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एक हिन्दू नेता एशिया महाद्वीप को एक कर देगा :नास्त्रेदमस

नास्त्रेदमस (Nostradamus) फ्रांस के एक प्रक्षात भविष्यवक्ता थे।  १४ दिसंबर १५०३ को फ्रांस नास्त्रेदमस  क जन्म फ्रांस में हुआ था। उन्होंने राजनीतिक, धार्मिक, प्राकृतिक,  आदी आदी घटनाओं संबंधी कई भविष्यवाणीयां की है और उनकी बहुत सी भविष्यवाणीयों का सच होने का  दावा भी किया जाता  है। १६वीं सदी के  भविष्यवक्ता नास्त्रेदमस ( Nostradamus )  की भविष्यवाणियां बीसवीं शताब्दी के  जन साधारणों के बीच बेहद लोकप्रिय हो गईं हैं। नास्त्रेदमस ( Nostradamus ) की भविष्यवाणीयां पूरी दुनिया  में प्रचलित है । कहा जाता है की  पिछले ४०० सालों में  उनकि ८००  भविष्यवाणियां सच साबित हुई  है । नास्त्रेदमस ( Nostradamus ) की भविष्यवाणीयां पूरी दुनिया  में प्रचलित है । चाहे वो १९४२ में अंग्रेजों के साम्राज्य का दमन होना हो या और कुछ।  नास्त्रेदमस ये भी  कहा था की नाज़ी, यहूदियों  पर नकेल कसने का प्रयास करेंगे  और ये  घटना घटित भी हो चुकी है. नास्त्रेदमस ( Nostradamus ) के भविष्यवाणियों मैं भारत को लेकर भी क...

कैसे हुए भारत के टुकड़े???

अखंड भारत की पूरी कहानी आज तक किसी भी इतिहास की पुस्तक में इस बात का उल्लेख नहीं मिलता की बीते 2500 सालों में हिंदुस्तान पर जो आक्रमण हुए उनमें किसी भी आक्रमणकारी ने अफगानिस्तान, म्यांमार, श्रीलंका, नेपाल, तिब्बत, भूटान, पाकिस्तान, मालद्वीप या बांग्लादेश पर आक्रमण किया हो। अब यहां एक प्रश्न खड़ा होता है कि यह देश कैसे गुलाम और आजाद हुए। पाकिस्तान व बांग्लादेश निर्माण का इतिहास तो सभी जानते हैं। बाकी देशों के इतिहास की चर्चा नहीं होती। हकीकत में अंखड भारत की सीमाएं विश्व के बहुत बड़े भू-भाग तक फैली हुई थीं। एवरेस्ट का नाम था सागरमाथा, गौरीशंकर चोटी पृथ्वी का जब जल और थल इन दो तत्वों में वर्गीकरण करते हैं, तब सात द्वीप एवं सात महासमुद्र माने जाते हैं। हम इसमें से प्राचीन नाम जम्बूद्वीप जिसे आज एशिया द्वीप कहते हैं तथा इन्दू सरोवरम् जिसे आज हिन्दू महासागर कहते हैं, के निवासी हैं। इस जम्बूद्वीप (एशिया) के लगभग मध्य में हिमालय पर्वत स्थित है। हिमालय पर्वत में विश्व की सर्वाधिक ऊंची चोटी सागरमाथा, गौरीशंकर हैं, जिसे 1835 में अंग्रेज शासकों ने एवरेस्ट नाम देकर इसकी प्राचीनता व पहचान को...

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shannomagan
To write on general topics and specially on films;THE BLOGS ARE DEDICATED TO MY PARENTS:SHRI M.B.L.NIGAM(January 7,1917-March 17,2005) and SMT.SHANNO DEVI NIGAM(November 23,1922-January24,1983)