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आरक्षण के मायने

हमारे देश में आरक्षण पर लंबे समय से बहस चली आ रही है कि क्या विद्यालयों, उच्च शिक्षा संस्थानों और नौकरियों में आरक्षण से असमानता को बढ़ावा मिल रहा है ? इस पर लोगों की अपनी-अपनी विचार धाराएं एवं दृष्टिकोण हैं। इस मामले में विरले लोग ही अपने विचारों में परिवर्तन करना चाहते हैं। यही कारण है कि आरक्षण पर देश कभी एकमत नहीं हो पाया।सवर्ण तबके के लोगों को लगता है कि अधिकारहीन लोगों को सामाजिक जन प्रतिनिधित्व के लिए सरकारी सहायता देने की कोई आवश्यकता नहीं है। आरक्षण के प्रति यह विरोध तीन आ धा रों पर है। सुशिक्षित और सवर्ण वर्ग में कुछ लोग यह मानते हैं कि विद्यालयों और नौकरियों में श्रेष्ठता के आधार पर सीट दी जानी चाहिए। इसका परोक्ष अर्थ यह है कि परीक्षाओं और साक्षात्कार में कुछ वर्गों को दी जाने वाली छूट गलत है। इस मांग के साथ वे यह भूल जाते हैं कि सदियों से दमित-शोषित वर्ग; जिसे शिक्षा, कौशल और अन्य सामाजिक एवं अर्थिक सुविधाओं से वंचित रखा गया, आज अचानक ही अधिकार संपन्न वर्गों से प्रतियोगिता में बराबर कैसे खड़ा हो जाए ?दरअसल, सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन एकाएक नहीं हो जाते। इन्हें सफल हो...

क्या अब सवर्ण आंदोलन के नाम पर हिंसा कराएगी कांग्रेस?

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार  भारत में आरक्षण को जारी रखने वाले राष्ट्र को बताएँ कि जातियों के नाम पर अपनी दुकान यानि पार्टी खोलकर कर अपनी ही जाति को भ्रमित कर अब तक इन नेताओं ने कितनी पूँजी अर्जित कर ली है? आरक्षण का दुरूपयोग होते देख, जब डॉ बी.आर. अम्बेडकर ने ही तत्कालीन सरकार से आरक्षण को समाप्त करने का आग्रह किया था, फिर किस कारणवश इसे जारी रखा गया? इतना ही नहीं, डॉ अम्बेडकर ने तो केवल 10 वर्ष माँगे थे, फिर किस कारणवश आज तक इसे लागू किया हुआ है? क्या आरक्षण के पक्षकारों को नहीं मालूम कि आरक्षण के नाम पर जनता को गुमराह किया जा रहा है? जाति और पेशे के नाम पर आरक्षण दिया जाता है, लेकिन इनको उस पेशे के नाम से पुकारा नहीं जा सकता, क्यों? अब इसे राजनीति का दोगलापन न कहा जाए तो क्या कहा जाए? किसी प्रतियोगिता में कम अंक लेने वाले अनुसूचित जाति वालों को प्राथमिकता दी जाती है, लेकिन सवर्ण जाति द्वारा अधिक अंक अर्जित करने वाले देखते रह जाते हैं, क्या यह प्रतियोगिता के नाम पर छलावा नहीं?आखिर कब तक जनता को गुमराह किया जाता रहेगा?  इस सन्दर्भ में अवलोकन करें:-- आरक्षण ख...

आरक्षण और एससी-एसटी एक्ट खत्म हो--राज ठाकरे

महाराष्ट्र के नेता राज ठाकरे ने नया मुद्दा हाथ में ले लिया है। राज ठाकरे ने आरक्षण खत्म कर उसे आर्थिक आधार पर लागू  करने की मांग की है। इतना ही नहीं राजनीति मौत मर रहे मनसे नेता राज ठाकरे ने दलित अत्याचार कानून में भी संशोधन करने की मांग की है। राज ठाकरे ने कहा कि एससी-एसटी एक्ट का बेजा इस्तेमाल होता है। दलित समुदाय इस कानून का दुरुपयोग करते हैं इसलिए इसे बंद कर देना चाहिए। दरअसल कुछ दिन पहले एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने एक विवादित बयान दिया था। जिसमें उन्होंने आरक्षण खत्म करने या फिर उसकी समीक्षा की मांग की थी। अब राज ठाकरे उन्हीं के रास्ते पर चलकर अपना स्पेश बनाने में जुटे हैं। राज ठाकरे ने कहा कि जाति आधारित आरक्षण को आर्थिक आधार पर लागू करना चाहिए महाराष्ट्र में माटी मानुष के मुद्दे पर राजनीतिक रोटी सेंककर देख चुके राज ठाकरे ने एससी-एसटी अत्याचार कानून में भी बदलाव की मांग की है। राज ठाकरे की माने तो एससी-एसटी समुदाय के लोग इसका दुरुपयोग करते हैं। इस मुद्दे को उठाने के लिए आरक्षण संघर्ष समन्वय समिति राज ठाकरे जी का आभार व्यक्त करती है।

योग्यता के बावजूद छोटे पद से रिटायर हो जाते हैं अनारक्षित वर्ग के कर्मचारी

पदोन्नति में आरक्षण समाप्त करने की मांग को लेकर बुधवार को 22 संगठनों के साथ मिलकर सपा क्स संगठन ने हुंकार भरी। पदोन्नति में आरक्षण समाप्त करने की मांग को लेकर बुधवार को 22 संगठनों के साथ मिलकर सपाक्स संगठन ने हुंकार भरी। जिसमें सैकड़ों की तदाद में शामिल हुए अधिकारियों-कर्मचारियों व कर्मचारी संगठन के पदाधिकारियों ने प्रदेश सरकार व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के वक्तव्य की न सिर्फ निंदा की बल्कि हाईकोर्ट के निर्णय के खिलाफ सुप्रिम कोर्ट में याचिका लगाने का विरोध भी किया। पदाधिकारियों ने कहा कि इससे योग्य कर्मचारी और अधिकारी छोटे पद पर रहते हुए सेवानिवृत्त हो जाते हैं और आगे नहीं बढ़ पाते। सामान्य पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग के 80 हजार अधिकारी-कर्मचारियों की पदोन्नति नहीं हो पा रही है। पद्मधर पार्क में हुए एकत्र सपाक्स के सदस्य दोपहर 12 बजे से पद्मधर पार्क में एकत्रित हुए जहां जनसभा आयोजित की गई। सभा के मुख्य अतिथि संगठन के संरक्षक डॉ. केएस तोमर रहे। जिसमें कार्यकारिणी सदस्य पीपी सिंह सहित जिलाध्यक्ष इंजीनियर देवेन्द्र सिंह, राजपत्रित अधिकारी संघ के जिलाध्यक्ष आदित्य तिवारी सहित 22...

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To write on general topics and specially on films;THE BLOGS ARE DEDICATED TO MY PARENTS:SHRI M.B.L.NIGAM(January 7,1917-March 17,2005) and SMT.SHANNO DEVI NIGAM(November 23,1922-January24,1983)