतना है कि कांग्रेस के समय में आतंकी हमले सरकार को डराने के लिए किये जाते थे। जबकि मोदी सरकार में आतंकी हमले मोदी सरकार को उखाड़ने और कांग्रेस को फिर से वापस लाने के लिए किये जा रहे हैं। आतंकी लोग कांग्रेस को इसलिए वापस लाना चाहते हैं क्योंकि कांग्रेस सरकार में उन्हें बॉर्डर पार कर कश्मीर आने में छूट मिल जाती है, जिहाद करने की छूट मिलती है, कश्मीर में आतंकी कैम्प चलाने की छूट मिलती हैं, आतंकियों को भर्ती करने की छूट मिलती हैं, आतंकी फंडिंग को कोई रोकने वाला नहीं होता।  आतंकियों को पता है कि जब कांग्रेस सरकार होती है तो भारतीय सैनिकों के हाथ बाँध दिए जाते हैं, कांग्रेस सरकार में आतंकी भारत में कहीं भी आ जा सकते हैं, दिल्ली, मुंबई, कलकत्ता, जयपुर, वे कहीं भी बम धमाके कर सकते हैं और उन्होंने करके दिखाया है। लेकिन मोदी सरकार में आतंकियों को बॉर्डर पर ही मार दिया जा रहा है, वे ना तो दिल्ली में धमाके कर पा रहे हैं, ना मुंबई में धमाके कर पा रहे हैं, ना 26-11 जैसा ...

सलीम खान को :हीरो" बताने पर मुख़्तार नकवी को लगी फटकार

कश्मीर में श्रीअमरनाथ यात्रा पर हमला और बंगाल की सेक्यूलर हिंसा उन विकृत नीतियों का ही परिणाम है, जिन्हें सेक्यूलर गत 70 बरसों से सेक्यूलरवाद के नाम पर देश में परोस रहे हैं। इसी विकृति ने कश्मीर, केरल के कई क्षेत्र और अब बंगाल को भयावह स्थिति में धकेल दिया है। जब तक सेक्यूलरिज्म के नाम पर जेहादी और कट्टरवादी मानसिकता को प्रोत्साहन मिलता रहेगा, जब तक यह सच स्वीकार नहीं किया जाएगा कि इस आतंकवाद की जड़ ‘रेडिकल इस्लाम’ है, तब तक नये-नये कश्मीर और प. बंगाल बनते रहेंगे। अमरनाथ यात्रियों पर हमले के बाद मीडिया ने धर्म देखकर सलीम को हीरो बनाने में देरी नहीं की क्योंकि भारत का मीडिया धर्म देखकर ख़बरें बनाता है, जैसे ही मीडिया ने देखा कि बस को सलीम चला रहा था वैसे ही ख़बरें बनायी जाने लगीं, किसी ने कहा कि सलीम ने हिन्दुओं को बचाया, किसी ने कहा - सलीम हिन्दुओं का रखवाला बन गया और 50 हिन्दुओं की जान बचा ली, किसी ने कहा कि सलीम अल्लाह के द्वारा भेजा गया था। मतलब बिना जांच पड़ताल किये मीडिया ने सलीम को हीरो बना दिया। अवलोकन करिये :-- http://nigamrajendra28.blogspot.in/2017/07/blog-post_90.html...

अमरनाथ हमला : क्या ड्राइवर सलीम साज़िश में शामिल था?

कश्मीर में श्रीअमरनाथ यात्रा पर हमला और बंगाल की सेक्यूलर हिंसा उन विकृत नीतियों का ही परिणाम है, जिन्हें सेक्यूलर गत 70 बरसों से सेक्यूलरवाद के नाम पर देश में परोस रहे हैं। इसी विकृति ने कश्मीर, केरल के कई क्षेत्र और अब प0 बंगान को भयावह स्थिति में धकेल दिया है। जब तक सेक्यूलरिज्म के नाम पर जेहादी और कट्टरवादी मानसिकता को प्रोत्साहन मिलता रहेगा, जब तक यह सच स्वीकार नहीं किया जाएगा कि इस आतंकवाद की जड़ ‘रेडिकल इस्लाम’ है, तब तक नये-नये कश्मीर और प0 बंगाल बनते रहेंगे। अमरनाथ यात्रा के दौरान हमले का  शिकार हुई बस के ड्राइवर की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जांच एजेंसियों ने अब तक बस ड्राइवर सलीम को क्लीनचिट नहीं दी है। उससे पहले ही जम्मू कश्मीर की सीएम महबूबा मुफ्ती ने उसे इनाम देने और मीडिया ने उसे हीरो बनाने की शुरुआत कर दी है। न्यू इंडियन एक्सप्रेस अखबार ने एक उच्च सुरक्षा अधिकारी के हवाले से खबर दी है कि ड्राइवर की लापरवाही सीधे तौर पर सामने आई है। अखबार ने बताया है कि यह बस अमरनाथ श्राइन बोर्ड से रजिस्टर्ड नहीं थी और न ही इसमें वो जरूरी सुरक्षा जानकारियां दी गई थीं जो...

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