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जम्मू: आर्मी कैंप पर आतंकी हमला, तीन घायल, ऑपरेशन जारी

आतंकियों ने फिर एक बार नापाक हरकत करते हुए सेना को निशाना बनाया है. आतंकियों ने जम्मू में एक आर्मी कैंप पर हमला किया है. इस हमले में दो जवान समेत 3 लोगों के घायल होने की सूचना है. इंटेलिजेंस ने दी थी वॉर्निंग - न्यूज एजेंसी के मुताबिक, इंटेलिजेंस ने आर्मी या सिक्युरिटी एस्टेबलिशमेंट पर जैश के हमले की वॉर्निंग दी थी। - एजेंसी ने कहा था कि अफजल गुरू की डेथ एनीवर्सरी के मद्देनजर जैश आतंकी बड़े हमले को अंजाम दे सकते हैं। बता दें कि 9 फरवरी 2013 को अफजल को फांसी दी गई थी। आतंकियों ने बंकर पर की फायरिंग न्यूज एजेंसी ने जम्मू के आईजी एसडी सिंह जामवाल के हवाले से बताया कि शनिवार तड़के 4:55 बजे संतरी के बंकर पर फायरिंग की गई। इस पर जवानों की ओर से जवाबी फायरिंग की गई। आतंकी सेना के एक क्वार्टर में घुसे हुए हैं। - इस हमले के बारे में केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने जम्मू-कश्मीर के डीजीपी से बात की है। साथ ही गृह मंत्रालय के अफसरों को इस पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं। आसपास के स्कूल बंद रखने के निर्देश - इस आतंकी हमले के बाद जिला प्रशासन ने कैम्प के आसपास 500 मीटर के...

गुजरात ब्लास्ट में 56 लोगों की मौतों का मोस्ट वॉन्टेड आतंकी अब्दुल सुभान 10 साल बाद अरेस्ट

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार  भारत में छद्दम धर्म-निरपेक्ष किसी न किसी बहाने नरेन्द्र मोदी विरोध कर जनता को गुमराह करने का कारण आतंकवादियों के कन्धे पर बैठ हिन्दू को बदनाम करने की जो मुहिम चला रखी है, का मुख्य कारण है, एक कश्मीर में आए-दिन आतंकवादियों को 72 हूरों के पास पहुँचाना और देश के अन्य भागों से किसी न किसी आतंकवादी को पकड़ने से इनकी साम्प्रदायिकता का पर्दाफाश होना। हिन्दू हित की बात करने वाले को साम्प्रदायिक, फिरकापरस्त और न जाने किन-किन नामों से अलंकृत कर वोट-बैंक को किसी भी प्रकार से बदनाम नहीं होने देते थे। जबकि आज इनके वोट बैंक से अधिक परेशान छद्दम धर्म-निरपेक्ष ही हैं।    इं डियन मुजाहिदीन-SIMI के आतंकी अब्दुल सुभान कुरैशी को गिरफ्तार कर  गणतंत्र दिवस के ठीक पहले आतंकी हमले के मद्देनजर अलर्ट दिल्ली पुलिस को बड़ी सफलता मिली है  लिया। गिरफ्तारी से पहले कुरैशी और पुलिस के बीच गोलीबारी भी हुई। पुलिस ने बताया कि वह 2008 में गुजरात के सीरियल ब्लास्ट का मास्टरमाइंड था और कई साल से नेपाल में रह रहा था। कुरैशी साल 2008 में हुये गुजरात सीरियल ब्लास...

मारे गये आतंकी को पहचानते ही, पुलिस रह गयी भौचक, तीसरे आतंकी की तलाश जारी

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार  जम्मू कश्मीर के पुलवामा के लेथपोरा सीआरपीएफ कैम्प पर फिदायीं हमला करने वाले तीसरे आतंकवादी की खोजबीन जनवरी 1, 2018 तड़के ही फिर से शुरू कर दी गयी है. इससे पहले दिसंबर 31 की रात को दो आतंकियों को जवानों ने मार गिराया था, लेकिन उनका तीसरा साथी बच निकला था. तीसरे आतंकी को खोजने का अभियान अंधेरे के कारण रोक दिया गया था. मारे गए दोनों आतंकी कश्मीर के ही हैं. इनकी पहचान होते ही पुलिस की नींद उड़ गयी है. इनकी पहचान पुलवामा के मंजूर अहमद बाबा और त्राल के फरदीन अहमद के रूप में हुई है. आतंकियों में एक जम्मू-कश्मीर पुलिस के सिपाही का बेटा भी शामिल हैं. उसके पिता गुलाम मोहम्मद खांडे आईजी की सुरक्षा में तैनात था. इस घटना के बाद उसे सुरक्षा से हटा दिया गया है. इस आतंकी हमले में पांच जवान भी शहीद हो गए. गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि देश जवानों और उनके परिवार वालों के साथ खड़ा है. हम अपने जवानों की शहादत को बेकार नहीं जाने देंगे. नूर मोहम्मद तांत्रेय की मौत का बदला सीआरपीएफ कैंप पर आतंकियों ने हमला कर पांच  जवानों को शहीद कर दिया. इस हमले म...

अमरनाथ यात्रा पर हमले का षड्यंत्र

आतंकी हमले कांग्रेस सरकारों में भी होते थे और आतंकी हमले बीजेपी सरकारों में भी हो रहे हैं, फर्क सिर्फ इतना है कि कांग्रेस के समय में आतंकी हमले सरकार को डराने के लिए किये जाते थे। जबकि मोदी सरकार में आतंकी हमले मोदी सरकार को उखाड़ने और कांग्रेस को फिर से वापस लाने के लिए किये जा रहे हैं। आतंकी लोग कांग्रेस को इसलिए वापस लाना चाहते हैं क्योंकि कांग्रेस सरकार में उन्हें बॉर्डर पार कर कश्मीर आने में छूट मिल जाती है, जिहाद करने की छूट मिलती है, कश्मीर में आतंकी कैम्प चलाने की छूट मिलती हैं, आतंकियों को भर्ती करने की छूट मिलती हैं, आतंकी फंडिंग को कोई रोकने वाला नहीं होता।  आतंकियों को पता है कि जब कांग्रेस सरकार होती है तो भारतीय सैनिकों के हाथ बाँध दिए जाते हैं, कांग्रेस सरकार में आतंकी भारत में कहीं भी आ जा सकते हैं, दिल्ली, मुंबई, कलकत्ता, जयपुर, वे कहीं भी बम धमाके कर सकते हैं और उन्होंने करके दिखाया है। लेकिन मोदी सरकार में आतंकियों को बॉर्डर पर ही मार दिया जा रहा है, वे ना तो दिल्ली में धमाके कर पा रहे हैं, ना मुंबई में धमाके कर पा रहे हैं, ना 26-11 जैसा ...

ऑपरेशन शिवा से डरा लश्कर-ए-तैय्यबा

आतंकियों के खिलाफ ‘ऑपरेशन शिवा’ आर्मी प्रमुख विपिन रावत का कश्मीर जाकर हालत पर नज़र रखने पहुँचने पर ही स्पष्ट संकेत मिल रहे थे, कुछ न कुछ खतरनाक कदम उठने जा रहे हैं। इसमें कोई दो राय भी नहीं कि जबसे केन्द्र में सत्ता परिवर्तन हुआ है, सरकार की तुष्टिकरण नीति में गिरावट आनी शुरू हो चुकी है। अपने लेखों में अक्सर लिखता रहता हूँ, कि जिस मुस्लिम वोट के लिए समस्त गैर-भाजपाई उल्टे-सीधे हथकंडे अपने में नहीं चूके, हिन्दू-हिन्दू कर हिन्दुओं का ही हनन करते रहे, सेना को आतंकवादियों पर सख्ती से निपटने के लिए नहीं कहा कि कहीं वोट-बैंक नाराज न हो जाए। किसी भी गैर-भाजपाई ने देश हित में नहीं सोंचा। इनकी कथनी और करनी में ज़मीन आसमान का अंतर था और है। यदि इन पार्टियों ने अपनी कथनी और करनी में अन्तर रखा होता, भारत कहीं का कहीं होता। पाकिस्तान को सबक सिखाया होता तो आज जेएनयू में देश तोड़ने के नारे लगाने का किसी में साहस नहीं होता, कश्मीर में आतंकवाद घर-घर नहीं होता, किसी को किसी भी फौजी पर पत्थर तो दूर एक कंकड़ी भी फेंकने से पहले हज़ार बार सोंचता। तत्कालीन प्रधानमन्त्री इन्दिरा गाँधी ने जब पाकिस्तान के दो ...

सलीम खान को :हीरो" बताने पर मुख़्तार नकवी को लगी फटकार

कश्मीर में श्रीअमरनाथ यात्रा पर हमला और बंगाल की सेक्यूलर हिंसा उन विकृत नीतियों का ही परिणाम है, जिन्हें सेक्यूलर गत 70 बरसों से सेक्यूलरवाद के नाम पर देश में परोस रहे हैं। इसी विकृति ने कश्मीर, केरल के कई क्षेत्र और अब बंगाल को भयावह स्थिति में धकेल दिया है। जब तक सेक्यूलरिज्म के नाम पर जेहादी और कट्टरवादी मानसिकता को प्रोत्साहन मिलता रहेगा, जब तक यह सच स्वीकार नहीं किया जाएगा कि इस आतंकवाद की जड़ ‘रेडिकल इस्लाम’ है, तब तक नये-नये कश्मीर और प. बंगाल बनते रहेंगे। अमरनाथ यात्रियों पर हमले के बाद मीडिया ने धर्म देखकर सलीम को हीरो बनाने में देरी नहीं की क्योंकि भारत का मीडिया धर्म देखकर ख़बरें बनाता है, जैसे ही मीडिया ने देखा कि बस को सलीम चला रहा था वैसे ही ख़बरें बनायी जाने लगीं, किसी ने कहा कि सलीम ने हिन्दुओं को बचाया, किसी ने कहा - सलीम हिन्दुओं का रखवाला बन गया और 50 हिन्दुओं की जान बचा ली, किसी ने कहा कि सलीम अल्लाह के द्वारा भेजा गया था। मतलब बिना जांच पड़ताल किये मीडिया ने सलीम को हीरो बना दिया। अवलोकन करिये :-- http://nigamrajendra28.blogspot.in/2017/07/blog-post_90.html...

अमरनाथ हमला : क्या ड्राइवर सलीम साज़िश में शामिल था?

कश्मीर में श्रीअमरनाथ यात्रा पर हमला और बंगाल की सेक्यूलर हिंसा उन विकृत नीतियों का ही परिणाम है, जिन्हें सेक्यूलर गत 70 बरसों से सेक्यूलरवाद के नाम पर देश में परोस रहे हैं। इसी विकृति ने कश्मीर, केरल के कई क्षेत्र और अब प0 बंगान को भयावह स्थिति में धकेल दिया है। जब तक सेक्यूलरिज्म के नाम पर जेहादी और कट्टरवादी मानसिकता को प्रोत्साहन मिलता रहेगा, जब तक यह सच स्वीकार नहीं किया जाएगा कि इस आतंकवाद की जड़ ‘रेडिकल इस्लाम’ है, तब तक नये-नये कश्मीर और प0 बंगाल बनते रहेंगे। अमरनाथ यात्रा के दौरान हमले का  शिकार हुई बस के ड्राइवर की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जांच एजेंसियों ने अब तक बस ड्राइवर सलीम को क्लीनचिट नहीं दी है। उससे पहले ही जम्मू कश्मीर की सीएम महबूबा मुफ्ती ने उसे इनाम देने और मीडिया ने उसे हीरो बनाने की शुरुआत कर दी है। न्यू इंडियन एक्सप्रेस अखबार ने एक उच्च सुरक्षा अधिकारी के हवाले से खबर दी है कि ड्राइवर की लापरवाही सीधे तौर पर सामने आई है। अखबार ने बताया है कि यह बस अमरनाथ श्राइन बोर्ड से रजिस्टर्ड नहीं थी और न ही इसमें वो जरूरी सुरक्षा जानकारियां दी गई थीं जो...

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To write on general topics and specially on films;THE BLOGS ARE DEDICATED TO MY PARENTS:SHRI M.B.L.NIGAM(January 7,1917-March 17,2005) and SMT.SHANNO DEVI NIGAM(November 23,1922-January24,1983)