आज जनता इस बात से कितनी खुश हो रही है, कि सरकार ने बजट में रेल किराया नहीं बढ़ाया। खुश होना भी चाहिए कि कम से कम एक साल तो रेल किराये में वृद्धि से राहत मिली। ऐसा पहली बार नहीं हुआ, जब चुनाव आने को होते हर सरकार जहर का घूंट पीकर वृद्धि को रोकती है और आम चुनाव सम्पन्न होते ही, वृद्धि शुरू। इसी सरकार का देख लीजिए, इस सरकार के पहले रेल मंत्री सदानंद गौड़ा ने अपने पहले ही बजट में रेल किराया बढ़ाया था या नहीं। और इसी सरकार के कार्यकाल में कितनी बार किराए में वृद्धि हुई है, पूछिए रेल मंत्रीजी से। 2019 चुनाव के बाद आने वाले बजट में देखिए कितनी वृद्धि होती है, यह भविष्य के गर्भ में छिपा है। फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली ने रेलवे सेक्टर के लिए लोकलुभावन बजट की घोषणा नहीं की। हालांकि उन्होंने बजट में किराया बढ़ाने की घोषणा न करके पैसेंजर्स को राहत जरूर दी है, लेकिन बजट रेलवे के पॉलिसी ओरिएंटेड रहा। जेटली ने रेलवे को 1.48 लाख करोड़ रुपए की घोषणा की है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि जेटली ने रेलवे की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। जैसा कि, अनुमान लगाया जा रहा था कि य...