आज राहुल गाँधी से लेकर सारा INDI गठबंधन मोदी सरकार पर लोकतंत्र ख़त्म और संविधान को बदलने की बातें कर जनता को गुमराह करती रहती है। लेकिन भूल जाती है कि जवाहरलाल नेहरू से लेकर युपीए मनमोहन सिंह तक कितनी बार लोकतंत्र और संविधान की कितनी बार हत्या की गयी। किस्सा कुर्सी का, रोटी कपडा और मकान, आंधी और कई फिल्मों को कांग्रेस के राज में प्रदर्शित होने से रोक दिया था। इतना ही आपातकाल में संजय गाँधी के कार्यक्रम में गायक किशोर कुमार द्वारा गाने से मना करने पर रेडियो पर इनके गानों के प्रसारण पर रोक लगा दी गयी थी। फिर भी फिल्म जगत में कुछ चाटुकार कांग्रेस की गुलामी करते नज़र आते हैं। मशहूर गीतकार और शायर मजरूह सुल्तानपुरी को जवाहरलाल नेहरू ने मात्र एक कविता उनके उपर गाने पर उन्हें दो साल के लिए मुंबई की आर्थर रोड जेल में कैद करवा दिया था। आज जो गुलाम कांग्रेसी अभिव्यक्ति की आजादी का रोना रोते फिरते हैं वो कभी इतिहास के पन्नों में दर्ज इस काली कहानी की बात नहीं करेंगे... हिंदुस्तान की आजादी के कुछ समय बाद की बात है। बंबई में मजदूरों की एक हड़ताल में मज...