आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार
भारत में आरक्षण को जारी रखने वाले राष्ट्र को बताएँ कि जातियों के नाम पर अपनी दुकान यानि पार्टी खोलकर कर अपनी ही जाति को भ्रमित कर अब तक इन नेताओं ने कितनी पूँजी अर्जित कर ली है? आरक्षण का दुरूपयोग होते देख, जब डॉ बी.आर. अम्बेडकर ने ही तत्कालीन सरकार से आरक्षण को समाप्त करने का आग्रह किया था, फिर किस कारणवश इसे जारी रखा गया? इतना ही नहीं, डॉ अम्बेडकर ने तो केवल 10 वर्ष माँगे थे, फिर किस कारणवश आज तक इसे लागू किया हुआ है? क्या आरक्षण के पक्षकारों को नहीं मालूम कि आरक्षण के नाम पर जनता को गुमराह किया जा रहा है? जाति और पेशे के नाम पर आरक्षण दिया जाता है, लेकिन इनको उस पेशे के नाम से पुकारा नहीं जा सकता, क्यों? अब इसे राजनीति का दोगलापन न कहा जाए तो क्या कहा जाए? किसी प्रतियोगिता में कम अंक लेने वाले अनुसूचित जाति वालों को प्राथमिकता दी जाती है, लेकिन सवर्ण जाति द्वारा अधिक अंक अर्जित करने वाले देखते रह जाते हैं, क्या यह प्रतियोगिता के नाम पर छलावा नहीं?आखिर कब तक जनता को गुमराह किया जाता रहेगा?
इस सन्दर्भ में अवलोकन करें:--
दलितों के ‘भारत बंद’ में हिंसा से उत्साहित कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियां अब सवर्ण आंदोलन की तैयारी में जुट गई हैं। तैयारी के तौर-तरीके को देखकर समझा जा सकता है कि इसके पीछे भी कैंब्रिज एनालिटिका नाम की उस ब्रिटिश कंपनी का हाथ है, जिसे 2019 में राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने का ठेका दिया गया है। ये वही कंपनी है जो हाल ही में दुनिया भर में फेसबुक पर लोगों के डेटा चोरी करने के मामले में पकड़ी गई है। 2 अप्रैल को हुए दलितों के भारत बंद के पीछे भी इसी कंपनी का हाथ माना जा रहा है। उसने देश भर में कई दलित संगठनों और राजनीतिक दलों को मिलाकर उस बंद की रणनीति तैयार की थी। ठीक उसी तर्ज पर प्रतिक्रिया के नाम पर सवर्णों के आंदोलन की योजना बनाई गई है। इसके लिए 10 अप्रैल की तारीख का एलान किया गया। खुफिया अलर्ट्स के मुताबिक इस तथाकथित आंदोलन में कांग्रेस की लोकल इकाइयों के कई नेता सक्रिय हैं। जो अप्रत्यक्ष रूप से यह सिद्ध करती है कि कांग्रेस भी आरक्षण की पक्षकार नहीं, केवल अपनी राजनीती चलाने के लिए वोट बैंक के नाम पर इसका स्वाँग रचा जा रहा था/ है।
भारत में आरक्षण को जारी रखने वाले राष्ट्र को बताएँ कि जातियों के नाम पर अपनी दुकान यानि पार्टी खोलकर कर अपनी ही जाति को भ्रमित कर अब तक इन नेताओं ने कितनी पूँजी अर्जित कर ली है? आरक्षण का दुरूपयोग होते देख, जब डॉ बी.आर. अम्बेडकर ने ही तत्कालीन सरकार से आरक्षण को समाप्त करने का आग्रह किया था, फिर किस कारणवश इसे जारी रखा गया? इतना ही नहीं, डॉ अम्बेडकर ने तो केवल 10 वर्ष माँगे थे, फिर किस कारणवश आज तक इसे लागू किया हुआ है? क्या आरक्षण के पक्षकारों को नहीं मालूम कि आरक्षण के नाम पर जनता को गुमराह किया जा रहा है? जाति और पेशे के नाम पर आरक्षण दिया जाता है, लेकिन इनको उस पेशे के नाम से पुकारा नहीं जा सकता, क्यों? अब इसे राजनीति का दोगलापन न कहा जाए तो क्या कहा जाए? किसी प्रतियोगिता में कम अंक लेने वाले अनुसूचित जाति वालों को प्राथमिकता दी जाती है, लेकिन सवर्ण जाति द्वारा अधिक अंक अर्जित करने वाले देखते रह जाते हैं, क्या यह प्रतियोगिता के नाम पर छलावा नहीं?आखिर कब तक जनता को गुमराह किया जाता रहेगा?
इस सन्दर्भ में अवलोकन करें:--
दलितों के ‘भारत बंद’ में हिंसा से उत्साहित कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियां अब सवर्ण आंदोलन की तैयारी में जुट गई हैं। तैयारी के तौर-तरीके को देखकर समझा जा सकता है कि इसके पीछे भी कैंब्रिज एनालिटिका नाम की उस ब्रिटिश कंपनी का हाथ है, जिसे 2019 में राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने का ठेका दिया गया है। ये वही कंपनी है जो हाल ही में दुनिया भर में फेसबुक पर लोगों के डेटा चोरी करने के मामले में पकड़ी गई है। 2 अप्रैल को हुए दलितों के भारत बंद के पीछे भी इसी कंपनी का हाथ माना जा रहा है। उसने देश भर में कई दलित संगठनों और राजनीतिक दलों को मिलाकर उस बंद की रणनीति तैयार की थी। ठीक उसी तर्ज पर प्रतिक्रिया के नाम पर सवर्णों के आंदोलन की योजना बनाई गई है। इसके लिए 10 अप्रैल की तारीख का एलान किया गया। खुफिया अलर्ट्स के मुताबिक इस तथाकथित आंदोलन में कांग्रेस की लोकल इकाइयों के कई नेता सक्रिय हैं। जो अप्रत्यक्ष रूप से यह सिद्ध करती है कि कांग्रेस भी आरक्षण की पक्षकार नहीं, केवल अपनी राजनीती चलाने के लिए वोट बैंक के नाम पर इसका स्वाँग रचा जा रहा था/ है।
लोकल गुंडों को सौंपी गई जिम्मेदारी
हमारी जानकारी के मुताबिक कैंब्रिज एनालिटिका के एजेंटों ने अलग-अलग शहरों में सवर्ण जाति के असमाजिक तत्वों की मदद से आंदोलन की तैयारी की है। इसके लिए झंडे, बैनर और दूसरे खर्चों के लिए मोटी रकम भी दी गई है। ऐसे गुंडों में सबसे अहम नाम है करणी सेना का नेता सुखदेव सिंह गोगामेड़ी। उसे पूरे राजस्थान के शहरों में आंदोलन की कमान दी गई है। गोगामेड़ी वही है जिसमें हाल ही में राजस्थान उपचुनाव में राजपूतों से कांग्रेस को वोट देने की अपील की थी। राजस्थान में गैंगस्टर आनंदपाल के एनकाउंटर के मामले को भी उसी ने कांग्रेस की शह पर राजपूत अस्मिता का सवाल बना दिया था। गोगामेड़ी पर बलात्कार के भी आरोप हैं। पद्मावती आंदोलन के समय हिंसा के ज्यादातर मामलों में करणी सेना का उसी का गुट सक्रिय था। इसी तरह से हर उस राज्य में लोगों को हिंसा फैलाने का काम सौंपा गया है जहां पर आने वाले दिनों में चुनाव होने हैं।
सोशल मीडिया से नफरत का खेल
कांग्रेस ने फेसबुक और ट्विटर पर सवर्ण, दलित और ओबीसी नामों वाले ढेरों प्रोफाइल बनवाए हैं, जिनके जरिए एक-दूसरे के लिए गालियां लिखी जा रही हैं। दो दिन पहले ही फेसबुक ने एक ऐसे ‘ब्राह्मण फेसबुक ग्रुप’ को ब्लॉक किया है, जिसका एडमिन एक मुसलमान था। इस ग्रुप में सिर्फ दलितों ही नहीं, बल्कि हिंदुओं की दूसरी सभी जातियों को गालियां दी जा रही थीं। इस ग्रुप ने महाराणा प्रताप और भीमराव अंबेडकर के लिए अपमानजनक तस्वीरें और पोस्ट शेयर की थीं। आम तौर पर ऐसे सभी ग्रुप और प्रोफाइल पैसे देकर चलवाए जाते हैं। कुछ दिन पहले कैंब्रिज एनालिटिका के एक पूर्व अधिकारी ने माना था कि कंपनी को भारत में जातीय आधार पर गृहयुद्ध कराने की तैयारी है। जाहिर है लोग कांग्रेस की इस साजिश को समझने लगे हैं और अपील कर रहे हैं कि वो सवर्ण आंदोलन के चक्कर में मोहरा न बने।
हिंसा हुई तो डीएम-एसपी पर गिरेगी गाज
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने को कहा है. गृह मंत्रालय ने राज्यों को भारत बंद के संबंध में परामर्श जारी करते हुए कहा है कि अगर किसी इलाके में हिंसा हुई, तो इसके लिए वहां के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे. यानि हिंसा होने के लिहाज से उन पर गाज गिरनी तय है. मंत्रालय ने एडवाइजरी में यह भी कहा है कि कुछ समूहों द्वारा सोशल मीडिया पर 10 अप्रैल को बुलाए गए भारत बंद के मद्देनजर जरूरी एहतियाती कदम उठाए जाएं.
राजस्थान में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, इंटरनेट सेवाएं बंद
भारत बंद के आह्वान को देखते हुए राजस्थान में सुरक्षा के कडे़ बंदोबस्त किए गए हैं. अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) एनआर के रेड्डी ने बताया कि बंद के आह्वान को देखते हुए जयपुर शहर में सीआरपीसी की धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू की गई है. उन्होंने कहा कि मंगलवार रात से अगले 24 घंटों के लिए जयपुर में इंटरनेट सेवाओं को बंद किया गया है. उन्होंने कहा कि मंगलवार को ना तो कोई रैली नहीं निकाली जा सकेगी, ना ही लोग एकत्रित हो सकेंगे. रेंज के पुलिस महानिरीक्षकों, जिला कलेक्टर्स, पुलिस आयुक्तों को ऐसे तत्वों के साथ तुरंत सख्ती से निपटने के साफ निर्देश दिए गए हैं.
मध्यप्रदेश के कई हिस्सों में सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त
उधर, मध्यप्रदेश के अनेक हिस्सों में एहतियात के तौर पर सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए हैं. पिछली बार दलित संगठनों द्वारा बुलाए गए दो अप्रैल को भारत बंद के दौरान हिंसा भड़कने से प्रदेश के ग्वालियर और चंबल संभाग में 8 लोगों की मौत हो गई थी. भोपाल के पुलिस उपमहानिरीक्षक धमेन्द्र चौधरी ने कहा कि मंगलवार के बंद को देखते हुए पुलिस सोशल मीडिया के संदेशों पर विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा, 'सोशल मीडिया पर नफरत भरे संदेशों को फैलाने वाले लोगों की खिलाफ IPC की धारा 188 के तहत कार्रवाई की जाएगी.' भोपाल में एहतियात के तौर पर धारा 144 लागू की गई है, लेकिन स्कूल, सरकारी कार्यालय और बैंक सामान्य दिनों की तरह काम करते रहेंगे. बंद को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था सख्त रहेगी. हालांकि यहां भी कोई संगठन बंद के समर्थन में आगे नहीं आया है.
चंबल, भिंड में कर्फ्यू लगाया गया, इंटरनेट सेवाएं भी बाधित
चंबल पुलिस रेंज के उपमहानिरीक्षक सुधीर लाड ने बताया कि किसी भी अनहोनी घटना को रोकने के लिए भिण्ड में सोमवार रात 9 बजे से मंगलवार शाम 6 बजे तक कर्फ्यू लगाया गया है. चंबल संभाग में अफवाहों पर नियंत्रण के लिये इंटरनेट सेवाएं बाधित की गई हैं. वहीं, भिण्ड के कलेक्टर इलेया राजा टी ने कहा कि हिंसा की किसी भी हरकत से निपटने के लिए वर्तमान में आरएएफ और एसएएफ की छह कंपनियां यहां तैनात हैं तथा जरूरत पड़ने पर और कंपनियों को बुलाया जा सकता है. दो अप्रैल को बंद के दौरान भड़की हिंसा में भिण्ड जिले में चार लोगों की मौत हो गई थी. सागर जिले में धारा 144 लागू की गई है. वहां भी दो अप्रैल को विरोध प्रदर्शन हुए थे.
मुरैना में भी सख्ती
मुरैना के कलेक्टर भास्कर लाछाकार ने बताया कि मंगलवार को बंद के मद्देनजर से शहर में दो अप्रैल से लगाए कर्फ्यू के बाद पिछले तीन दिन से सुबह 7 बजे से रात 9 बजे तक दी जा रही कर्फ्यू में ढील मंगलवार को नहीं दी जाएगी और दिन और रात में कर्फ्यू लागू रहेगा. जिले में इंटरनेट सेवाएं बाधित रहेंगी तथा सेना को अलर्ट पर रखा गया है और जरूरत पड़ने पर उसे बुलाया जा सकता है।
आज फिर 'भारत बंद'
बीते 2 अप्रैल को दलित संगठनों द्वारा बुलाए गए भारत बंद के दौरान भड़की हिंसा के खिलाफ आज (मंगलवार को) देशभर में कई संगठनों ने फिर से भारत बंद का आह्वान किया है. भारत बंद के दौरान कोई हिंसक घटनाएं न हों, इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारों ने पुख्ता तैयारियां की हैं और भारी संख्या में सुरक्षाबलों को तैनात किया गया है. देश के कई राज्यों में संवेदनशील जगहों पर धारा 144 लागू की गई है. खासकर उस जगहों पर सख्ती बरती जा रही है, जहां पिछले 2 अप्रैल को हिंसा हुई थी. कई जगह इंटरनेट सेवाएं स्थगित की गई हैं.हिंसा हुई तो डीएम-एसपी पर गिरेगी गाज
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने को कहा है. गृह मंत्रालय ने राज्यों को भारत बंद के संबंध में परामर्श जारी करते हुए कहा है कि अगर किसी इलाके में हिंसा हुई, तो इसके लिए वहां के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे. यानि हिंसा होने के लिहाज से उन पर गाज गिरनी तय है. मंत्रालय ने एडवाइजरी में यह भी कहा है कि कुछ समूहों द्वारा सोशल मीडिया पर 10 अप्रैल को बुलाए गए भारत बंद के मद्देनजर जरूरी एहतियाती कदम उठाए जाएं.
राजस्थान में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, इंटरनेट सेवाएं बंद
भारत बंद के आह्वान को देखते हुए राजस्थान में सुरक्षा के कडे़ बंदोबस्त किए गए हैं. अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) एनआर के रेड्डी ने बताया कि बंद के आह्वान को देखते हुए जयपुर शहर में सीआरपीसी की धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू की गई है. उन्होंने कहा कि मंगलवार रात से अगले 24 घंटों के लिए जयपुर में इंटरनेट सेवाओं को बंद किया गया है. उन्होंने कहा कि मंगलवार को ना तो कोई रैली नहीं निकाली जा सकेगी, ना ही लोग एकत्रित हो सकेंगे. रेंज के पुलिस महानिरीक्षकों, जिला कलेक्टर्स, पुलिस आयुक्तों को ऐसे तत्वों के साथ तुरंत सख्ती से निपटने के साफ निर्देश दिए गए हैं.
मध्यप्रदेश के कई हिस्सों में सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त
उधर, मध्यप्रदेश के अनेक हिस्सों में एहतियात के तौर पर सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए हैं. पिछली बार दलित संगठनों द्वारा बुलाए गए दो अप्रैल को भारत बंद के दौरान हिंसा भड़कने से प्रदेश के ग्वालियर और चंबल संभाग में 8 लोगों की मौत हो गई थी. भोपाल के पुलिस उपमहानिरीक्षक धमेन्द्र चौधरी ने कहा कि मंगलवार के बंद को देखते हुए पुलिस सोशल मीडिया के संदेशों पर विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा, 'सोशल मीडिया पर नफरत भरे संदेशों को फैलाने वाले लोगों की खिलाफ IPC की धारा 188 के तहत कार्रवाई की जाएगी.' भोपाल में एहतियात के तौर पर धारा 144 लागू की गई है, लेकिन स्कूल, सरकारी कार्यालय और बैंक सामान्य दिनों की तरह काम करते रहेंगे. बंद को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था सख्त रहेगी. हालांकि यहां भी कोई संगठन बंद के समर्थन में आगे नहीं आया है.
चंबल, भिंड में कर्फ्यू लगाया गया, इंटरनेट सेवाएं भी बाधित
चंबल पुलिस रेंज के उपमहानिरीक्षक सुधीर लाड ने बताया कि किसी भी अनहोनी घटना को रोकने के लिए भिण्ड में सोमवार रात 9 बजे से मंगलवार शाम 6 बजे तक कर्फ्यू लगाया गया है. चंबल संभाग में अफवाहों पर नियंत्रण के लिये इंटरनेट सेवाएं बाधित की गई हैं. वहीं, भिण्ड के कलेक्टर इलेया राजा टी ने कहा कि हिंसा की किसी भी हरकत से निपटने के लिए वर्तमान में आरएएफ और एसएएफ की छह कंपनियां यहां तैनात हैं तथा जरूरत पड़ने पर और कंपनियों को बुलाया जा सकता है. दो अप्रैल को बंद के दौरान भड़की हिंसा में भिण्ड जिले में चार लोगों की मौत हो गई थी. सागर जिले में धारा 144 लागू की गई है. वहां भी दो अप्रैल को विरोध प्रदर्शन हुए थे.
मुरैना में भी सख्ती
मुरैना के कलेक्टर भास्कर लाछाकार ने बताया कि मंगलवार को बंद के मद्देनजर से शहर में दो अप्रैल से लगाए कर्फ्यू के बाद पिछले तीन दिन से सुबह 7 बजे से रात 9 बजे तक दी जा रही कर्फ्यू में ढील मंगलवार को नहीं दी जाएगी और दिन और रात में कर्फ्यू लागू रहेगा. जिले में इंटरनेट सेवाएं बाधित रहेंगी तथा सेना को अलर्ट पर रखा गया है और जरूरत पड़ने पर उसे बुलाया जा सकता है।
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