आतंकियों के खिलाफ ‘ऑपरेशन शिवा’
आर्मी प्रमुख विपिन रावत का कश्मीर जाकर हालत पर नज़र रखने पहुँचने पर ही स्पष्ट संकेत मिल रहे थे, कुछ न कुछ खतरनाक कदम उठने जा रहे हैं। इसमें कोई दो राय भी नहीं कि जबसे केन्द्र में सत्ता परिवर्तन हुआ है, सरकार की तुष्टिकरण नीति में गिरावट आनी शुरू हो चुकी है। अपने लेखों में अक्सर लिखता रहता हूँ, कि जिस मुस्लिम वोट के लिए समस्त गैर-भाजपाई उल्टे-सीधे हथकंडे अपने में नहीं चूके, हिन्दू-हिन्दू कर हिन्दुओं का ही हनन करते रहे, सेना को आतंकवादियों पर सख्ती से निपटने के लिए नहीं कहा कि कहीं वोट-बैंक नाराज न हो जाए। किसी भी गैर-भाजपाई ने देश हित में नहीं सोंचा। इनकी कथनी और करनी में ज़मीन आसमान का अंतर था और है।
यदि इन पार्टियों ने अपनी कथनी और करनी में अन्तर रखा होता, भारत कहीं का कहीं होता। पाकिस्तान को सबक सिखाया होता तो आज जेएनयू में देश तोड़ने के नारे लगाने का किसी में साहस नहीं होता, कश्मीर में आतंकवाद घर-घर नहीं होता, किसी को किसी भी फौजी पर पत्थर तो दूर एक कंकड़ी भी फेंकने से पहले हज़ार बार सोंचता। तत्कालीन प्रधानमन्त्री इन्दिरा गाँधी ने जब पाकिस्तान के दो टुकड़े किये , यह अटल बिहारी की ही हिम्मत थी कि संसद में कहा "आप दुर्गा हो", लेकिन वही कांग्रेस पाकिस्तान पर सर्जिकल स्ट्रीक करने पर सबूत मांगती है, कितने शर्म की बात है।
जितने आतंकवादी इस वर्तमान सरकार ने हूरों के पास पहुंचाये है, शायद ही इसके आधे पिछली सरकार ने हूरों के पास पहुंचाए हो। बेचारी हूरें इन बाहुबली आतंकवादियों की बाँहों में मस्ती मारने के लिए तरस रहीं थी।
लेकिन ऐसा मत है, अब आर्मी ने "ऑपरेशन शिवा" का श्रीगणेश किया है, यदि अलगाववादी नेता, पत्थरबाज और इनके देश के अन्य भागों में बैठे समर्थक देश की मुख्यधारा से नहीं जुड़े, कहीं इन्हे भी हूरों से रंगरेलियाँ करने भेज दिया जाए।
आज देश आतंकवाद और तुष्टिकरण की आग में जल रहा है, देश के विकास पर खर्च होने वाला धन, व्यर्थ के कामों पर बर्बाद हो रहा था, हो भी रहा है। अभी तो सेना ने ऑपरेशन शिवा का श्रीगणेश किया है, देश विरोधी यानि पाकिस्तान समर्थक नहीं सुधरे तो ऑपरेशन महाकाली या बजरंगबली का लंका दहन ऑपरेशन न प्रारम्भ हो जाए।
अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा के लिए भारतीय सेना ने ऑपरेशन शिवा शुरू किया है, जिसमें 7,500 जवानों को घाटी में घुसे 10-15 खतरनाक आतंकियों को ढूंढकर अपनी गिरफ्त में लेने का जिम्मा सौंपा गया है। केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों और स्थानीय पुलिस ने भी श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए करीब 10 हजार जवानों को तैनात किया है। इन्हें यात्रा के रूट और उससे जुड़ी दूसरी जगहों पर तैनात किया गया है।
यदि इन पार्टियों ने अपनी कथनी और करनी में अन्तर रखा होता, भारत कहीं का कहीं होता। पाकिस्तान को सबक सिखाया होता तो आज जेएनयू में देश तोड़ने के नारे लगाने का किसी में साहस नहीं होता, कश्मीर में आतंकवाद घर-घर नहीं होता, किसी को किसी भी फौजी पर पत्थर तो दूर एक कंकड़ी भी फेंकने से पहले हज़ार बार सोंचता। तत्कालीन प्रधानमन्त्री इन्दिरा गाँधी ने जब पाकिस्तान के दो टुकड़े किये , यह अटल बिहारी की ही हिम्मत थी कि संसद में कहा "आप दुर्गा हो", लेकिन वही कांग्रेस पाकिस्तान पर सर्जिकल स्ट्रीक करने पर सबूत मांगती है, कितने शर्म की बात है।
जितने आतंकवादी इस वर्तमान सरकार ने हूरों के पास पहुंचाये है, शायद ही इसके आधे पिछली सरकार ने हूरों के पास पहुंचाए हो। बेचारी हूरें इन बाहुबली आतंकवादियों की बाँहों में मस्ती मारने के लिए तरस रहीं थी।
लेकिन ऐसा मत है, अब आर्मी ने "ऑपरेशन शिवा" का श्रीगणेश किया है, यदि अलगाववादी नेता, पत्थरबाज और इनके देश के अन्य भागों में बैठे समर्थक देश की मुख्यधारा से नहीं जुड़े, कहीं इन्हे भी हूरों से रंगरेलियाँ करने भेज दिया जाए।
आज देश आतंकवाद और तुष्टिकरण की आग में जल रहा है, देश के विकास पर खर्च होने वाला धन, व्यर्थ के कामों पर बर्बाद हो रहा था, हो भी रहा है। अभी तो सेना ने ऑपरेशन शिवा का श्रीगणेश किया है, देश विरोधी यानि पाकिस्तान समर्थक नहीं सुधरे तो ऑपरेशन महाकाली या बजरंगबली का लंका दहन ऑपरेशन न प्रारम्भ हो जाए।
अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा के लिए भारतीय सेना ने ऑपरेशन शिवा शुरू किया है, जिसमें 7,500 जवानों को घाटी में घुसे 10-15 खतरनाक आतंकियों को ढूंढकर अपनी गिरफ्त में लेने का जिम्मा सौंपा गया है। केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों और स्थानीय पुलिस ने भी श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए करीब 10 हजार जवानों को तैनात किया है। इन्हें यात्रा के रूट और उससे जुड़ी दूसरी जगहों पर तैनात किया गया है।
क्यों डरा लश्कर-ए-तैय्यबा ?
अमरनाथ यात्रा पर गए श्रद्धालुओं पर आतंकी हमले में पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैय्यबा का नाम सामने आ रहा है। सुरक्षाबलों का कहना है कि अनंतनाग के बटेंगू में लश्कर आतंकी अबू इस्माइल ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर आतंकी वारदात को अंजाम दिया था। जानकारों का कहना है कि लश्कर द्वारा जिम्मेदारी लेने के बाद पाकिस्तान पर वैश्विक दबाव बढ़ जाएगा। लिहाजा लश्कर जिम्मेदारी लेने से बच रहा है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि शायद कोई आतंकी संगठन इस हमले की जिम्मेदारी नहीं लेगा, क्योंकि इससे स्थानीय लोगों में आतंकवादियों के खिलाफ गुस्सा भड़क सकता है। अमरनाथ यात्री स्थानीय लोगों के रोजगार के मुख्य साधन रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर सरकार की रिपोर्ट के अनुसार हमलावरों ने बस पर दो बार हमला किया था। पहला हमला हब्बा खातून पेट्रोल पंप के पास तथा दूसरा उससे 75 कदम की दूरी पर किया था। आतंकियों ने पुलिस नाके पर भी फायर किया था और बाद में अरवनी स्थित जी90 बटालियन कैंप पर भी गोलियां चलाई थीं। एक अधिकारी ने बताया कि कई बार फायरिंग करने के बाद आतंकी भागने में कामयाब हो गए।
सेना को आदेश-एक भी जिंदा न बचे
अमरनाथ यात्रियों पर सोमवार को हुए आतंकी हमले के बाद सरकार फुल एक्शन के मूड में आ गई है।
एक हिंदी न्यूज चैनल के मुताबिक इस लिस्ट में पाकिस्तान के रहने वाले अबु दुजाना और अबु हमास, जीनत-उल इस्लाम, वसीम अहमद उर्फ ओसामा का नाम शामिल है। भारतीय सेना इन आतंकियों पर रणनीति बना रही है ताकि एक सुनिश्चित समय के अंदर ही इनका सफाया हो सके।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, लश्कर-ए-तैयबा के पास सबसे अधिक विदेशी आतंकवादी हैं। सोमवार को अमरनाथ यात्रियों पर हुए हमले को लश्कर ने ही अंजाम दिया है। बता दें कि अमरनाथ यात्रियों से भरी बस पर ताबड़तोड़ फायरिंग की गई। इस आतंकी हमले में 7 श्रद्धालुओं की मौत हो गई जबकि 19 घायल हो गए। भारतीय सेना ने मंगलवार से आतंकियों के साथ शुरू हुई मुठभेड़ में तीन आतंकियों को ढेर कर दिया।
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